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आज के वैज्ञानिक युग में हल्दी अपने विशेेष गुणों के कारण चिकित्सा औषधि विज्ञान जगत में अपना एक विशेष स्थान रखती है

प्रकृति ने प्राणिमात्र के कल्याण हेतु समस्त वनस्पतियों में अमृत भर दिया हैं, जो वनस्पतियां हमारे आपके तन-मन की जरूरतों को पूरा करती हैं। हल्दी इन्हीं चमत्कारी औषधियों में एक विषेश खाद्य उपयोगी गुणकारी वनस्पति हैं। मैंने स्वयं अपने पिता ़श्री राज वैद्य श्री भगवान देव आर्य के सानिध्य में रह कर के जो अनुभव गुरूकुल औषद्यालय, हरिद्वार में प्राप्त किये थे। मैं आपको हल्दी के चमत्कारी कल्याणकारी अद्भुत गुणों एवं प्रभावों की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ। हल्दी जो सम्पूर्ण भारतवर्ष में सर्वत्र आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिससे आपकी मनोकामना, यश, मान-सम्माम, शादी-विवाह, में विलम्ब तथा भवन-गृह वस्तु दोषों का विधि-विधान में करने पर सहायता करती है। वैसे भारत वर्ष की पावन भूमि में हल्दी की 32 प्रजातियां पाई जाती हैं जिसमे (1) पीली हल्दी (कुरकुमा लामा), (2) आमा हल्दी (कुरकुमा अदामा), (3) काली हल्दी (कुरकुमा एरोमेटिक) आदि प्रमुख हैं। जिसका दैनिक प्रयोग आदिकाल से मानव उबटन के रूप में आज भी करता चला आ रहा हैं और आज भी शरीर में कही भी चोट लगने पर हल्दी का चुर्ण को दुध के साथ पीने का चलन बहुत पुराना हैं। चोट, मोच, अस्थि एवं पस भरे मावद को घाव से बाहर निकालने के लिये गर्म तेल ,महलम आदि में आज भी हम आप पिसी हल्दी को तिल के तेल में मिलाकर प्रयोग करते हैं हल्दी की मालिश करने से त्वचा के रोग नष्ट हो जाते हैं। छोटी माता के प्रकोप से पीड़ित व्यक्ति के षरीर में हल्दी चुर्ण लगाने पर दोनों की पपड़ी आसानी से उतर जाती हें। रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण हैं। आप हम सब अपने भोज्य पदार्थो में हल्दी की पूर्ति करते ही रहते हैं। इसके अतिरिक्त अब मैं आपका ध्यान हल्दी के चमत्कारी गुणों की विलक्षण शक्तियों की ओर दिलाना चाहता हूँ। एक समान्य जन समस्या हैं कि किसी कार्य में मन न लगना, कार्य-कुशलता का हृास असामान्यजनक स्थिति का सामना करना या विवाह जैसे शुभ कार्य में देरी होना आदि सभी में अनूठा चमत्कारी प्रयोग निम्नलिखित विधि- विधान को आपना कर के एकान्त पवित्र स्थान पर या पूजा स्थान पर सच्चें मन से श्रद्वा के साथ गुरूवार को (7) हल्दी की गाठें, (7) पीले जनेऊ, (7) गुड़ की डली, (7) सूर्य मंत्र के पीले कपडे में बाध कर पूजा स्थल में रख के धूप दीप के साथ गुरू मंत्र का जाप 40 दिन तक निम्नलिखित विधि से मंत्र का जाप 101 बार करें और प्रभाव देखें। यदि आपके दैनिक जीवन में भय (डर) बना रहता हो या दिल घबराता हो तो छोटी सी हल्दी की गांठ पीले कपडे में बाँध करके विस्तार के नीचे रखें। गांठ को बिस्तर के नीचे रखें। गांठ को बिस्तर के नीचे रहने देवें। हटाने की जरूरत नहीं है। आप अपने सिर के पास ताबें के लोटे में लाल फूल, चीनी ड़ाल कर रखें व सुबह पवित्र हो कर के सूर्य को नमस्कार प्रणाम कर के जल-दान करें और आप मन से भक्ति भावना का अनुभव करें तो आपको समस्त रोग विकार-रक्त दोष-हदय रोग आदि से नष्ट हो जावेंगे। ऐसे करने से कुछ ही दिनों में आपको समस्त व्याधियों से मुक्ति मिल जाएगी। यदि आपको समाजिक यश, मान, प्रतिष्ठा एवं सफलता प्राप्त करनी हो तो आप हल्दी की एक छोटी गांठ को पीले रिबन में स्त्री हो तो बांयी भुजा में पुरूष हो तो दाहिनी भुजा में बांध कर धारण करें। तो आप को निश्चय ही मनोवंछित फल, यष, मान-सम्मान जीवन में प्राप्त होगें। जो व्यक्ति किसी न किसी कारणवश पुखराज जैसे कीमती रत्न को पहनने की सामर्थ न जुटा पाता हो ऐसे में स्त्री पुरूष दोनों एक हल्दी की गांठ अपनी भुजा में बाधे तो केवल हल्दी धराण करने से ही पुखराज जैसे कीमती रत्न के समतुल्य फल प्राप्त होते है। ऐसे अदभुत परोपकारी कल्याणकारी विलक्षण गुणों से परिपूर्ण चमत्कारी रहस्य हल्दी में विद्यमान हैं आप भी हल्दी के चमत्कारी परोपकारी गुणों का उपयोग कर अपने जीवन में करें। इसके अतिरिक्त कभी-कभी गृह भवन निर्माण वास्तु दोषों के कारण बीमारियों में धन और स्वास्थ्य बरबाद होने के साथ साथ भूत-प्रेत आदि का भय अक्सर बना ही रहता हैं। ऐसी विकराल दयनीय परिस्थ्तिियों में आप एक हल्दी के एक टुकडे को एक ताबें और एक तरफ लोहे के छल्ले को तार से बाध कर के अपने मुख्य द्वार पर लटका देवें ऐसा योग करने से आपको अपने शत्रुओं के डर से मुक्ति निष्चित मिल जाएगी।
आज के वैज्ञानिक युग में हल्दी अपने विशेष गुणों के कारण चिकित्सा औषधि विज्ञान जगत में अपना एक विशेष स्थान रखती हैं, चाहे वह बाह्य रोग हो या आन्तरित रोग हो । हल्दी का उपयोग वैद्य की सलाह पर यथा स्थान प्रयोग करने से निश्चित रूप से लाभ मिलता हैं। यहाँ तक कि सर्दी, जुकाम, हरारत थकान या हल्का बुखार, खांसी, जुकाम, बलगम, सम्बन्धी तथा पेट और गले के अन्दरूनी समस्त रोगों का उपचार भी हल्दी से बडी आसानी से किया जा सकता हैं। यहाँ तक कि आज की खतरनाक बीमारी, जानलेवा रहस्य मय निमोनिया जिससे पूरी दुनिया में भय व्याप्त हो चुका हैं। मैं बडे ही विश्वास और दावे के साथ कह सकता हूँ। कि ऐसे जानलेवा भयानक रोगों का भी इलाज एक मात्र हल्दी से ही सम्भव हैं। वैद्यों हकीमों द्वारा निर्देशित विधियों से हल्दी का प्रयोग करने से बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। जिसे लेकर तमाम बडें बडें वैद्य, हकीम, डाक्टर, वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता इसलिए हल्दी की गुणवत्ता को जन-जन तक पहुँचाना नितान्त आवश्यक हैं। वैसे शहर की अपेक्षा ग्रामीणजन अच्छी तरह समझते हैं और उसका फयदा उठाते हैं।


 


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