गोल्डन बाबा का निधन

जन्म के पश्चात् मृत्यु सुनिश्चित है, इसी क्रम गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर सुधीर कुमार मकक्ड़ ने 1 जुलाई, 2020 को माया रूपी दुनिया को छोड़कर अलविदा कह दिया। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उतराखंड में गोल्डन बाबा के नाम से मशहूर सुधीर कुमार मकक्ड़ ने गोल्डन बाबा बनने तक का सफर रहस्य और रोमांच से भरा हुआ है। उनका लगाव पूर्वी दिल्ली में गीता काॅलोनी स्थित श्मशान घाट से था और इसका जिक्र भी उन्होंने कई बार किया था। यही वजह है कि उनका अंतिम संस्कार गीता काॅलोनी में किया गया। कोरोना की वजह से बहुत कम लोग ही इसमें शामिल हुए। ऐसा लोगों का कहना है कि संन्यासी बनने से पहले बाबा कपड़ा कारोबारी होने के साथ ही जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह थे। गांधी नगर थाना क्षेत्र के घोषित बदमाश रहे हैं। बाबा के खिलाफ फिरौती, अपहरण, उगाही, जान से मारने की धमकी समेत कई मुदकमें दर्ज रहे। बताया जाता कि 1972 से ही बाबा को सोना पहनना काफी पसंद था। वह सोने को अपना देवता मानते थे। बाबा हर वक्त कई किलो सोना पहने रहते थे, हाथों की सारी अंगलियों में अंगूठी, हाथ में कड़ा और गले में सोने की मोटी चेन पहननते थे। गांधीनगर के अशोक गली में उन्होंने अपना छोटा-सा आश्रम भी बनाया था। इसके अलावा हरिद्वार के कई अखाड़ों से भी उनके नाम जुड़े हैं। कहा जाता है कि वह अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए अध्यात्म की शरण में आए थे।
 गोल्डन बाबा सुरक्षा में करीब 30 निजी गार्ड लगे हुए थे। गोल्डन बाबा हर साल हरिद्वार से कांवड़ लाते थे। इस दौरान जब वह कांवड लेकर दिल्ली वापस लौटते थे तो वह भोले बाबा की मूर्ति के पास बने शिवाल्य पर जल चढ़ाते थे। पूर्वी दिल्ली में नाम कमाने वाले गोल्डन बाबा फिलहाल साहिबाबाद में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। गोल्डन बाबा कई सालों से हरिद्वार के कई अखाड़ों से जुड़े थे। उनके अनुयायियों की संख्या हजारों में थे। एक बार गोल्डन बाबा 15 किलो सोने के जेवरात पहनकर निकले। गाड़ी की छत पर बैठे गोल्डन बाबा को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सेल्फी लेने लग गए। हर मनुष्य में अच्छाई और बुराई दोनों रहता है। गोल्डन बाबा बाबा निधन भी बहुत लोगों के लिए दुखद है। ईश्वर से कामना करते है कि उन्की आत्मा को शन्ति मिले।


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