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अंतरराष्ट्रीय वैश्य अग्रहरी समाज

डीह रायबरेली, डीह सुंदर गंज चौराहा स्थित अंतरराष्ट्रीय वैश्य अग्रहरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय अग्रहरि का अग्रहरि समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया जय अग्रसेन के नारों के साथ उनका माल्यार्पण किया l अध्यक्ष पवन अग्रहरी ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गुजरात से चलकर डीह की धरती पर आने से सजातीय बंधुओं में खुशी की लहर दौड़ गई इतनी दूर से आए समाज के अध्यक्ष श्री अजय अग्रहरि से मिलकर सभी अग्रहरी बंधुओं खुशी से उनके गले ललग लिए l राष्ट्रीय अध्यक्ष ने व्यापारियों के एवं समाज के लोगों से इतना खुश थे कि उन्होंने कहा कि जहां पर भी मेरी जरूरत पड़ेगी हमें याद करिएगा मैं समाज के साथ  कंधे से कंधा मिलाकर चल कर उनका साथ निभाएंगे और डीह अग्रहरी समाज के लोगों को एवं पूरे प्रदेश एवं देश के सजातीय बंधुओं का दिल से पूरी मदद करने की कोशिश करूँगा l  उन्होंने कहा कि गरीब बेटियों की शादी निर्धन व्यक्तियों का आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए  समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए जिससे समाज का उत्थान हो सके,और कहा कि मैं अग्रहरि समाज को बैकवर्ड में ले जाने के लिए पूर्व जोर समर्थन करता हूं एवं हाईकोर्ट में पीटीसंन् भी दायर की है  उम्मीद करते हैं कि अग्रहरी समाज को पिछड़ी जाति में जोड़ा जिससे समाज को आगे बढ़ने में लाभ मिले l  व्यापार मंडल अध्यक्ष पवन अग्रहरि ने कहा कि ऐसे समाज के ओजस्वी एवं समाज के प्रति इतना लगाव रखने वाले व्यक्तित्व के धनी अजय अग्रहरी अपनी पूरी टीम एवं प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश जी एवं जिला अध्यक्ष के साथ यहां आकर लोगों के मन में अपनी जो जगह दिल में बनाई है उससे पूरा डीह का अग्रहरी समाज उनका ऋणी रहेगा समाज के एक निवेदन में इतनी दूर से चलकर आए अग्रहरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपना व्यस्त कार्य छोड़कर समाज के लिए इतना लगाव रखने वाले व्यक्ति है, पूरा समाज इनके साथ खड़ा है,  कार्यक्रम में पवन अग्रहरि, हरिओम अग्रहरी, राजेंद्र अग्रहरी, शीतल अग्रहरी, शिव सागर,अग्रहरी शिव प्यारे,अग्रहरी, रिंकू अग्रहरी,अशोक अग्रहरी,मोंटू अग्रहरी,राम प्रसाद अग्रहरी, महेश अग्रहरी, मेवालाल नंद कुमार पाल शुभम शैलेंद्र आदि सैकड़ों समाज के लोग रहे मौजूद
 

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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति