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माया नगरी के भुतहा बंगले

इस खौफनाक घटना की शुरूआत तब हुयी जब 1948 में शांति प्रसाद खत्री नामक एक मशहूर प्रापर्टी डीलर ने बम्बई के पुराने जमींदार से बान्द्रा के पाली हिल के पास एक विशाल जमीन खरीदी हाँलाकि जमीन खरीदने से पहले कुछ लोगों ने उन्हें आगाह भी किया था, यह मनहूस व भुतहा जमीन मत खरीदो वीराने मे स्थित इस जमीन पर अक्सर लोगों को एक प्रेतनी दुल्हन दिखाई देती थी जो लोगों से मदद मांगती थी जब कोई उसके पास जाता वो रहस्यमय ढंग से गायब हो जाती थी कुछ लोग रहस्यमय हालत मे मरे भी पाये गये थे पर शांतिलाल ने इन सब बातों को कोरी बकवास मानकर जमीन खरीद ली उसका ईरादा वहाँ फिल्म थियेटर या होटल खोलना था पर जमीन खरीदते ही उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जिस दिन वह जमीन खरीद कर लौटे उसी दिन उनकी पत्नी को दुमंजिले मकान मे किसी की छाया दिखी वो घबरा कर चीखती हुयी नीचे भागी जीने से उसका पंाव फिसल गया वो लंबे समय तक अस्पताल मे पड़ी रही और कभी पूरी तरह से ठीक नही हो सकी, शांतिलाल को व्यापार में भारी बहुत घाटा हुआ इन्ही परेशानियों से गुजरते हुये उन्हें दिसम्बर 1950 में एक बार अपने एक रिश्तेदार के यहाँ बनारस जाना पड़ा उनकी सलाह पर वो एक दोपहर बनारस के पण्डित रामचन्द्र जी मिश्रा 'व्यास' जी से मिले जो वनदुर्गा के उपासक थे और दुर्गाकुंड से अस्सी जाने वाली रोड पर भारती सिनेमा के सामने वाली गली मे पुश्तैनी मकान मे रहते थे उन्होंने माँ का ध्यान लगा कर शांतिलाल को बताया कि आप जिस जमीन के बारे मे पूछ रहे है। वहाँ पहले एक पुराना शमशान या कब्रिस्तान हुआ करता था वहाँ एक नीच आत्मा का वास है। वो जमीन 11 लोगों की बलि लेकर मुक्त होगी वह या तो जान लेगी या धन वैभव छीनकर भिखारी बना देगी उस जमीन से जितनी जल्दी हो सके अपना पीछा छुड़ाओं शांतिप्रसाद जी ने व्यास जी की बात का अक्षरशः पालन किया उसने वहां यूनियन पार्क नाम से भव्य काॅलोनी बनाई कोलाहल और प्रदूषण से मुक्त और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर इस कालोनी मे 12 बेहद खूबसूरत प्लाॅट निकाले इन प्लाॅटो के अधिकतर खरीददार उस समय की फिल्मी दुनिया के चमकते सितारे थे, यह प्लाॅट दो लाईनो मे थे बीच में खूबसूरत सड़क थी घुसते ही पहली लाईन मे घुसते ही दांये हाथ पहला बंगला सीमा और पतिता जैसी हिट फिल्मों के निर्देशक अभिय चक्रवर्ती का बंगला था दूसरा मशहूर विलेन प्राण का बंगला था तीसरा दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तलवारबाज हीरो रंजन का था चैथा फिल्म निर्माता निर्देशक व फाईनेंसर भगवानदास की पत्नी पूर्णिमा का था पांचवा बंगला नवाब पालनपुर जहाँगीर खान का था और छठा बंगला अंत मे गोप के बंगले के सामने एक हीरो के सिंधी व्यापारी लोकमल बुधरानी का था दूसरी लाईन मे घुसते ही बांयी ओर 2 बंगले अभिनेता अशोक कुमार के थे, जिसे उन्होंने अभिनेता अल नासिर को किराये पर दे रखा था उसके बगल मे मशहूर फिल्म निर्माता नाना भाई भट्ट का था जो आज के फिल्म निर्माता महेश भट्ट के पिता थे उसके बगल मे फिल्म निर्देशक एम. सादिक का बंगला था उसके उसके बगल मे अभिनेता सज्जन का बंगला था और अंत मे भगवानदास का बंगला था जिसे बाद मे कामेडियन गोप ने खरीद लिया था भटकती आत्मा का पहला शिकार बने नवाब पालनपुर के किरायेदार साजिद साहब 1953 की जनवरी की एक देर जब सारा माहैाल कुहासे और सन्नाटे के आलम मे डूबा हुआ था तो साजिद साहब अपनी स्टैन्डर्ड कार से एक पार्टी से लौट रहे थे जैसे ही वह युनियन पार्क की गली मे घुसे तो कार के सामने एक धुंधली सी मानव छा आ गई  गौर से देखने पर पता चला कि वह शादी के जोड़े मे लिपटी और जेवरों से लदी नई नवेली दुल्हन थी तभी अचानक कार घरघरा कर बंद हो गई साजिद साहब ने कार में चाभी घुमाकर फिर कार स्टार्ट की जैसे ही उन्हांेने सामने देखा तो दुल्हन हवा मे गायब हो गई थी सारे बंगल अंधेरे और खमोशी मे डूबे थे दूर-दूर तक सिवाय कालोनी के कुछ नजर नही आ रहा था, साजिद साहब मजबूत दिल गुर्दे के शख्स थे उन्होंने कार आगे बढानी चाही पर कार आगे नही बढी जबकि कार का इंजन फुलस्पीड से चालू था पर कार आगे आगे नही बढ रही वो घबराकर बाहर निकलनें लगे तभी उन्हें किसी ने हवा मे उठाकर सड़क पर फेंक दिया अचानक कार बिना ड्राईवर के दौड़ पड़ी और सामने बाडन्ड्री वाॅल से टकराकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई साजिद साहब की रीढ़ की हड्डी टूट गई उन्हें चिन्तामणि अस्पताल मे भर्ती कराया गया जहां के डाक्टरों ने बताया की उनकी रीट की हड्डी कारबंकल ग्रस्त है। साजिद साहब ने अपने बयान मे बताया गिरने के बाद ना जाने कहाँ से घुड़सवार फौज आ गई और घोड़े अपने नाल लगे खुरो से उनकी पीठ कुचलते हुये चले गये कुछ दिन बाद वे चल बसे।
 आत्मा केे अगले शिकार बने चन्द्रलेखा और निशान जैसी हिट फिल्मों के दक्षिण भारत के मशहूर स्टार रंजन, एक देर रात वो शूंिटंग से लौट तो उन्होंने देखा कि उनका कुत्ता अंधेरे मे किसी चीज को देखकर भौंक रहा है। उन्होंने उस दिशा में देखा तो उन्हें एक बेहद खूबसूरत दुल्हन दिखाई दी जो उनके देखते-देखते गायब हो गई अब उन्हें दिन-रात सपनों और खयालों मे उन्हें वही दुल्हन दिखाई देने लगी उन्हें अजीब से दौरे पड़ने लगे डाक्टरों इसे पागलपन बताया पर डाक्टरी ईलाज से कोई लाभ नही हुआ फिर वो तांत्रिक ईलाज करवाने लगे और प्रेतात्मा को काबू में करने के लिये खुद तंत्र साधना करने लगे फिर अपने गुरू की सलाह पर वे यूनियन पार्क का बंगला छोड़कर मद्रास मे बस गये फिर कभी बम्बई नही आये इसके बाद भूत का साया निर्देशक अमिय चक्रवर्ती पर पड़ा एक रात उन्होंने बड़ा भयानक सपना देख जिसमे एक दुल्हन उनका खून पी रही थी सपने का असर अगले दिन भर हावी रहा वे उदास मन से अपनी आगामी फिल्म शिकवा पर काम करने स्टूडियो पहुँचें दोपहर वे उन्हें विचित्र से भयानक दृश्य दिखने लगे 6 मार्च 1957 की दोपहर मे उन्हें दिल का दौरा पड़ा और देखते-देखते वे चल बसे प्रेत के अगले शिकार बने मशहूर फिल्म डायरेक्टर नाना भाई भट्ट उनकी साली अभिनेत्री पूर्णिमा और उसके फाईनेंसर पति भगवानदास वर्मा जो अचानक दीवालिया हो गये उनके करोड़पति साढू भगवानदास अत्यंत गरीबी मे मर गये नाना भाई का भट्टा बैठ गया और उनकी कोठी नीलाम हो गई उनकी पत्नी का एक जहाज डूब गया इस घटना के कुछ महीनो बाद गोप के बंगल के सामने सिंधी व्यापारी की 20 साल की बड़ी लड़की जो बंगले मे ऊपरी मंजिल पर अपने कमरे मे सो रही थी आधी रात को सोते-सोते अचानक भूत-भूत चिल्लाते हुये जीने से तेजी से नीचे उतरने लगी अचानक फिसल कर नीचे आ गिरी कुछ समय बाद वह शरीर से जो ठीक हो गई पर उसकी आवाज बंद हो गई और उसे अजीब से मानसिक दौरे से पड़ने लगे उसने ईशारे से कुछ बताया जो कोई समझ नही सका उसने लिख कर बताया कि वो अपने कमरे मे सो रही थी अचानक उसकी नींद खुल गई उसने कमरे मे एक लाल जोड़ें मे सजी जेवरांे से लदी एक दुल्हन को देखा जो देखते-देखते गायब हो गई। उसी हालत मे एक दिन वो मर गई। इसके बाद सिंधी परिवार का जवान लड़का जो एक गर्मी की रात छत पर सोया था मूत्रत्याग करने की ईच्छा से उठा तभी उसे किसी युवती के खिलखिलाने की आवाज आई वो चैंक कर चारों और देखने लगा उसे कोई नही दिख सारी काॅलोनी सन्नाटे और अंधेरे मे डूबी हुयी थी तभी उसे छत की चहारदीवारी पर एक खूबसूरत दुल्हन खड़ी दिखाई दी उसे हैरानी हुयी कि आधी रात मे कौन नयी नवेली दुल्हन घूम रही है। और वह छत पर कैसे आई उसे लगा कि दुल्हन तो किसी भी वक्त छत से गिर सकती है। वो चीखते हुये उसे बचाने दौड़ा पर नजदीक जाते ही दुल्हन हवा मे गायब हो गई इसके पहले उसे कुछ समझ मे आता किसी ने उसे हवा मे उठा कर नीचे फेंक दिया उसे तत्काल अस्पताल पहुँचया गया जहाँ उसकी मौत हो गई मरने से पूर्व उसने घरवालों को सारी हकीकत बताई पुत्री की मौत के बाद सिंधी परिवार को किसी तांत्रिक ने चेतावनी दी थी इस मकान पर किसी चुड़ैल का साया है। इसे तुरंत छोड़ दो पर सिंधी परिवार मे इस पर गौर नही किया।
 अगले शिकार हुये सगाई और पतंगा जैसी हिट फिल्मों के सफल हास्य अभिनेता गोप जिनकी अभिनेता याकूब के साथ जोड़ी बेहद हिट रही थी उन्हांेने 1957 में भगवानदास की कोठी कौड़ियों के भाव खरीद ली थी कोठी मे आने के 22 वें दिन उनका अपनी पत्नी से तलाक हो गया था पत्नी लतिका दो बेटों के साथ लंदन चली गई बीबी बच्चों से वे मरहूम तन्हा रह गये वो 1957 की एक दोपहर कंुदन कुमार की फिल्म तीसरी गली की शूटिंग कर रहे थें तभी अचानक ना जाने कैसे दिन 11 बजे उन्हें आलीशान स्टूडियों मे सांप ने काट लिया जिससे वो इतने दहशत मंे आ गये उन्हें 12 बजें दिन मे दिल का दौरा पड़ा और वे अस्पताल मे चल बसे जब कि डाक्टरों को उनके शरीर में सांप का कोई विष नही मिला इसके कुछ दिन बाद अभिनेता अल नासिर ने 1957 की एक एक रात बहुत भयानक सपना देख जिसमे एक भयानक चेहरे वाला वाला शख्स उनके कुत्ते को मार रहा था अचानक उनकी नींद खुल गई तो यह देख कर उन्हें बड़ी हैरत हुयी कि उनका कुत्ता किसी चीज से भयभीत हो कर भौंकता हुआ बंगले मे ईधर-उधर भाग रहा था वे कुत्ते को बांधने के लिये दीवार मे कील ठोकने लगे तभी उनके हाथ मे हथोड़ी से चोट लग गई उसके बाद वे अजीब सी बीमारी के शिकार हो गये उन्हें भयानक चेहरे दिखने लगे डाक्टरों ने उसे  टिटनेस बताया उसी बीमारी से अचानक वे चल बसे कुछ लोगों का कहना था कि उनके पैर मे जंग लगी कील घुस गई थी फिल्म स्टूडियो मे अचानक उन्हें लकवा मार गया जिस वे चल बसे सैंया जैसी हिट फिल्म के निर्देंशक एम. सादिक को हर काम मे घाटे होने लगे उन्होंने शबाब बनाई जो फ्लाप रही उन्हें अपना बंगला गिरवी रखना पड़ा भारी घाटे के बाद वे पाकिस्तान चले गये वही 3 अक्टूबर 1971 को उनकी सड़-सड़कर मौत हो गई। इन्हीं दिनों नवाब पालनपुर की कोठी के बिजली के तारों को चूहों ने काट डाला जिससे कोठी मे भीषण आग लग गई पूरी कोठी बुरी तरह जल गई इन घटनाओं को देखकर पालनपुर के नवाब जहाँगीर खान कोठी मे रहने ही नही आये इन घटनाओं को देखकर अभिनेता सज्जन की रूह फना हो गई वे अपना बंगला किराये पर देकर मलाड के अपने पुराने और वीरान मकान मे रहने लगे, जहाँ वे पहले रहते थे उनकी फिल्में लगातार पिटने लेगी वो कंगाल हो गये उन दिनों के चश्मदीद गवाह ब्रिटिशकाल के प्रसिद्ध जासूस और बाद के सफल पत्रकार धमेंन्द्र गौड़ ने लिखा था कि उन दिनों वे बम्बई मे ही थे उनके छोटे भाई ब्रजेन्द्र गौड़ पटकथा-संवाद लेखक और सज्जन और निम्मी अभिनीत कस्तूरी फिल्म के निर्देंशक भी वहाँ प्लाॅट लेना चाहते थे लेकिन धमेंन्द्र गौड़ ने उन्हें मना कर दिया था उन्ही दिनों गौड़ को पता चला कि पहले यह यहाँ श्मशान हुआ करता था फिर चर्चा फैली कि पहले इस ईलाके मे भूत रहते थे 1957 के बाद एकाएक भुतहा घटनायें ना जाने किन कारणों से थम गई फिर वहाँ कोई अशुभ घटना नहीं घटी शायद उसे दुल्हन की आत्मा को मुक्ति मिल गई यूनियन पार्क में क्या और क्यों घटना घटी आज तक इन सवालों का ठीक-ठीक कोई जवाब नही दे सका। 
रहस्य-रोमांच की यह कहानी पूर्ण काल्पनिक है।


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