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कॉविड-19 एक लाइलाज बीमारी है, इससे बचने के लिए सोशल डिस्टेंसी अनिवार्य है

झांसी। मेडिकल स्टाफ, पुलिस फोर्स, सफाई कर्मी सहित अन्य सहयोगियों को हार्दिक धन्यवाद। मानवता की सेवा पर आप सभी का सम्मान कोटि-कोटि आभार। उक्त उद्गार  सांसद झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र अनुराग शर्मा ने विकास भवन सभागार में उपस्थित स्टाफ को पी पी ई किट्स, सेनेटाइजर, मास्क भेंट करते हुए व्यक्त किए। सांसद  अनुराग शर्मा ने कहा कि कॉविड-19 एक लाइलाज बीमारी है। इससे बचने के लिए सोशल डिस्टेंसी अनिवार्य है। उन्होंने मेडिकल स्टाफ, पुलिस फोर्स, सफाई कर्मी, एनजीओ, नागरिक सुरक्षा सहित अन्य ऐसे संगठन जिन्होंने कोरोना वायरस से निपटने में सहयोग दिया, उन सभी का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमें लगातार लंबे समय तक सतर्क रहना है। झांसी के सांसद द्वारा निजी ट्रस्ट पंडित विश्वनाथ शर्मा हिंदू धर्मार्थ न्यास द्वारा प्रशासन को 200 पी पी ई किट्स, 200 मास्क तथा 60 सैनिटाइजर कोरोना वायरस से निपटने हेतु भेंट किए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सूचना दें और उपलब्ध कराये जाएगे।  जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने बताया कि लॉक डाउन में प्रशासन बेहद गंभीर है। अब तक 42000 दिहाड़ी श्रमिकों के खाते में 1000 रूपया हस्तांतरित किए जा चुके हैं। नगर में लगातार सामुदायिक रसोई संचालित हो रही है, जिसके माध्यम से गरीब, असहाय, जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कोरोना वायरस से निपटने में डॉक्टर, पुलिस व सफाई कर्मियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर सीएमओ डॉक्टर गजेंद्र कुमार निगम, एसडीएम संजीव कुमार मौर्य, सांसद प्रतिनिधि अतुल अग्रवाल, नगर मजिस्ट्रेट सलिल पटेल, सीओ सिटी संग्राम सिंह सहित अन्य अधिकारी, मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मी, पुलिस कर्मी उपस्थित रहे।


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परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

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