कपिल की कविताओं में प्राकृतिक सौंदर्य की सजीवता: अर्चना

प्रयागराज। शैलेंद्र कपिल की कविताओं में प्राकृतिक दृश्य का चित्रण कविताओं को सजीवता से भर देता है। विविधताओं से भरी रचनाओं में प्रकृति के प्रति लगाव और निकटता की स्पष्ट झलक दिखती है। जीवन में दिन प्रतिदिन होने वाली बातों को प्रकृति के साथ मेल आपकी कविता में नया रंग भरती है। भविष्य में होने वाले नव परिवर्तन की आकांक्षा को भी प्रकृति के साथ संयोजन कर आकर्षित ढंग से प्रस्तुत किया है। यह बात गुफ्तगू द्वारा आयोजित आॅनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में कवयित्री अर्चना जायसवाल ने शैलेंद्र कपिल की कविताओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। कवयित्री ऋतंधरा मिश्रा ने कहा कि शैलेंद्र कपिल की कविताओं में प्राकृतिक सौंदर्य, प्रेम, बालपन और भी कई आयाम जगह-जगह दिखाई पड़ते हैं। इन्होंने अपनी कविताओं को सुंदर भाव में रचा है, देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत मां भारती के प्रति समर्पित इतिहास के पन्नों को बड़ी ही खूबसूरती से करने की कोशिश की है। देश प्रेम तथा मानवता को भी जागृत करने का प्रयास किया है। ऐसी ही कविताओं की आज देश और समाज को जरूरत है। वरिष्ठ गीतकार जमादार धीरज ने कहा कि शैलेन्द्र कपिल की कविताओं में मानव मूल्यों की उपासना है। वास्तव में कविता अव्यक्त को व्यक्त करने की सुंदर प्रक्रिया है। इनकी रचनाओं में जीवन दर्शन की तलाश है। उनमें सामाजिक चेतना के प्रति अगाध आस्था प्रगट होती है। कवि साहित्य के साथ मानव कल्याण और जीवन बोध के प्रति संकल्पित और समर्पित है। उनकी मान्यता है कि हर भारतीय भिन्न भिन्न भाषा और पहचान रखते हुए इंसानियत का प्रतीक है।
डाॅ. ममता सरुनाथ ने कहा कि शैलेश कपिल की रचनाओं में प्रकृति के सभी रंग देखने को मिलते हैं। कहीं पंछी की चहचहाती आवाज है, तो कहीं नदी की कल-कल
ध्वनि, विविधता से भरी आपकी रचनाओं में सजीवता है। ‘लहरों को देख धडकन तेज हो जाती है, जिन्दगी की रफ्तार में वेग आ जाता है।’ एक सकारात्मक सोच पैदा करती है।
इनके अलावा नरेश महारानी, मनमोहन सिंह तन्हा, रमोला रूथ लाल आरजू, अतिया नूर, शगुफ्ता रहमान, सागर होशियारपुरी, सुमन ढींगरा दुग्गल, शैलेंद्र जय और डाॅ. नीलिमा मिश्रा ने विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। शुक्रवार को शगुफ्ता रहमान की कविताओं पर परिचर्चा होगी।