महामारी से जूझने की प्रेरणा देती हैं अनिल की गजलें

अनिल मानव की गजलें गर्दिश में डूबे सितारों को चमकने की आशा हैं और आज के वैश्विक संकट और महामारी से हौसले के साथ जूझने की प्रेरणा देती हैं। किसानों, एवं मजलूमों के दर्द को बयां करते हुए अपनी रचनात्मकता भी व्यक्त करतें है। यह बात सीपीएम डिग्री की अध्यापिका और मशहूर आलोचक डाॅ. सरोज सिंह ने गुरुवार को ‘गुफ्तगू’ द्वारा आयोजित ऑनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में अनिल मानव की गजलों पर विचार व्यक्त करते कहा। फरीदाबाद की वरिष्ठ साहित्यकार नमिता राकेश ने कहा कि अनिल मानव एक सुलझे हुए गजलकार हैं। उनकी गजलों में आम आदमी की पीड़ा के साथ-साथ सामाजिक विडम्बनाओं पर सीधा कटाक्ष साफ दिखाई पड़ता है। वरिष्ठ कवयित्री डाॅ. नीलिमा मिश्रा के मुताबिक हौसलों से लबरेज एक ऐसा शायर हैं अनिल मानव, जो हर मुश्किलों से टकराना और खिजां को बहारों के मौसम में बदल
देने का हुनर बखूबी जानता है। इश्क सुल्तानपुरी ने कहा कि अनिल की शायरी में नए कलेवर नए प्रतीक और नए अंदाज के दर्शन होते हैं। कम उम्र में इनके अंदर अनुभूतियों का जो गाम्भीर्य है, वह संकेत करता है कि आने वाले समय में साहित्य के संसार को अनिल मानव अपनी शायरी से रोशन करेंगे। बेगूसराज के वरिष्ठ गजलकार मासूम रजा राशदी के अनुसार जब आस टूटने लगे, ना उम्मीदी दिलों में घर करने लगे, हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा दिखाई दे, तो ऐसे वक्त में अनिल मानव से रुबरु होते ही दिल नई उमंगों, नई उम्मीदों और नई रौशनी से जगमगा उठता है। इनके अलावा सागर होशियारपुरी, प्रभा शंकर शर्मा, रचना सक्सेना, सम्पदा मिश्रा, अर्चना जायसवाल, नीना मोहन श्रीवास्तव, ममता देवी, रमोला रूथ लाल आरजू, शगुफ्ता रहमान, डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’, मनमोहन सिंह ‘तन्हा’, संजय सक्सेना, ऋतंधरा मिश्रा तामेश्वर शुक्ल ‘तारक’, अना इलाहाबादी और शैलेंद्र जय ने विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। शुक्रवार को जमादार धीरज के काव्य संग्रह ‘भावांजलि’ पर परिचर्चा होगी।