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नात पर पहली बार हिन्दी में विशेषांक: नीलिमा

प्रयागराज। हिन्दी में नातिया शायरी पर विशेषांक निकालकर 'गुफ़्तगू' पत्रिका ने इतिहास रच दिया है। अब तक नात पर हिन्दी में कोई विशेषांक प्रकाशित नहीं हुआ। यह एक बहुत ही बेहतरीन काम है। अल्लाह की हिदायत के मुताबिक दुनिया में इस्लाम मज़हब लाने पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्ल. की तारीफ़ में शायरी करना ही नातिया शायरी कहलाती है, इसकी शुरूआत अरब से हुई, इस विधा पर विशेषांक निकालना एक बड़ा काम है। यह बात 'गुफ़्तगू' की ओर से करैली स्थित अदब घर में आयोजित 'नातिया शायरी विशेषांक' विमोचन समारोह के दौरान मुख्य अतिथि डाॅ. नीलिमा मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि इस प्रकार अन्य विधाओं पर भी विशेषांक निकलने चाहिए, हम्द पर पर विशेष अंक आना चाहिए। उम्मीद है टीम गुफ़्तगू यह काम भी करेगी।
गुफ़्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने कहा कि यह दौर विशेषांक का है, अब सामान्य अंक को लोग न तो सहेजकर रखते हैं और न ही खरीदना चाहते हैं। लोग विशेष अंक या विशेष चीज़ ही चाहते हैं। ऐसे माहौल में टीम गुफ़्तगू ने निर्णय लिया है कि भिन्न-भिन्न विषयों पर विशेषांक निकाले जाएं। ग़ज़ल विशेषांक, महिला विशेषांक, महिला ग़ज़ल विशेषांक, इलाहाबाद विशेषांक, इलाहाबाद महिला विशेषांक, दोहा विशेषांक के बाद इस कड़ी का हिस्सा है नातिया शायरी विशेषांक। इसमें जहां विभिन्न लोगों के नात प्रकाशित किए गए हैं, वहीं नात पर कई शोध परख लेख भी शामिल किए गए हैं। शायर वाक़िफ़ अंसारी ने कहा कि गुफ़्तगू का यह अंक बेहद ख़ास है, इसमें देशभर के लोगों के नात तो शामिल किए गए ही हैं, अमेरिका तक के शायरों के नात भी शामिल हैं। इस परिदृश्य में देखा जाए तो यह अंक मील का पत्थर साबित हुआ है। हकीम रेशादुल इस्लाम ने कहा कि यह अंक कई मायने में नायाब है, इस तरह के काम की ही साहित्य में काउंटिंग होती है। हिन्दी में नात पर ख़ास अंक निकालना बेहद दूरदर्शिता का परिचायक हैं, ऐसे कामों की जितनी तारीफ़ की जाए, कम है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जमादार धीरज ने कहा कि गुफ़्तगू पत्रिका अब प्रयागराज की पहचान बन गई है, भिन्न-भिन्न विषयों पर विशेषांक निकालकर टीम गुफ़्तगू बहुत बड़ा काम कर रही है। ऐसे काम की जितनी तारीफ़ की जाए कम है। कार्यक्रम का संचालन शैलेंद्र जय ने कियां।
दूसरे दौर में मुशायरे का आयोजन किया गयां। जिसमें शिवाजी यादव, प्रभाशंकर शर्मा, अफ़सर जमाल, मुजाहिद लालटेन, सेलाल इलाहाबादी, असद ग़ाज़ीपुरी, फ़रमूद इलाहाबादी, दयाशंकर प्रसाद, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, जमादार धीरज, शाहिद इलाहाबादी आदि ने कलाम पेश किया। अंत में इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।


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