सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शान-ए-इलाहाबाद’ सम्मान

समाज में बढ़ी विडंबनाओं के खिलाफ लोगों ने लिखना, बोलना बंद कर दिया है, यह बेहद खतरनाक है। समाज में घटी घटनाओं को लेकर लोग सोचते हैं कि हमसे क्या मतलब। यह सोच आज समाज के लिए बहुत घातक है, क्योंकि वही स्थिति बारी-बारी सबके सामने आनी है। यह बात प्रो. अली अहमद फातमी ने गुफ्तगू की ओर से धूमनगंज, प्रयागराज के हनुमान वाटिका में आयोजित 'शान-ए-इलाहाबाद सम्मान' समारोह और पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा कि बाजारवाद के दौर में गुफ्तगू जैसी पत्रिका का प्रकाशित होना और अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को सम्मानित करना बड़ा काम है। इम्तियाज गाजी ने अपनी टीम के साथ यह करके दिखा दिया है। जिन लोगों को सम्मानित किया गया, वे सारे लोग अपने क्षेत्र के खास लोग हैं। प्रो. फातमी ने कहा कि अच्छी शायरी के लिए ज्यादा पढ़ा-लिखा होना जरूरी नहीं है, बल्कि समाज को समझना ज्यादा जरूरी है। गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि आज के दौर में पत्रिका निकलना बेहद मुश्किल काम है, लेकिन कुछ अच्छे लोगों के सहयोग से हम यह काम कर रहे हैं। गुफ्तगू की पूरी टीम मिलकर काम कर रही

पोषक तत्वों से भपूर गुणकारी राजमा

राजमा गुणकारी खाद्य पदार्थ है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसकी कई प्रजातियां पाई जाती हैं इसमें फाइबर भी पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के साथ-साथ कब्ज जैसी परेशानियों से भी छुटकारा दिलाने का काम करता है। इसके अलावा, इसमें आयरन, कॉपर, फोलेट ,मैÛ्रीशियम, कैल्शियम और विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व पा, जाते हैं। शरीर से जुड़ी विभिन्न परेशानियों के लिए राजमा किस प्रकार फायदेमंद होता है। भरपूर एनर्जी:- राजमा खाने से हमें ताकत मिलती है, क्यूंकि इसमें आयरन की अधिकता होती है। शरीर में मेटाबॉलिज्म बढ़ाने व एनर्जी के लिए आयरन सबसे जरुरी है। इसके खाने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह सुचारू रूप से होता रहता है। वजन कम करने में सहायक:- राजमा में औसत कैलोरी पाई जाती है, जिसे किसी भी उम्र का इन्सान आसानी से खा सकता है। राजमा को सूप व सलाद में लंच में खाना चाहि, ज्यादा फायदा मिलेगा। जो अपने वजन को मेन्टेन रखना चाहते है उन्हें राजमा जरुर खाना चाहि, क्यूंकि इसमें सभी तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं। डायबटीज को कंट्रोल करे:- राजमा में मौजूद फाइबर शरीर में मेटाबॉलिज्म मेन्टेन करता है। ये कार्बोहा

मेरा नाम कंचनलता है

मैं और सुब्रोतो मुखर्जी लंदन के किंग एडवर्ड मेडिकल कालेज के क्लासमेट थे मैं आदित्य नारायण झा पटना का निवासी था, मेरे पिता आनंद नारायण झा पटना हाईकोर्ट के मशहूर बैरिस्टर थे, सुब्रोतो बंगाल के नदिया जिले का निवासी था पर उसका परिवार कई दशकों से कलकत्ता में अपनी खानदानी कोठी मे रहता था सुब्रोतो के पिता नारायण मुखर्जी नदिया जिले के बहुत बड़े जमींदार थे पर पिछले बीस सालों से अजीबो-गरीब बीमारी से परेशान थे, हमारे थर्ड ईयर के पेपर हो चुके थे कालेज बंद होने वाला था हम लोग अपने घर लौटने की सोच ही रहे थे तभी सुब्रोतो के घर से तार आया कि पिता जी तबीयत बहुत खराब है। तुरंत घर आ जाओ तार पाकर सुब्रोतो घबरा गया मैंने उसे ढाढस बंधाया चिन्ता ना करो सब ठीक हो जायेगा उसने मुझसे रिक्वेस्ट की कि मैं भी उसके साथ कलकत्ता चलूँ जिससे उसकी हिम्मत बंधी रहे, मैं उसे मना नही कर सका मैंने अपने घर सूचना दी कि मैं महीने भर के लिये दोस्त के घर कलकत्ता जा रहा हूँ लौटकर घर आऊंगा अगले हफ्ते हम कलकत्ता पहुंचे जहाँ के चायना टाउन ईलाके मे उसकी विशाल दुमंजिली शानदार कोठी थी घर का माहौल बड़ा उदास था सबने हमारी खूब खातिरदारी की शा

हृदय सुरक्षित तो जीवन सुरक्षित

देवती वी.के. मेमोरियल मेडिकल एवं कार्डियक सेन्टर रायबरेली के हृदय रोग विशेषज्ञ एवं फिजिशियन डा. मनीष मिश्र ने बताया कि विश्व के लोगों को हृदय रोग के प्रति जागरूक करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2000 में हर साल विश्व हृदय दिवस को मनाने का निर्णय लिया। पहले इसे सितम्बर के अंतिम रविवार को विश्व हृदय  दिवस के रूप में मनाया जाता था। लेकिन 2014 से इसे 29 सितम्बर के दिन ही मनाये जाने का निर्णय लिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय रोग हर साल 17.7 मिलियन लोगों की जान लेता है। जो विश्व में 31 प्रतिशत मृत्यु का कारण है। तथा वर्ष 2030 तक इन आंकड़ो में 23 मिलियन की वृद्धि होने की संभावना है।  हृदय रोगियों की संख्या भारत में लगातार बढ़ रही है जोकि चिंता का विषय है। इसलिए अब 30 साल के ऊपर के सभी लोगों केा हाईपर टेंशन और डायबिटीज के स्क्रीनिंग की सलाह दी जा रही है। इसका प्रमुख कारण बदलती लाइफ स्टाइल, जंक फूड और ध्रूमपान है। युवा पीढ़ी का झुकाव इस ओर ज्यादा होने के चलते यह बीमारी कम उम्र में घेर ले रही है। क्या आप जानते है:- आपका दिल एक मिनट में 72 बार और 24 घण्टे में 100800 बार धड़कता ह

खेलकूद से बच्चों का स्वास्थ्य ठीक रहता

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड शाखा में चार दिवसीय द्वितीय नेशनल सी.आई.एस.सी.ई. क्रिकेट टूर्नामेन्ट का आयोजन सी.एम.एस. कानपुर रोड में किया गया है। काउन्सिल फाॅर द इण्डियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सी.आई.एस.सी.ई.) के तत्वावधान में 27 से 30 सितम्बर 2019 तक सी.एम.एस. कानपुर रोड शाखा में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश भर के सी.आई.एस.सी.ई. स्कूलों के छात्र भाग ले रहे। इस क्रिकेट टूर्नामेन्ट का भव्य उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के खेल मंत्री श्री उपेन्द्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर सी.एम.एस. के संस्थापक तथा प्रख्यात् शिक्षाविद् डा. जगदीश गांधी व डा. (श्रीमती) भारती गांधी, डा. जी. इमेनुएल, चेयरमैन, सी.आई.एस.सी.ई., श्री रिचर्ड एलिस, एजुकेशन आॅफिसर एवं आॅब्जर्वर आॅफ द अण्डर-19 सी.आई.एस.सी.ई. क्रिकेट टूर्नामेन्ट, नई दिल्ली, श्री कार्तिकेयन रवि, स्पाॅटर आॅफ द्वितीय नेशनल अण्डर-19 सी.आई.एस.सी.ई., क्रिकेट टूर्नामेन्ट, नई दिल्ली तथा सी.एम.एस. कानपुर रोड शाखा की वरिष्ठ प्रधानाचार्या डा. विनीता कामरान आदि उपस्थित थे। सी.एम.एस. कानपुर रोड शाखा के छात्रों ने उपस्थित अथितियों एवं टी

रामदाना शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है

अक्‍सर उपवास के दौरान लोग राजगिरा, चैलाई, रामदाने के आटे से तैयार पूड़ी-पराठा या अन्‍य चीजें बना कर सेवन करते हैं। राजगिरा अनाज नहीं है इसलिये लोग इसे उपवास के दिनों में खाते हैं। यह स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक गुणों से भरा हुआ है और शरीर को ताकत देता है। इसमे गेंहू के मुकाबले 5 गुना आयरन और 3 गुना फाइवर होता है। यह भूख को मिटाता है। इसके बने लड्डू भी चाव से खाते हैं। सिर्फ स्वाद ही नहीं सेहत से जुड़े बेशकीमती फायदे भी देता है राजगिरा (रामदाना)। आप भी जानिए इसके मिलने वाले सेहत लाभ:- 1 राजगिरा प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन ई और विटामिन सी से भरपूर है। इसमें गेहूं की अपेक्षा तीन गुना अधिक फाइबर और 5 गुना अधिक आयरन होता है। इतना ही नहीं, इसमें दूध या अन्य अनाज के मुकाबले दोगुना कैल्‍शियम होता है।  2 राजगिरा हड्ड‍ियों को मजबूत करता है और ऑस्ट‍ियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से आपको बचाता है। इसमें मौजूद भरपूर कैल्शियम हड्ड‍ियों के लिए बेहद फायदेमंद है। 3 राजगिरे को अनाज नहीं माना जाता, इसलिए इसका प्रयोग उपवास में करते हैं। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता

राहू जन्य कष्ट और उसके उपाय

राहू और केतु अन्य ग्रहों की भांति ही है, राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, दक्षिण भारत में तो लोग राहूकाल में कोई कार्य भी नहीं करते हैं। एक पौराणिक आख्यान के अनुसार दैत्यराज हिरण्य कशिपु की पुत्री सिंहिका का पुत्र स्वरभानु था, उसके पिता का नाम विप्रचित था। देवासुर संग्राम में राहू भी भाग लिया समुद्र मंथन के फलस्वरूप प्राप्त चैदह रत्नों में अमृत भी था, जब विष्णु सुन्दरी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान करा रहे थे, तब राहू उनका वास्तविक परिचय और वास्तविक हेतु जान गया। वह तत्काल माया से रूप धारण कर एक पात्र ले आया और अन्य देवतागणों के बीच जा बैठा, सुन्दरी का रूप धरे विष्णु ने उसे अमृत पान करवा दिया, तभी सूर्य और चन्द्र ने उसकी वास्तविकता प्रकट कर दी, विष्णु ने अपने चक्र से राहु का सिर काट दिया, अमृत पान करने के कारण राहु का सिर अमर हो गया,उसका शरीर कांपता हुआ गौतमी नदी के तट पर गिरा, अमृतपान करने के कारण राहु का धड भी अमरत्व पा चुका था। देवता ने शंकरजी से उसके विनाश की प्रार्थना की, शिवजी ने राहू के संहार के लिये अपनी श्रेष्ठ चंडिका को मातृकाओं के साथ भेजा, सिर देवताओं ने अपने पास

शारदीय नवरात्र की महिमा

संसार में प्रेम संबंध का सबसे अद्वितीय उदाहरण माता है। माँ अपने बच्चों को जितना प्रेम करती है उतना और कोई भी सम्बन्धी नही कर सकता। श्री रामकृष्ण परमहंस, योगी अरविन्द घोष, छत्रपति शिवाजी आदि कितने महापुरूष व शक्ति उपासक थे। शक्ति धर्म भारत का प्रधान धर्म है। नवरात्र के इन शुभ क्षणों मंे शक्ति का प्रंचड प्रवाह उमड़ता है। नवरात्र के नौ रात्रियों और नौ दिनों में साधना के सामान्य एवं गहन प्रयोग सम्पन्न किये जाते है।दसंक्रमण काल जो कि दो कालों के बीच की अवधि होती है, साधना के लिए अत्यधिक अनूकुल एवं उपयोगी होती है।  श्रद्धापूर्वक किये गये थोड़े से ही प्रयासों में कई गुना परिणाम प्राप्त होना समय एवं काल की महत्त्ता को दर्शाता है। संक्रमण काल के शारदीय नवरात्र की महिमा इन दिनों अद्भूत एवं आश्चर्यजनक है। इन सब कारणों से ये नवरात्र विशेष ही नही अति विशेष है।  जिस प्रकार विपरीत समय में अत्यधिक परिश्रम एवं लगन से की गई साधना विषेश फलदायी नही होती और वही अगर अनूकूल समय हो और थोड़ा सा परिश्रम करके भी विशेष फल प्राप्त किया जा सकता है। यों तो यह दिव्य अवधि वर्ष में चार बार आती है, जिसे चार नवरात्र कहते है

जागा हुआ कौन है

जैसे ही अन्तःकरण में ब्रह्म जिज्ञासा की तीव्रता जागृत होती है संपूर्ण सृष्टि में माधुर्य-सौंदर्य, एकत्व, परिपूर्णता आदि दिव्य-अनुभव स्थिर होने लगते हैं! ईश्वर का विचार शान्ति, आनन्द एवं सरसता प्रदाता है! संसार के सारे कार्य करते हुए स्वयं को जानना अत्यंत आवश्यक है। अथातो ब्रह्म जिज्ञासा ... बादरायण का ब्रह्मसूत्र इस अत्यंत सुंदर और अर्थगर्भी वाक्य से प्रारंभ होता है। आओ, अब हम परम सत्य की जिज्ञासा करें। यह एक आवाहन है, प्रस्थान है, दिशा है और गति भी। धर्म का अर्थ है, आस्था! और, दर्शन का अर्थ है! जिज्ञासा। विवेकवान को ही शास्त्र 'जागा हुआ' कहते हैं। जागर्ति को वा? अर्थात्, जागा हुआ कौन है? इसका उत्तर देते हुए आद्यशंकर कहते हैं, 'सदसद् विवेकी, यानी, जो सत्य-असत्य का विवेक कर सकता है, वही जागा हुआ है। नहीं तो, 'मोह निशा सब सोवन हारा! अनन्त संभावनाओं से समाहित मनुष्य जीवन की नियति है, ब्रह्म। अथातो ब्रह्म जिज्ञासा, स्वयं में परम सत्ता को अनुभूत करने की दिव्य सामर्थ्य जागरण में सहायक है, सत्संग। अतः सत्संग ही सर्वथा श्रेयस्कर-हितकर है ! शास्त्रों में सत्संग की महिमा का बारंब

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है अदरक का पानी

अदरक सेहत के लिए एक लाभकारी बहुत है, अदरक में एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-बैक्टीरियल आदि गुण होते हैं इसलिए सूजन को कम करने और सर्दी-जुकाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अदरक का पानी पीना फायदेमंद होता है। अदरक को अन्य रुप में सेवन नहीं कर पाते हैं तो सुबह-सुबह खाली पेट अदरक का पानी पी सकते हैं जिससे आप पूरा दिन ऊर्जा से भरपूर रहते हैं। आइए जानते हैं कि अदरक का पानी सेहत के लिए कैसे लाभकारी होता है। पाचन के लिए उपयोगी:- अदरक को रातभर पानी में डालकर रखें और सुबह उस पानी को पी लेने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और जी मिचलाने और अपच की समस्या नहीं होती है। इसके अलावा आपको मॉर्निंग सिकनेस की समस्या भी नहीं होती है। वजन कम करता है:- अदरक का पानी वजन कम करने के लिए भी लाभकारी होता है। अदरक का पानी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है जिससे डायबिटीज की बीमारी नहीं होती है साथ ही इसे पीने से भूख कम लगती है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। बालों और त्वचा के लिए लाभकारी:- अदरक के पानी में पर्याप्त मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं इसलिए इसका सेवन करने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए और सी

जज्बात, जुनून, जन्नत प्रेरणादायी पुस्तक है

साहित्यकार पं. हरि ओम शर्मा 'हरि' द्वारा लिखित 17वीं पुस्तक एवं उर्दू भाषा में प्रकाशित पुस्तक 'जज्बात, जुनून, जन्नत' का भव्य विमोचन मोती महल वाटिका में चल रहे नेशनल बुक फेयर के साँस्कृतिक पाण्डाल में बड़ी भव्यता से सम्पन्न हुआ। उल्लासपूर्ण माहौल व तालियों की जोरदार गड़गड़ाहट के बीच मंचासीन विशिष्ट हस्तियों ने पुस्तक 'जज्बात, जुनून, जन्नत' का विमोचन किया। समारोह का शुभारम्भ पं. हरि ओम शर्मा 'हरि' के पूज्य माता-पिता एवं पुस्तक के मार्गदर्शक श्री मिहीलाल शर्मा व श्रीमती रेशम देवी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर लखनऊ के ख्याति प्राप्त लेखकों, साहित्यकारों, शिक्षाविद्ों, समाज सेवियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों व पत्रकारों ने बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर समारोह की गरिमा को बढ़ाया, साथ ही पुस्तक के विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए सामाजिक व्यवस्था में युवा पीढ़ी के योगदान की पुरजोर अपील की।  इस भव्य समारोह में इंकलाब उर्दू के स्थानीय संपादक श्री जिलानी खान अलीग ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की गरिमा को बढ़ाया तो वहीं दूसरी ओर

तांत्रिक उपाय

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान मे 129 वीं मासिक सेमिनार का आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका कार्यालय में किया गया, सेमिनार का विषय ज्योतिष में मंत्रोपचार का महत्व  था। जिसमे डा. डी एस परिहार के अलावा श्री अनिल कुमार बाजपेई एडवोकेट, श्री उदयराज कनौजिया, डा. प्रदीप निगम, प.ं के. के. तिवारी, आचार्य राजेश श्रीवास्तव प.ं शिव शंकर त्रिवेदी, प.ं जे पी शर्मा, प. आनंद एस. त्रिवेदी प. जर्नादन प्रसाद त्रिपाठी, प्रो. के.के. त्रिपाठी, तथा पं. शिव सहाय मिश्रा आदि ज्योतिषियों एवं श्रोताओं ने भाग लिया गोष्ठी मे डी.एस. परिहार, श्री उदयराज कनौजिया पं. जे.पी. शर्मा, पं. जर्नादन प्रसाद त्रिपाठी तथा पं. आनंद त्रिवेदी ने अपने अनुभव और व्यक्तव्य प्रस्तुत किये। श्री उदयराज कनौजिया ने कहा कि ज्योतिष में मनुष्य की समस्याओं को अधिदैविक, अधिदैहिक और अध्यात्मिक श्रेणी मे बांटा गया है तथा उनके मंत्रोपचार भी भिन्न-भिन्न है। उन्होंने मंत्रों को वैदिक, तांत्रिक और साबरी भागों मे विभाजित बताया कलयुग मे किसी मंत्र का चार गुना जप करने से ही लाभ होता है। वैदिक मंत्रों के प्रांरम्भ ऊँ

मोदीजी ने हमेशा जीवन में कुछ करने का सपना देखा

श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 में गुजरात के वदनगर, मेहसाणा जिले में हुआ था। आपके पिता का नाम श्री दामोदर दास मूलचंद एवं माता का नाम श्रीमती हीरा बेन हैं। श्री नरेन्द्र मोदी के पिता बहुत साधारण व्यक्ति थे, जिनके 6 संतानों के रूप में पांच भाई तथा एक बहन हैं। बालक नरेन्द्र अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय का स्टाल लगाते थे। न्यू इण्डिया के निर्माण के लिए संकल्पित मोदीजी का जन्मदिन सम्पूर्ण भारत में सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयोग से इसी दिन 17 सितम्बर को शिल्पकला कौशल में सर्वोच्च एवं सृष्टि के रचयिता भगवान विश्वकर्मा की जयन्ती बड़े ही श्रद्धा भाव से देश भर में मनायी जाती है। विश्वकर्मा जयन्ती तथा मोदीजी की जयन्ती के अवसर पर भी सभी देशवासियों को दोहरी हार्दिक बधाइयाँ।   हमारा मोदीजी से इस लेख के माध्यम से निवेदन है कि संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव पास करवाने की कृपा करें। विश्व में हिन्दी भाषा लगभग 120 करोड़ लोग बोलते तथा जानते हैं। भारत में इनकी संख्या पर लगभग 100 करोड़ है तथा अन्य देशों में हिन्दी बोलने तथा जानने

अंग्रेजी मानसिकता में आज भी मजबूरी में जी रहे हैं

देश की आजादी के पश्चात 14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने तथा उनकी सरकार ने इस ऐतिहासिक दिन के महत्व को देखते हुए हिन्दी को देश-विदेश में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए 1953 से सम्पूर्ण भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। भारत का परिपक्व लोकतंत्र, प्राचीन सभ्यता, समृद्ध संस्कृति तथा अनूठा संविधान विश्व भर में एक उच्च स्थान रखता है। भारत की गरिमा, गौरव तथा हिन्दी भाषा को हर कीमत पर विकसित करना चाहिए।   स्वदेशी के प्रबल समर्थक भाई राजीव दीक्षित के अनुसार हिन्दी के विकास में सबसे ज्यादा योगदान महर्षि दयानंद सरस्वती तथा महात्मा गांधी ने दिया था। महर्षि दयानंद का जन्म गुजरात में हुआ था। उनकी मातृ भाषा गुजराती थी। उन्होंने अपना सारा जीवन अपनी संस्था आर्य समाज के माध्यम से दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में लगाया था। महर्षि दयानंद सरस्वती के नेतृत्व में देश भक्तों का यह पहला सबसे बड़ा अहिंसक संगठित

सत्य का वास्तविक स्वरूप है सत्संग

जैसे ही अन्तःकरण में ब्रह्म जिज्ञासा की तीव्रता जागृत होती है संपूर्ण सृष्टि में माधुर्य-सौंदर्य, एकत्व, परिपूर्णता आदि दिव्य-अनुभव स्थिर होने लगते हैं! ईश्वर का विचार शान्ति, आनन्द एवं सरसता प्रदाता है! संसार के सारे कार्य करते हुए स्वयं को जानना अत्यंत आवश्यक है। ष्अथातो ब्रह्म जिज्ञासा ...ष् बादरायण का ष्ब्रह्मसूत्रष् इस अत्यंत सुंदर और अर्थगर्भी वाक्य से प्रारंभ होता है। आओ, अब हम परम सत्य की जिज्ञासा करें। यह एक आवाहन है, प्रस्थान है, दिशा है और गति भी। धर्म का अर्थ है, आस्था। और, दर्शन का अर्थ है, जिज्ञासा। विवेकवान को ही शास्त्र 'जागा हुआ' कहते हैं। जागर्ति को वा ...? अर्थात् जागा हुआ कौन है? इसका उत्तर देते हुए आद्यशंकर कहते हैं, 'सदसद् विवेकी! यानी, जो सत्य-असत्य का विवेक कर सकता है, वही जागा हुआ है। नहीं तो, 'मोह निशा सब सोवन हारा ...'। अनन्त संभावनाओं से समाहित मनुष्य जीवन की नियति है, ब्रह्म। अथातो ब्रह्म जिज्ञासा! स्वयं में परम सत्ता को अनुभूत करने की दिव्य सामर्थ्य जागरण में सहायक है, सत्संग। अतः सत्संग ही सर्वथा श्रेयस्कर-हितकर है ! शास्त्रों में सत्स

गुलशन नंदा धड़कनों व जजबातों को बड़ी कुशलता से अपनी कलम मे कैद करते थे

छठे और सातवें दशक में भारतीय फिल्म और लोकप्रिय हिन्दी साहित्य जगत मे एक ऐसा सितारा प्रकृट हुआ जिसने तेजी से बदलते भारत के जवां दिलों की धड़कनों व जजबातों को बड़ी कुशलता से अपनी कलम मे कैद कर बड़ी खूबसूरती से समाज के सामने पेश किया कि लोग उनके लेखन के दीवाने हो गये उनके पहले कोई अन्य उपन्यासकार ऐसा नही कर सका। कुछ ही समय में बड़ी भारी तादाद मे ना केवल भारत के युवा पाठक उनसे जुड़ गये बल्कि तत्कालीन विख्यात फिल्मकारों ने भी उन्हें हाथों हाथ लिया उन्होंने उस दौर के युवाओं के रोमांस, उत्साह, निराषा, संघर्ष, समस्याओं जिस सच्चे रूप मे उन्होंने पेश किया, वह बेमिसाल था। गुलशन नंदा वो नाम था जिसके उपन्यासों का लोग बुक स्टालों पर महीनों पहले से इंतजार करते थे। उन्होंने लोकप्रियता में अपने दौर के अन्य सभी उपन्यासकारों को पीछे छोड़ दिया था पर उनके दिल के छू लेने वाले उपन्यासों पर दर्जनों हिट फिल्मे बनाई गयीं जिनकी फेहरिश्त बड़ी लम्बी है। फूलों की सेज 1964, काजल (माधवी) 1965 ,नीलकमल (नीलकमल) 1968, झील के उस पार (झील के उस पार), भंवर, दाग, महबूबा 1976 (सिसकते साज), पाले खान, शर्मीली, कटी पतंग (कटी पतंग) 197

ऊंचा कद

चार महीने बीत चुके थे, बल्कि 10 दिन ऊपर हो गए थे, किंतु बड़े भइया की ओर से अभी तक कोई खबर नहीं आई थी कि वह पापा को लेने कब आएंगे. यह कोई पहली बार नहीं था कि बड़े भइया ने ऐसा किया हो. हर बार उनका ऐसा ही रवैया रहता है. जब भी पापा को रखने की उनकी बारी आती है, वह समस्याओं से गुजरने लगते हैं. कभी भाभी की तबीयत खराब हो जाती है, कभी ऑफिस का काम बढ़ जाता है और उनकी छुट्टी कैंसिल हो जाती है. विवश होकर मुझे ही पापा को छोड़ने मुंबई जाना पड़ता है. हमेशा की तरह इस बार भी पापा की जाने की इच्छा नहीं थी, किंतु मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया और उनका व अपना मुंबई का रिजर्वेशन करवा लिया। दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस अपने टाइम पर थी. सेकंड एसी की निचली बर्थ पर पापा को बैठाकर सामने की बर्थ पर मैं भी बैठ गया, साथवाली सीट पर एक सज्जन पहले से विराजमान थे. बाकी बर्थ खाली थीं. कुछ ही देर में ट्रेन चल पड़ी. अपनी जेब से मोबाइल निकाल मैं देख रहा था, तभी कानों से पापा का स्वर टकराया, “मुन्ना, कुछ दिन तो तू भी रहेगा न मुंबई में. मेरा दिल लगा रहेगा और प्रतीक को भी अच्छा लगेगा। पापा के स्वर की आर्द्रता पर तो मेरा ध्यान गया न

वेदान्त दर्शन के अस्तित्व

वेदान्त दर्शन में अस्तित्व को ब्रह्म कहते हैं। पर वेदान्ती ब्रह्म के स्वरूप पर एकमत नही हैं। वेदान्त दर्शन के आधार ग्रन्थ प्रस्थान त्रयी है। उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और गीता को मिलाकर प्रस्थानत्रयी कहाजाता है। पर इन्ही ग्रन्थो को आधार बनाकर आचार्यों ने अनेक मत मतान्तर खड़ेकर दिये हैं। इन्ही ग्रन्थो पर आचार्य शंकर का अद्वैतवाद, रामानुज का विशिष्टाद्वैतवाद, निम्बार्क का द्वैताद्वैतवाद ,माध्व का द्वैतवाद और वल्ल्भ का शुद्धाद्वैत वाद खड़ा है। लेक्न इन वादों में आचार्य शंकर का अ्द्वैतवाद अधिक विज्ञान संगत है। तो मैं अस्तित्व या ब्रह्म की व्याख्या अद्वैत मतानुसार ही करूँगा। तैत्तरीय उपनिषद में ब्रह्म को सत्यं ज्ञानमनन्तम् कहा गया है। अर्थात, ब्रह्म सत्य, ज्ञान और अनन्त है। सत्य, यहाँ सत्य का अर्थ वाचिक सत्य से न होकर आत्यन्तिक सत्य से है। सत्य को व्याख्यायित करते हुये गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतरू,ष् अर्थात असद् का किसी भी काल में भाव या अस्तित्व नही होता है और सद् का किसी भी काल में अभाव नही होता है। सत् वह है जिसका आदि, मध्य और अंत न हो, जो अनन्त हो, ज