अंखियन देखी अयोध्या

राम जंम भूमि स्थल सदियों से हिन्दु और मुस्लिम जनमानस को झंझकोरता रहा है। यह विषय अपने आप मे धर्म, इतिहास, पुराण, पुरात्व, साहित्य, कानून, प्राचीन व आधुनिक राजनीति सब कुछ समेटे हुये है। आजाद भारत के सर्वाधिक विवादास्पद व चर्चित विषय पर सिद्धहस्त और कुशल इतिहास लेखक श्री सरनाम सिंह सूर्यवंषी की यह कृति अपने आप मे राम जंम भूमि की इनसाइक्लोपाडिया है। पुस्तक  मे 7 अध्याय  है। पुस्तक का तीसरा व चैथा अध्याय लेखक द्वारा 1990 से लेकर 1993 तक व उसके बाद हजारों अखबारों, पत्रिकाओं की कटिंग से प्राप्त, चित्रों व खबरों पर आधारित है। तीसरे अध्याय में जंम भूमि का प्रामाणिक इतिहास, उसके विविध विध्वंस, उससे संबधित 81 युद्धों का वर्णन है। पंाचवे अध्याय जंम भमि से संबधित प्राचीन देषी विदेषी पुस्तकों, बाबरनामा, सरकारी गजेटियर, उर्दू , संस्कृत ग्रन्थों, पुरातात्विक अभिलेखों व अवषेशों पर आधारित है। छठे अध्याय मे जंम भूमि के कानूनी तथ्यों और मुकदमों के फैसलों का वर्णन है। सातवे अध्याय मे लेखक राष्ट्रीयता व हिन्दु-मुस्लिम एकता की स्थापना का प्रयास किया है। अपने आप मे विष्व मे अनोखी और इस विषय पर लिखी इकलौती प्रामाणिक पुस्तक का लेखन तब सार्थक हुआ जब इलाहाबाद हाइकोर्ट मे पुस्तक को राम जंम भूमि विवाद से संबधित मुकदमे मे एक साक्ष्य के रूप मे स्वीकार किया। सरल व जादुई षैली मे लिखी यह पुस्तक लेखक के 16 वर्ष के श्रम, तप और भागीरथी प्रयास का परिणाम है। इतिहास की अद्वितीय धरोहर होने के कारण पुस्तक पठनीय और संग्रहणीय है। 
 


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