दोहा सृजन में अपने आपको डुबा दिया

प्रयागराज। पंकज सिंह राहिब के दोहे इबादत की तरह है, उन्होंने दोहा सृजन में अपने आपको डुबा दिया है। इनके दोहों को पढ़ने के बाद यह स्पष्ट रूप कहा जा सकता है कि इन्होंने अपने आपको दोहों में डुबा दिया है। ये दोहों की परंपरा को शानदार तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। यह बात फिल्म गीतकार और मशहूर शायर इब्राहीम अश्क ने सोमवार की शाम गुफ़्तगू की ओर से बाल भारती स्कूल में बतौर मुख्य अतिथि 'कौन किस समझाय' का विमोचन करते हुए कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यश मालवीय ने कहा कि पंकज राहिब के दोहे पढ़ते हुए लगा कि वे दोहों को ओढ़ते और बिछाते हैं, इनके दोहों से गुजरत हुए लगा कि वास्तविक रूप में दोहे ऐसे ही लिखना चाहिए। श्री यश ने कहा कि इनके दोहों को पढ़ने के बाद मैं भी और अधिक दोहा लिखने के लिए प्रेरित हुआ। रविनंदन सिंह ने कहा कि साहित्य बहुत समय लेता है, जब खूब अध्ययन करके सृजन किया जाता है तो लेखनी उभरकर सामने आती है। पंकज राहिब के दोहों को पढ़ते समय यह महसूस हुआ कि इन्होंने साहित्य का गहरा अध्ययन किया है। गुफ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गांजी ने कहा कि पंकज के दोहे आज के समय के लिए मिसाल है, दोहा लिखने वालों को इनके दोहों से प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया।
इस मौके पर रेशादुल इस्लाम, अनिल मानव, राम लखन चैरसिया,  अफसर जमाल, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, नीना मोहन श्रीवास्तव, शिवशंरण बंधु, नरेश महरानी, कविता उपाध्याय, आसिफ उस्मानी, संपदा मिश्रा, शिबली सना, शिवाजी यादव, ललिता नारायणी पाठक, परवेज अख्तर, महक जौनपुरी, रितंधर मिश्रा, सुमन दुग्गल, डाॅ. वीरेंद्र कुमारी तिवारी, असद गाजीपुरी, राजेंद्र यादव, परवेज अख्तर आदि मौजूद रहे।


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