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अक्तूबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का शुभारम्भ

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोक भवन सभागार में प्रदेश के राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का सीधा सजीव प्रसारण दूरदर्शन टीवी, एलईडी वैन के माध्यम से फिरोजगांधी डिग्री कालेज के आडिटोरियम व प्रांगढ़ में जनपद की जिलाधिकारी नेहा शर्मा, एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार, उन्नाव के सीडीओ डाॅ0 राजेश कुमार प्रजापति व उनकी पत्नी श्रेया व एडीएम ई राम अभिलाष, नगर मजिस्ट्रेट युगराज सिंह, सहायक निदेशक सूचना प्रमोद कुमार, बीएसए पीएन सिंह, डीआईओएस, डीपीओ सीवीओ सहित सैकड़ों जनपद के विभिन्न विद्यालयों की छात्राएं व मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लाभार्थियों के साथ ही जनपद के बुद्धिजीवियों, छात्राएं द्वारा सजीव प्रसारण को देखा गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री डा0 दिनेश शर्मा, महिला एवं भारत सरकार की बाल विकास कपड़ा मंत्रालय की मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, महिला कल्याण एवं पुष्टाहार राज्य मंत्री स्वाती सिंह आदि गणमान्यजनों का सीधा प्रसारण सुना।

दीपावली खुशियों का त्योहार है

दीपावली एक ऐसा त्योहार है, जिसका इंतजार सभी को वर्ष भर रहता है। प्रकाश का यह त्योहार जहां सभी के जीवन में धन-धान्य लाता है वहीं दीपावली के आगमन से कुछ दिनों पूर्व ही बाजार सज-धज जाते हैं और लोग खरीदारी के लिए निकल पड़ते हैं। बच्चों के लिए तो यह त्योहार विशेष रूप से कौतूहल का विषय होता है। नये-नये कपड़े, पटाखे और तरह-तरह की मिठाईयाँ उन्हें खुश कर देती हैं। सब जगह रगं-बिरंगे रोशनी देते बल्बों की लड़ियाँ और एक दूसरो को बधाई देते लोगों का दिखाई पड़ना सचमुच सुखद होता है। दीपावली पर्व, सभी समुदाय के लोग मिल जुलकर मनाते हैं। यही नहीं अब तो दीपावली की धूम विदेशों तक जा पहुंची है, तभी तो ब्रिटेन की संसद और अमेरिका के व्हाईट हाउस में भी लक्ष्मी-गणेश का पूजन करके और दीप जलाकर दीपावली मनाई जाने लगी है। दीपावली एक ऐसा भी त्योहार है, जिसमें घर के बच्चांे से लेकर बड़े-बूढ़े तक बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।     दीपावली धार्मिक ढोंग और रूढ़ियों से दूर अपने आसपास फैले उजाले के प्रति आभार प्रकट करने का त्योहार है। इस त्योहार में अंधेरे से लड़ता प्रत्येक दीया समाज में यही उमंग भरता नज़र आता है कि हम जीवन के झंझावातों म

हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है

दीपावली के साथ ही हनुमान जयंती होती है (छोटी दिवाली के दिन) और भगवान श्रीराम जी के साथ अगर उनके गुणों की व्याख्या न की जाये तो सब कुछ अधूरा है। जनमानस में ऐसी मान्यता है, जब भगवान श्री राम लक्ष्मण जी और माता सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के कक्ष में श्रृंगार करते देखा कि माता सीता लाल रंग की कोई चीज मांग में सजा रही हैं।  हनुमान जी उत्सुक होकर पूछ बैठे यह क्या है जो आप मांग में सजा रही हैं। माता सीता ने कहा यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे मांग में सजाने से मुझे राम जी का स्नेह प्राप्त होता है और उनकी आयु लंबी होती है।  हनुमान जी ने सोचा कि कि चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु श्री राम की आयु बढ़ जाती है और माता को राम जी का स्नेह मिलता है तो क्यों न मैं पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं। इससे तो प्रभु राम अमर हो जाएंगे और मुझे भी उनका अपार स्नेह मिलेगा। बस क्या था, हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और पहुंच गए राम जी की सभा में। राम जी ने जब हनुमान को इस रूप में देखा तो हैरान रह गए। श्री राम जी ने हनुमान से पूरे शरीर में सिंदूर लेपन करने का कारण पूछा तो हनुमा

पावन पर्व दीपावली

  दीपावली उत्साह का पर्व है, अधिकतर गं्रथों मंे इस पर्व को दीपावली और कहीं-कहीं दीपमालिका कहते हैं। यह पर्व चतुर्दषी, अमावस्या एवं कार्तिक प्रतिपदा इन तीनों दिनों तक मनाया जाने वाला कौमुदी-उत्सव के नाम से प्रसिद्ध है। मूलतः दीपोत्सव 'श्री' अथवा लक्ष्मी का आव्हान-पर्व है। लक्ष्मी की चर्चा श्री' धन-देवी हैं तथा भगवान विष्णु की पत्नी हैं। जब हरि ने वामन रूप धारण किया तो लक्ष्मी पद्म कमल के रूप में अवतरित हुई। जब विष्णु परशुराम के रूप में आए तो लक्ष्मी 'धरनी' कहलायीं। राम के साथ सीता तथा कृष्ण के साथ रूक्मिणी बनकर वे सदैव विष्णु की पत्नी बनती आयी है। पुरातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए हम दीपावली का पर्व हर्श एवं उल्लास के साथ मनाते हैं। वस्तुतः दीपावली का उत्सव 5 दिनों तक, पाँच कृत्यों के साथ मनाया जाता है। यथा-धनतेरस अर्थात् धन-पूजा, नरक चतुर्दशी अर्थात् नरकासुर पर विष्णु विजय का उत्सव, लक्ष्मी पूजा 'श्री' का आव्हान पर्व, द्यूत दिवस अर्थात् भाईदूज के नाम से बहन-भाई के प्रेम का आदान-प्रदान का उत्सव। इसे यम द्वितीया भी कहते है। इन पाँचांे दिनों में दीपदान, गा

दान का महत्व

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान मे 130 वीं मासिक सेमिनार का आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका कार्यालय मे किया गया सेमिनार का विषय ज्योतिष में दान का महत्व था जिसमे डा. डी.एस. परिहार के अलावा आचार्य राजेश, लेक्चरर के.के. त्रिपाठी, पं. शिव शंकर त्रिवेदी, प. जे.पी. शर्मा, इंजीनियर एस.पी. शर्मा तथा प. आनंद त्रिवेदी आदि ज्योतिषियोें एवं श्रोताओं ने भाग लिया गोष्ठी मे डी.एस. परिहार, पं. जे.पी. शर्मा, लेक्चरर के के त्रिपाठी, इंजीनियर एस.पी. शर्मा तथा पं. आनंद त्रिवेदी ने अपने अनुभव और व्यक्तव्य प्रस्तुत किये। प. आनंद त्रिवेदी ने नौ ग्रहों की विभिन्न वस्तुओं की लंबी सूत्री प्रस्तुत की तथा यह भी बताया नौ ग्रहों के दानों को अलग-अलग ग्रहों के लिये वर्णित सुपात्रों को ही दान करना चाहिये श्री डा. एस पी शर्मा ने बताया ज्योतिष के त्रिकोण कें भाव 1, 5, 9, दान करने के भाव है। तथा गुरू और केतु दान के कारक ग्रह है। तथा शनि अति स्वार्थी कंजूस और दान सें परहेज करनें वाला ग्रह है गुरू उदारता दया व दान का प्रमुख ग्रह है। दान कई प्रकार के होते है। जैसे विद्या दान, समाज से

विश्व शान्ति की सबसे बड़ी संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री फ्रैन्कलिन रूजवेल्ट ने 1945 में विश्व के नेताओं की एक बैठक बुलाई जिसकी वजह से 24 अक्टूबर, 1945 को विश्व की शान्ति की सबसे बड़ी संस्था 'संयुक्त राष्ट्र संघ' (यू.एन.ओ.) की स्थापना हुई। प्रारम्भ में केवल 51 देशों ने ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किये थे। वर्तमान में 193 देश इसके पूर्ण सदस्य हैं व 2 देश इसके अवलोकन देश (आॅबजर्बर) हैं। फ्रैंकलिन रूजवेल्ट की इस पहल के कारण पिछले 74 वर्षों से संसार में कोई और विश्व युद्ध अर्थात तीसरा विश्व युद्ध नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य मानव जाति के कल्याण के लिए एक वैश्विक राजनैतिक तथा आर्थिक स्थिरता कायम करना, अन्तर्राष्ट्रीय शांति स्थापित करना, मानवाधिकारों की रक्षा, देशों के मध्य युद्धों को रोकना, एकता व शांति को बढ़ावा देना, पड़ोसी देशों के बीच अच्छे संबंध स्थापित करना है। वर्तमान में विभिन्न देशों में गरीबी, भुखमरी, बीमारी, शरणार्थी समस्या, मानव व ड्रग तस्करी को रोकना एवं अशिक्षा को दूर करने का दायित्व संयुक्त राष्ट्र संघ अपने सदस्य देशों के सहयोग से यथा शक्ति निभा रहा ह

दीपावली की पूजा

माता लक्ष्मी प्रकृति की एक महान शक्ति है। दीपावली का पर्व प्रकृति के मानवों को प्रदान करने की प्रक्रिया का प्रतीक है। जगत का स्वामी सूर्य भगवान विष्णु है, और पृथ्वी माता लक्ष्मी है। तुला राशि में जब सूर्य नीच के होते है और चन्द्र भी तुला में होता है। ऐसी महा अमावस्या की रात भगवान सूर्य अपनी पोषणकारी उर्जा को पृथ्वी पर भेजते है। और माता लक्ष्मी अर्थात् पृथ्वी उन वरदानों को प्राप्त कर पृथ्वी के समस्त प्राणियों को वितरित करती है। संसार के सभी धन, धान्य, पशु, पक्षी, रत्न, द्रव्य पदार्थ पृथ्वी के अंग हैं। मानव को सभी संासारिक भोग पृथ्वी से ही प्राप्त होते है। दीपावली का पर्व माता लक्ष्मी (पृथ्वी) को प्रसन्न करके तमाम सांसारिक सम्पदाओं को प्राप्त करने का अमोद्य अवसर और मूर्हत है। जो कि प्रत्येक वर्ष सभी को एक अवसर देता है।    दीपावली का पर्व माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम समय है। पौराणिक कथानुसार इस दिन माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के समय क्षीर सागर से प्रकट हुयी थी। सभी देवताओं और मनुष्यों ने उनकी उपासना की प्राचीन भारतीय साहित्य में कुछ ऐसे पदार्थो का वर्णन है, जिनकी दीपावली की रात

जिन्दगी कैसी है पहेली

1 मई, 1919 को कोलकोता में जन्मे भारतीय सिनेमा के महान पाश्र्व गायक मन्ना डे अततः 24 अक्टूबर, 2013 को 94 वर्ष की आयु में बंगलूर में इस दुनियाँ को अलविदा कहा। वे ऐसे गायक रहे उनकी आवाज हर किसी को सूट करती थी। उन्होंने हिन्दी फिल्मों में गाने की शुरूवात सन् 1942 में फिल्म तमन्ना की थी। पाँच दशक मुम्बई में रहने के बाद वेेबंगलूर में रहने लगे थे। मन्ना डे की अन्तिम फिल्म 2006 में उमर थी। अपने प्रराम्भिक में दौर मन्ना डे ने बतौर सहायक के.सी. डे के साथ काम किया। बाद में संगीतकार सचिन देव बर्मन की शार्गिदी में शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ सीखीं और फिर कुछ अन्य संगीतकारों के साथ रहकर उनसे गुर सीखें। मन्ना डे लगभग 50 गाने मोहम्मद रफी के साथ भी गीत गाये। पिछले कुछ वर्षो से मन्ना डे फिल्मों में नहीं गाये। मंचों पर भी जल्दी उपलब्ध नहीं हो पाते थे। सन् 1947-48 से 1970 तक का समय भारतीय फिल्म संगीत की दृष्टि से स्वर्णिम युग रहा है। इसी स्वर्णिम युग में मन्ना डे ने अपनी मेहनत और अथक परिश्रम से अपना स्थान बनाया और निरन्तर अनेकों यादगार गाने गाये। उपकार फिल्म का कसमे वादे प्यार वफा सब बातों का क्या गाना आ

महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती

(1) यूएन ने महात्मा गांधी के जन्म दिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया:-   अहिंसा के व्यापक प्रयोग के जरिये विश्व भर में शांति के संदेश को बढ़ावा देने के महात्मा गांधी के योगदान को स्वीकारने के लिए ही शान्ति की सबसे बड़ी संस्था 'संयुक्त राष्ट्र संघ' ने महात्मा गांधी के जन्मदिवस 2 अक्टूबर को विश्व भर में प्रतिवर्ष 'अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय वर्ष 2007 में लिया था। मौजूदा विश्व-व्यवस्था में अहिंसा की सार्थकता को स्वीकार करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में तत्कालीन भारत सरकार द्वारा रखे गये इस प्रस्ताव को बिना वोटिंग के ही सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस प्रस्ताव को भारी संख्या में सदस्य देशों का समर्थन मिलना विश्व में आज भी गांधीजी के प्रति सम्मान, उनके विश्वव्यापी विचारों और सिद्धांतों की नीति की प्रासंगिकता को दर्शाता है। (2) गांधी जयन्ती की पूर्व संध्या पर विशाल 'प्रभात फेरी' तथा भव्य समारोह आयोजित:-     सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के लगभग 3000 शिक्षक-शिक्षिकाएं व कार्यकर्ता ने खादी के स्वेत वस्त्र पहनाकर राष्ट्रपिता मह

यूपी ब्राण्ड लीडरशिप अवार्ड

रायबरेली के उद्यमी वाई.के. गुप्ता को प्रतिष्ठित यूपी ब्राण्ड लीडरशिप अवार्ड प्रदान किया गया। यह पुरस्कार श्री गुप्ता की तरफ से प्रखर गुप्ता ने लखनऊ के होटल ताज में आयोजित कार्यक्रम में प्राप्त किया। यह पुरस्कार प्रदेश के उद्योगांे की विभिन्न श्रेणियों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है। श्री गुप्ता रायबरेली स्थित सरल इण्डस्ट्रीज के मालिक हैं। उन्हें यह पुरस्कार मैन्यूफैक्चरर आॅफ द इयर श्रेणी के अन्तर्गत प्रदान किया गया है। श्री गुप्ता रायबरेली इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। उद्यमी सुरेश गुप्ता ने बताया कि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त कर श्री गुप्ता ने रायबरेली का नाम रोशन किया है। श्री गुप्ता की इस उपलब्धि के लिए इण्डियन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अविचल खुबेले द्वारा भी श्री गुप्ता को सम्मानित किया गया।