सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

सेहत के लिए किशमिश लाभदायक है

सेहत और स्वाद के लिए बहुत लाभदायक होती है। अगर आप अपनी सेहत को लेकर चिंतित रहते हैं तो किशमिश का पानी पीना शुरू कर दें। इस पानी को बनाने काी विधि काफी सरल है। इस पानी को कम से कम एक हफ्ते तक पीने से ना केवल आपके दिल की बीमारी दूर होगी बल्कि आपका लिवर भी साफ होगा। किशमिश के पानी में काफी विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। किशमिश के पानी का अगर नियमित सेवन किया जाए तो शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलता है और बॉडी डिटॉक्स होती है। इस पानी को कम से कम एक हफ्ते तक पीने से ना केवल आपके दिल की बीमारी दूर होगी बल्कि आपका लिवर भी साफ होगा और उसके काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी। इससे पहले कि आप इसके हेल्थ बेनिफिट को जानें आइये देख लेते हैं कि किशमिश का पानी कैसे तैयार करते हैं।
किशमिश का पानी बनने की विधि:--
सामग्री- 2 कप पानी (400 मिलीलीटर) और 150 ग्राम किशमिश (मुठ्ठी भर)
पानी तैयार करने की विधि- एक पैन में पानी को उबालें और उबलते हुए पानी में अच्छे से धुली हुई किशमिश को डालें ( ध्यान रखें हमेशा काले अर्थात गहरे रंग की किशमिश ही चुनें) और 1 मिनट बाद गैस बंद कर दें और इसको भिगो कर रातभर के लिये रख दें। दूसरे दिन सुबह इस पानी को छान कर धीमी आंच पर हल्का गरम कर लें। इस पानी को सुबह खाली पेट पिएं और 30-35 मिनट रूक कर नाश्ता करें। उस बचे हुए किशमिश को नास्ते के साथ चबा चबा कर खाएं।
किशमिश का पानी पीने के लाभ -
बॉडी डिटॉक्स करे - इस पानी को पीने से षरीर की गंदगी बाहर निकलती है और खून साफ होता है। और इसमे मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट बॉडी के सेल्स को हेल्दी बनाकर कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है। 
लिवर को स्वस्थ्य रखे - इसके प्रयोग से लिवर में मौजूद विशाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और लिवर पूरी तरह साफ हो जाता है। यह लिवर की कार्य क्षमता को भी बढाता है।
एनीमिया को दूर करे - किशमिश में ढेर सारा आयरन और कॉपर पाया जाता है। यही नहीं इसमें ऐसे विटामिन्स होते हैं जो रेड ब्लड सेल्स को बढाते हैं। इस पानी का नियमित सेवन करने से शरीर में कभी एनीमिया नहीं होता।
दिल की करे सुरक्षा - इस पानी का नियमित सेवन आपको हार्ट की बीमारी से भी बचाता है। यह खून की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और स्ट्रोक, हाई बीपी और हार्ट अटैक से बचाता है।
पेट को रखे दुरुस्त - अगर आपको पेट में एसिडिटी बनने की समस्या है या फिर खाना पचाने में दिक्कत आती है तो आपको रोज सुबह खाली पेट किशमिश का पानी पीने की आदत डाल लेनी चाहिये।
किडनी को स्वस्थ रखता है - किशमिश में काफी मात्रा में पोटेशियम और मैग्नीशियम पाए जाते हैं। ऐसे में रोजाना इस पानी का सेवन करने से शरीर के विशैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और किडनी स्वस्थ रहती है।
इसके और अन्य लाभ:- 
- इसमें मौजूद अमीनो एसिड हमें एनर्जी देता है थकान और कमजोरी दूर करता है। 
- इसमें मौजूद विटामिन ए, बीटाकैरोटीन आँखों के लिए फायदेमंद होता है। 
- भरपूर कैल्शियम हड्डियों को मजबूत करता है और अर्थराइटिस और गठिया से बचाता है।
- यह हमारे मेटाबॉलिज्म को अच्छा करके फैट बर्निग प्रोसेस को तेज करता है।
इस उपचार को 1 हफ्ते तक करें और फर्क देखें। इस प्रक्रिया को आप निरंतर कर सकते हैं, अथवा हर महीने इस प्रकिया को दोहराते रहें आपको अपने स्वास्थ्य जीवन में बहुत ज्यादा फर्क पड़ता दिखाई देगा।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति