वास्तु विज्ञान

वास्तु जीवन को बाधा मुक्त और समृद्ध बनाने की एक शैली है। वास्तु शास्त्र घर, गांव या व्यापारिक संस्थान को प्रकृति के नियमों के अनुसार संतुलित करने और प्राकृतिक शक्तियों के उपयोग द्वारा जीवन को खुशहाल बनाने का शास्त्र है। इसमे अनेक ऐसै सरल उपाय होते है जो भवन में बिना भारी तोड़ फोड़ किये जातक की समस्याओं को दूर करते हैं। कुछ सरल उपाय इस प्रकार हैं।
1. मकान के पूर्व और उत्तर मे खाली जमीन छोड़ें। और उनमें फुलवारी अवश्य बनायें।
2. घर के सामने आक का पौधा और मध्य मे तुलसी को पौधा लगायें।
3. घर के सामनें कबाड़, टूटी फूटी चीजें या पत्थरों ढेर  ना जमा होने दें।
4. मकान के उत्तर व पूर्व में पानी भरने या रखनें का स्थान बनायें।
5. घर मे बिजली के उपकरण दक्षिण पूर्व दिशा में रखें।
6. मकान दुमंजिला हो तो पानपी की टंकी दक्षिण पूर्व दिशा में रखें।
7. घड़ी बंद होते ही शीघ्र से शीघ्र उसे बनवा कर या नई रख कर चालु हालत में रखें। 
8. घर में केवल सफेद, आसमानी या हरे रंग का प्रयोग करें।
9. कार का पोर्च दक्षिण पूर्व दिशा में रखें। 
10. घर के मुख्य द्वार को बेलबूटों व सुन्दर, मनभावन चित्रों से अलंकृत करके रखें। 
11. बच्चों का कमरा उत्तर दिशा मे रखें।
12. घर के मुख्य द्वार के दोनों और खिड़कियां अवश्य रखें।
13. गुसलखाना और शौचालय संयुक्त ना बनवा कर अलग अलग बनवायें।
14. मकान का दक्षिणी भाग उत्तरी भाग की अपेक्षा उँचा रखें।