60 लाख लोग हर साल तम्बाकू के सेवन से असमय मृत्यु होती है

जिला स्तरीय एक दिवसीय मीडिया उन्मुखीकरण तम्बाकू नियंत्रण कार्यशाला में मुख्य चिकित्साधिकारी, रायबरेली संजय कुमार शर्मा, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 एस0के0 चक, डा0 एम0 नारायन सहित दर्जो मीडिया बन्धुओं ने तम्बाकू जानलेवा है, जिन्दगी चुनो तम्बाकू नही आदि की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जनपद में तम्बाकू उत्पाद अधिनियम कोटपा-2003 का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया जाये। 60 लाख लोग हर साल तम्बाकू के सेवन से अपनी जान गवाते है। जिसमें लगभग 9 लाख भारतीय तम्बाकू के सेवन से मरते है जो कि क्षय रोग, एड्स और मलेरिया के कारण मरने वाले लोगों से अधिक है। प्रतिदिन 2,200 से अधिक भारतीय तत्बाकू सेवन के प्रयोग से मरते है। वर्ष 2030 में धुम्रपान से मरने वालों की संख्या लगभग 83 लाख होगी। 
 सीएमओ कार्यालय में आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए नवागन्तुक मुख्यचिकित्साधिकारी ने मीडिया बन्धुओं से कहा कि लगभग 95 प्रतिशत मुंह के कैसर तम्बाकू सेवन करने वाले व्यक्तियों में होते है। अभिघात, हार्ट-अटैक, फेफड़े के रोग, दृष्टिविहीनता और कुछ अन्य रोग तम्बाकू के सेवन से होते है। विश्व भर में रोकी जा सकने वाली मौतें और एक मात्र सबसे बड़ा कारण तम्बाकू सेवन है। धू्रमपान के अलावा तम्बाकू सेवन के कई प्रकार है जर्दा, खैनी, हुक्का, गुटखा, तम्बाकू, युक्त पान मसाला, मावा, मिसरी एवं गुल आदि। यह भी बीड़ी सिगरेट की ही तरह हानिकारक है। सरकार तम्बाकू के सेवन को रोकने के लिए पूरी तरह से गम्भीर है अतः जागरूकता के माध्यम स्वयं विवेक के माध्यम से जनमानस में सभी प्रकार के तम्बाकू के सेवन करने से दूर रहें। कार्यशाला में उपस्थित जनों से कहा कि राज्य सरकार के सत्त प्रयासों के क्रम में जनपदों में कार्यरत जिला तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के साथ अन्य प्रशासनिक विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर जनपद को तम्बाकू मुक्त कराने के बारे में बताया गया। सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम कोटपा-2003 की जानकारी देते हुए बताया कि तम्बाकू उत्पाद अधिनियम कोटपा-2003 का प्रभावी क्रियान्वयन किये जाने की बात पर बल दिया गया। उन्होंने कार्यशाला में आये मीडिया बन्धुओं से कहा कि अधिकारी प्रतिनिधियों के भांति समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को पूरा करने में साझा सहयोग की बात कही गयी साथ ही तम्बाकू नियंत्रण करने हेतु अन्य विभागों की उनके स्वयं के सम्बन्धित के कार्यालयों को तम्बाकू मुक्त कराने की जिम्मेदारी का निर्वहन करने की बात कही गयी। जनपद में कार्यरत तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के द्वारा जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में ही निर्देश दिये जा चुके है कि जिला स्तरीय तम्बाकू नियंत्रर्णाथ सचल/प्रर्वतन दल के कार्य एवं दायित्वों के अन्तर्गत कोटपा एक्ट-2003 के प्राविघानें के प्रभावी क्रियान्वयन करने की बात पर बल दिया गया है। कार्यशाला में तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के उद्देश्य उदाहरणार्थ जागरूकता, कानून का परिपालन तथा निगरानी पर विशेष चर्चा की गयी। कार्यशाला में विस्तृत रूप से तम्बाकू नियंत्रण कानून 2003 ''सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद'' (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम-2003 के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया। यह अधिनियम उन सभी उत्पादों पर लागू होता है जिनमें किसी भी रूप में तम्बाकू है जैसे-सिगरेट, सिगार, चेरूट, बीड़ी, गुटका, पान मसाला, खैनी, मावा, मिसरी, सुंघनी, ई सिगरेट आदि। 
 जनपद में हर थाने में दो स्क्वायड टीम बनाकर थाने के अन्तर्गत आने वाले क्षेत्र में कोटपा एक्ट-2003 के अन्तर्गत धारा-4 में सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान निषेध, धारा-5 सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों के विज्ञ.ापन पर प्रतिबन्ध, धारा-6 नाबालिकों एवं शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास रिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबन्ध, धारा-7, 8 व 10 बिना विषिष्ट स्वास्थ्य चेतावनियों के सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबन्ध हेतु कार्यवाही कर जनपद को तम्बाकू मुक्त करवाया जायेगा। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 एम0 नारायन व डी0एस0 अस्थाना, डाॅ0 खालिद रिजवान, एडी सूचना प्रमोद कुमार, डिस्ट्रिक्ट कन्सलटेन्ट कई मीडिया बन्धुओं द्वारा तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के उद्देश्य तथा लक्ष्यों के बारे में सभी को अवगत कराया गया कि समाज में सिगरेट का चलन कोटपा-2003 के कानून की वजह से कम हुआ है परन्तु इस बात पर चिन्ता जाहिर की कि जन-मानस में गुटके के साथ तम्बाकू सेवन का चलन बढ़ गया है। जिसमें कमी लाने की जरूरत है। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सुचारू रूप से जनपद में क्रियान्वित करने हेतु भारत सरकार की गाईडलाईन के अनुसार डिस्ट्रिक टोबैको सेल की स्थापना कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी में की जा चुकी है। कार्यशाला में आये वरिष्ठ व वृद्धपत्रकार ने अपने अनुभव साझेदारी करते हुए बताया कि जब वह तम्बाकू का सेवन करते थे परिणाम स्वरूप उनके समस्त दांत को खो दिये। एक अन्य पत्रकार द्वारा बताया गया कि तम्बाकू सेवन रोकने के लिए हमे अपने मित्र व अतिथियों को चाय आदि जलपान के बाद गुटका व सिगरेट देकर उनका सम्मान नही करना चाहिए। इससे खराब आदत शरीर को घर कर लेती है। 
 दुसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार रघुनाथ द्विवेदी, गौरव अवस्थी, रसिक श्याम शरण द्विवेदी, अशोक शर्मा, प्रेम नारायण द्विवेदी, राधे श्यामलाल कर्ण, विजय यादव, डाॅ0 पंकज सिंह, राजपाल सिंह, अजीत सिंह, संजय सिंह, हिमांशु, मोहन कृष्ण, असद, अनिल, माधव, सुरेश, आलोक पाण्डेय, अजीत उर्फ जादू, सुनीत, रोहित, केशव, प्रद्युमन आदि पत्रकारों का मानना है कि तम्बाकू के सेवन से मांसिक स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है और तम्बाकू सेवन करने वाला व्यक्ति मासिक रोगों से पीड़ित हो जाता है। हम सभी को तम्बाकू व उसे जुड़े उत्पादों का सेवन नही करना चाहिए साथ ही अपने परिजन मित्र जन सामाज के जनों को भी इससे दूर रहने के लिए कहना चाहिए।