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नेपोलियन के हाथ की तर्जनी

अबे डेलाक्लार नेपोलियन का पाॅमिस्ट था उसने नेपोलियन का हाथ की तर्जनी देखकर कहा था कि कि तुम टापू मे पैदा हुये हो और टापू मे ही मरोगे नेपालियन का जंम 15 अगस्त 1769 को फ्रान्स के क्रोशिया टापू के एजेशियो स्थान पर हुआ था फोलसम की बुक फेट आॅफ नेपोलियन मे फोलसम ने नेपोलियन के हाथ का प्रिंट देते हुये उसके हाथ मे निम्न महत्वपूर्ण चिन्ह बताये थे नेपोलियन के हाथ मे दस नक्षत्र थे जो नेपोलियन के सारे नक्षत्र अंगूठे और तर्जनी पर थे सम्राज्ञी जोजेफाईन के हाथ मे कुल नौ नक्षत्र थे उनके सारे नक्षत्र तर्जनी अनामिका पर थे और  शनि पर्वत के नक्षत्र ने उसे फ्रान्स का सम्राट बनाया सूर्य के चिन्ह ने उसे असाधारण प्रतिभा दी अनामिका के तीसरे पर्व पर बने कोंण के चिन्ह ने उसे अंत मे देश से निर्वासन की सजा दी और सेंट हेलना टापू मे उसकी मृत्यु हुयी नेपोलियन अपनी सेना मे लंबी मस्तक रेखा वाले तथा नुकीली नाक वाले जनरल को ही रखता था उसका कहना था कि चेहरा धोखा दे सकता है। हाथ नही वह बहादुर से अधिक भाग्यशाली होने पर यकीन करता था जनवरी 1793 में हुयी फ्रान्स की क्रान्ति के दौरान देश की बिगड़ी व्यवस्था और फैली अराजकता के बीच एक बेखबरा और बेखौफ शख्स एक ऐसै शख्स और महानायक को खोज रहा था जो क्रान्ति को नई दिशा देकर नया इतिहास लिखने जा रहा था जिसके बारे मे पुरानी भविष्यवाणियों की किताबों मे पहले ही लिखा जा चुका था सब कुछ पहले से ही निश्चित था वो शख्स था अपने काल का महान ज्योतिषी अबे पियरे दाक्लेर उसने भविष्यवाणी की थी कि जिन लोंगांे ने सम्राट की फांसी का समर्थन किया है। मौत और दुर्भाग्य की आंधी उन्हें भी लील जायेगी वे भी फांसी पर चढेंगंे अपने बारे मे वो अक्सर कहा करता था कि वो लंबी आयु जियेगा और एक महान सम्राट की सेवा करेगा 1793 मे पेरिस की खूनी क्रान्ति के ही दिनों मे एक साधारण सा परन्तु बेहद योग्य सैनिक जो अपने अधिकारियों के क्रोध के कारण बर्खास्त हो गया था और भूखों मर रहा था पियरे की ख्याति सुन कर दाक्लेर से मिलने आया उसने अपनी जंमपत्री और जंमस्थान लिख कर पियरे को दी पर अपना नाम नही दिया पियरे ने कहा कि यदि तुम क्रोशिया मे उसी तारीख 15 अगस्त को पैदा हुये हो जो तुमने लिख कर दी है। तो मुझे महान ज्योतिषी कैडिलयास्ट¬ªो की 10 साल पहले की गई भविष्यवाणी याद आ रही है जबकि क्रान्ति का नाम भी नही था उसने कहा था कि वो एक क्रोशियन्स ही होगा जो इस अराजक क्रान्ति का अंत करेगा जंम तारीख के अनुसार वह तुम ही हो। एक विधवा तुम्हारे जीवन मे आयेगी वो तुम्हें साधारण सैनिक से सम्राट बना देगी वह सैनिक था नोपोलियन बोनापार्ट नेपोलियन ने पियरे की बात को बकवास माना और फीस देकर चला गया इसी बीच नेपोलियन एक बेहद खूबसूरत विधवा जोजेफाईन से मिला और 9 मार्च 1796 को नेपोलियन ने जोजेफाईन से शादी कर ली इसके चार साल बाद वह 1799 मे मिश्र पर सैनिक महान विजय करके आया उसकी ख्याति दूर दूर तक फैल गई थी परन्तु उसके अनेक शत्रु थे सरकार के विरूद्ध प्रदर्शन हो रहे थे हर तरफ अफरा तफरी फैली हुयी थी तभी 8 नवम्बर 1799 की शाम जब वह पेरिस मे बैठा था उसके दिमाग मे पियरे के शब्द गूंज उठे कि वो एक क्रोशियन्स ही होगा जो इस क्रान्ति का अंत करेगा और नेपोलियन तुरंत ही उस रात पियरे के पास पहुंचा तथा उसने अपना प्रश्न लिखा वह क्रोशियन जनरल नेपोलियन बोनापार्ट यदि कल पेरिस मे विद्रोह का खतरा ले तो क्या होगा पियरे भविष्य बताया कि वह जनरल 1804 मे सैनिक अधिकारियों से घिरा फ्रान्स के सिंहासन पर बैठैगा 1815 मे अंगेजों की तोपें उसे सिंहासन से उतार देंगी वह दो बार राजकुमारों के समान जनता पर छा जायेगा किन्तु जनता ही उसकी नियति होगी दूसरे ही दिन नेपोलियन ने खुद को सैनिकों का अधिनायक बना लिया 1804 मे उसने फ्रान्स के सम्राट का राजमुकट पहना और पियरे को उसने अपना राज ज्योतिषी बना दिया जोजेफाईन सम्राज्ञी बनी एक दिन नेपोलियन ने जोजेफाईन को अपने और जोजेफाईन के बारे मे कैडिलयास्ट्रो की लिखी भविष्यवाणी की लिखी पुस्तक दिखाई जिसे पढ कर जोजेफाईन भी हैरान रह गई सब कुछ पूर्व निर्धारित था  1814 मे पियरे ने नेपालियन की कुण्डली पर काम ही करते हुये देख लिया कि अगले साल सन 1815 मे जून के महीने मे नेपालियन का पतन हो जायेगा पियरे नेपालियन का ऋणी था अतः जब नेपालियन नेपोलियन के पतन का समय आया तब 1815 मे जून के महीने मे जब नेपालियन युद्ध के मोर्च पर था वह पैदल ही सम्राट के तक पहुंचने का प्रयास करता रहा ताकि वह सम्राट को आगाह कर सके वह 14 जून की शाम हो सम्राट तक पहुंचा पर अंगरक्षकों ने उसे रोक दिया कुछ दिनों बाद जब नेपोलियन ने पेरिस की ओर पलायन किया तो उसे एक गढढे मे वृद्ध एबे पियरे का शव मिला उस शव के हाथ मे उसके सम्राट नेपोलियन की जंमपत्री थी तथा पियरे का संदेश भी नेपोलियन सब समझ गया अपना पतन, भविष्य व मृत्यु भी। 18 जून 1815 मे वाटरलू के युद्ध मे ब्रिटिश फौजों के हाथों नेपालियन की हार हो गई कुछ समय बाद नेपालियन पुनः सम्राट बना किन्तु वह पुनः हार गया उसे कैद करके सेंट हेलना द्वीप भेजा गया जहाँ 6 मई 1821 को नेपालियन की मौत हो गई।  


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