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प्रैक्टिकल मौजू पर शायरी करते हैं बुद्धिसेन: डाॅ. समर

जिस तरह चांद और तारों की रोशनी किसी की मोहताज नहीं, उसी तरह शायर बुद्धिसेन शर्मा किसी भी परिचय के मोहताज नहीं, इनकी शायरी में तमाम खूबसुरत पहलू आपको साफ तौर पर नजर आयेंगे। उनकी शायरी बिल्कुल आज के हालात को छूकर गुजरती है। वे प्रैक्टिकल मौजू पर शायरी करते हैं। उनका अंदाज-बयान खूबसूरत हैं, जिसकी वजह से सुनने और पढ़ने वाले पर फौरन असर छोडने में कामयाब हो जाते हैं। यह बात कुशीनगर के मशहूर शायर डाॅ. इम्तियाज समर ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित आॅनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में बुद्धिसेन शर्मा की शायरी पर विचार व्यक्त करते हुए कही। वरिष्ठ शायर सागर होशियारपुरी ने कहा कि बुद्धिसेन शर्मा गंगा जमुनी भाषा में शायरी करते हैं और उर्दू के अल्फाज में इजाफत के इस्तेमाल से परहेज करते हैं ताकि भाषा जटिल न हो। उनकी शायरी में दर्द के एहसास और मोहब्ब्त की खुश्बू आती है, वहीं इंसान के किरदार में गिरावट और दोस्ती में बेवफाई की जिक्र दिखता है। प्रकृति और अन्य विषयों पर अशआर करते हैं जो सुनने वालों के दिलों में उतर जाता है। इश्क सुल्तानपुरी के मुताबिक वर्तमान में साहित्य की हर विधा के मर्मज्ञ और सार्थक गजलों के कारीगर बुद्धिसेन शर्मा द्वारा गजल लेखन का आदर्श
स्थापित किया गया है। आज आपाधापी के दौर में जहाँ भाषा के व्याकरण और सौंदर्य को दरकिनार कर रचनाकार सस्ती लोकप्रियता के फेर में लगे रहते हैं, ऐसे समय मे विशुद्ध साहित्य साधना में शर्मा जी लगे हुए हैं। आपकी गजलें आमफहम जबान मे मानव जीवन के सभी पहलुओं की चिंता करती हैं। अपने जीवन के सतत संघर्ष और दुखों को जमा पूंजी बनाकर आपने बुजुर्गों द्वारा डाली गयी नींव पर गजलों का एक सलोना संसार बनाया है। ऋतंधरा मिश्रा ने कहा कि बुद्धिसेन शर्मा की गजलें आज के परिवेश में सटीक दिखती हैं और आम आदमी भी बड़ी आसानी से लफ्जों के भाव को समझ सकता है। इन्होंने  सामाजिक सरोकारों पर व्यंग्य रिश्तो के आपसी कशमकश तो कहीं श्रृंगारमय मोहब्बत, जिंदगी के सभी आयामों पर अपने चिंतन को बड़ी ही खूबसूरती से शायरी में व्यक्त किया है। इनके अलावा मनमोहन सिंह तन्हा, शैलेंद्र जय, डॉ. ममता सरूनाथ, डॉ. शैलेष गुप्त वीर, रमोला रूथ लाल, नरेश महारानी, जमादार धीरज, शगुफ्ता रहमान, प्रभाशंकर शर्मा, संजय सक्सेना, नीना मोहन श्रीवास्तव, सुमन ढींगरा दुग्गल, रचना सक्सेना, विजय प्रताप सिंह, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, अनिल मानव, सुनील दानिश और अर्चना प्रयागराज ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। मंगलवार को सुमन ढींगरा दुग्गल की शायरी पर परिचर्चा होगी।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति