संस्कारों व जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर, आॅडिटोरियम, लखनऊ में आयोजित विश्व एकता सत्संग में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभिन्न धर्मावलम्बियों व विद्वजनों ने एक स्वर से कहा कि संस्कारों व जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है। विद्वजनों का कहना था कि शिक्षा ही मनुष्य में मानवता का संचार करती है। जब शिक्षा में संस्कारों व जीवन मूल्यों का समावेश होता है तभी शिक्षा उद्देश्यपूर्ण कहलाती है और मनुष्य में मनुष्यता का विकास संभव हो पाता है अन्यथा संस्कारविहीन शिक्षा तो अधूरी शिक्षा है, जो मानवता के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती है।   उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भौतिक रूप में तो शिक्षा का लक्ष्य तो रोटी, कपड़ा, मकान और चिकित्सा प्राप्त करना है, परन्तु इसका मूल उद्देश्य विश्व एकता, हृदयों की एकता एवं मानवमात्र की एकता में निहित है। आज जरूरत है कि बच्चों को शुरू से ही जीवन मूल्यों, प्रेम, भाईचारे और समाज की सेवा का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। इससे पहले, सी.एम.एस. शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों से विश्व एकता सत्संग का शुभारम्भ हुआ, जिन्होंने बहुत ही सुमधुर भजन सुनाकर सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया।
 विश्व एकता सत्संग में सी.एम.एस. राजेन्द्र नगर (द्वितीय कैम्पस) के छात्रों ने रंगारंग शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों की इन्द्रधनुषी छटा प्रदर्शित कर उपस्थित सत्संग प्रेमियों को गद्गद कर दिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्कूल प्रार्थना से हुआ एवं इसके उपरान्त प्रार्थना गीत 'हे दीनबन्धु', 'ओ गाॅड गाइड मी' एवं 'आई बियर विटनेस ओ माॅई गाॅड' ने सत्संग प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। इसके अलावा, छात्रों द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना नृत्य 'जब सबकी एक है धरती' एवं माताओं द्वारा प्रस्तुत समूह गीत 'पवित्र मन रखो' को सभी ने खूब सराहा। छात्रों ने आर्केस्ट्रा की शानदार प्रस्तुति से भी खूब तालियां बटोरी। सत्संग का समापन संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।