योग विद्या का चमत्कार

असम के सिलचर जिले मे 20वीं सदी के पांचवे और छठे दशक मे विधानचन्द्र गोगोई नामक एक प्रसिद्ध योग सिद्ध पुरूष रहते थे वे अवधूत साधना से योग साधना मे आये थे उनके विषय मे मशहूर था कि वे अपनी विद्या द्वारा मृत व्यक्तियो को प्रत्यक्ष दिखला देते थे रात की सूनी घडियों मे आकाशगमन कर भी लेते थे मनचाही सुगंधे अपने आस पास पैदा कर लेते थे उनमे दूसरो के मन का हाल बात जान लेते की अद्भुद क्षमता थी सिलचर के कर्नल विवेक मुखर्जी जैसलमेर में भारत पाक सीमा पर तैनात थे कर्नल मुखर्जी की पत्नी बेला मुखर्जी सिलचर के अर्बे मारलो एवेन्यू मे अपनी सास ससुर के साथ रहती थी कर्नल मुखर्जी के पिता राधाचरण मुखर्जी पेशे से डाक्टर थे पिछलंे दो माह से कर्नल मुखर्जी की कोई खबर बेला को नही मिली थी उनके कई भेजी चिठ्ठियों और फोन काल का भी कोई जवाब नही आया था 20 सितम्बर 1961 की दोपहर बेला गोगोई के पास पहुँची और बोली कि कई दिनो से मुझे मेरे पति की कोई खबर नही मिली है। आप सिद्ध पुरूष है। मै जानना चाहती हूँ कि मेरे पति कहाँ है। और क्या कर रहे है। गोगोई जी पल भर अपनी आंखे बंद किये रहे फिर बोले ठीक है। आप अपना पता लिखा दीजिये कल मै सुबह मै 10 बजे आपके घर पहुँच जाऊँगा और आपको आपके पति के बारे मे जानकारी दूंगा दूसरे दिन 10 बजे गोगोई बेला के घर पहुँचे और उन्होने ड्राईंग रूम मे पड़े कालीन को हटा कर वहाँ चटाई बिछवा दी गोगोई जी चटाई पर लेट कर बोले मै विवेक की खबर लेने जा रहा हूँ चटाई पर केवल मेरा शरीर रहेगा जब तक मै ना लौटूँ कोई मेरे शरीर को ना छुये अन्यथा अनर्थ हो जायेगा सबने देखा कि कुछ समय तक तो उनकी छाती घड़कती रही फिर शरीर शांत हो गया डा. मुखर्जी घबरा गये अरे यह तो मर गये टोटल हार्ट अटैक वे गोगोई की देह की परीक्षा करने को आगे बढे तो बेला ने उन्हें रोक दिया नही पिताजी गोागोई जी ने हमे प्रतीक्षा करने को कहा है पूरे एक घंटे बाद वे उठे डाक्टर मुखर्जी की आखें हैरानी से फैल गई गोगोाई जी ने कहा मै विवेक  को देख आया हूँ वे पूर्णतः सुरक्षित जैसलमेर के एक मंदिर मे है। बेला ने राहत की सांस ली राधाचरण और सास देवयानी को भी चैन मिला पर वे उस मंदिर मे अकेले नही है। उनके साथ एक कामिनी कपूर नाम की सुंदर अविवाहित महिला भी है। उस मंदिर मे दोनो के ेविवाह की तैयारी चल रही है। मुखर्जी परिवार को यह सुन कर भारी अघात लगा इस वज्रपात उन्होने कल्पना भी नही की थी उन्होने भग्न मन से गोगोई जी को विदा किया उस दिन तारीख थी 21 सितम्बर 1961 समय दोपहर 11.30 मिनट। उसी शाम डाक्टर मुखर्जी अपनी पत्नी और बहू के साथ जैसलमेर के लिये रवाना हो गये तीसे दिन सुबह वो जैसलमेर पहुँचे विधानचन्द जी ने असत्य नही कहा था कर्नल मुखर्जी ने सचमुच ही जैसलमेर के एक मंदिर मे कामिनी कपूर से विवाह कर लिया था विवाह की तारीख थी 21 सितम्बर 1961 और समय था दोपहर 11.30 मिनट।