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नारी पीड़ा का मार्मिक वर्णन करती हैं डाॅ. ममता: तारक


डॉ. ममता सरुनाथ की रचनाएं एक से बढ़कर एक हैं। आपकी रचनाएं प्रकृति प्रेम, नारी पीड़ा, बेटी और मित्रता आदि विषयों से ओतप्रोत हैं, नारी पीड़ा का वर्णन बहुत बहुत ढंग से किया गया है। साथ ही कविताओं में संकल्प एवं ढृढ़ निश्चय के भाव का प्राकट्य हो रहा है। निश्चित ही आपके काव्य सृजन समाज के लिये मार्गदर्शक का काम करती हैं, तथा साहित्य जगत की अमूल्य कृति हैं। यह बात गुफ्तगू की ओर से आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा में तामेश्वर शुक्ल ‘तारक’ ने डाॅ. ममता सारुनाथ की कविताओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
शैलेंद्र कपिल ने कहा, डाॅ. ममता सरूनाथ समसामयिक विषयों से सरोकर रखती हैं, वह एक समाज शास्त्री एंव समाजसेविका होने के नाते महिलाओं की अदम्य शक्ति में विश्वास प्रकट करते हुए कहती हैं-‘चुप्पी तोडो मुंह को खोलो/बहुत हुई खामोशी/तुम बनकर चिंगारी और ज्वाला/हो रहे सामाजिक अन्याय को सहो नहीं।’ खुदा में पूरा विश्वास व्यक्त करते हुए आस्तिकता का परिचय देती हैं कि दुआंए कबूल होती हैं, जद्दोजहद कभी मत छोडो। हर प्रकार के हालात व चुनौतियों को स्वीकारो व अपने भीतर आत्मविश्वास जगाकर हालात को सुधारो। मनमोहन सिंह तन्हा के मुताबिक डॉ. ममता सरुनाथ की रचनाएं भाव प्रधान होने की वजह से समाज मे सकारात्मक नजरिए से जीने का सम्बल प्रदान करती हैं। सभी विषयों पर रचा गया साहित्य हृदय मे उठ रही तरंगों का अद्भुत रूप है। काव्य मे शिल्प पक्ष पर थोड़ा और ध्यान देने की आवश्यकता है, पर रचनाकार का समाज और प्रकृति के प्रति चिंतन और अनुभव कविता में गांभीर्य पैदा करता है।
शगुफ्ता रहमान ने कहा, डॉ. ममता सरूनाथ की रचनाऐं सरलता, सहजता एवं प्रकृति के सौंदर्य को अपनी लेखनी के शब्द रूपी मोती में पिरोकर भाव प्रधान, समाज को प्रेरित करने वाली, चिंतन एवं महिला अधिकारों के लिए सजग एवं तत्पर दिखाई देती हैं। वो आपकी कविताओं में सकारात्मक सोच, समाज के सभी वर्गों के लिए तड़प भी दिखाई देती हैं, भाषा शैली के अनुसार आप की कविताएं गंभीर चिंतन, विषय वस्तु के साथ सरल भी है। इनके अलावा नरेश महारानी, डाॅ. सुरेश चंद्र द्विवेदी, सुमन ढींगरा
दुग्गल, अर्चना जायसवाल ‘सरताज’, ऋतंधरा मिश्रा, सागर होशियारपुरी, जमादार धीरज, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’, अनिल मानव, रचना सक्सेना और डाॅ. नीलिमा मिश्रा ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। शनिवार को नोएडा के मशहूर गजलकार विज्ञान व्रत की गजलों पर परिचर्चा होगी।


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