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जुमला और इमला!

गरीबदास भी अजीब तरह के गरीब थे। पैसा, कोडी की तनिक भी लालच नहीं पर डायरी में हर नेता का हिसाब-किताब में माहिर इतने किसने कब क्या कहा, कब कहा, कहां हर बात को लिखने के साथ उस कहे पर क्या हुआ? पडताल करले में उन्हे आनंद अनुभव होता था। गरीबदास को मूकदर्शक मंड़ल का कभी आर्शीवाद मिलता रहा है। मूकर्दाक मंड़ल को मिल रही उपेक्षा से व्यथित होकर तय किया शब्द क्या हथियार हो सकते है? भूमण्डलीकरण के दौर में। गरीबदास पटना में नितीश बाबू के कान में अमरीकी एजेन्सी का नाम फूक आये जिस ने भाजप का राग मालकौश शब्दो के दम पर रचा था। दिल्ली लौटकर सुन मेरे  बन्धु रे... वादे पे तेरे मारा गया कहते व गरीबदास गर्मी की तपन से मुक्ति के लिए उपाय पूछने़ एक सरदार जो है असरदार के घर भरी दोपहरी में पहुंच गये। दिल्ली की उलझी राहो से अन्जान गुजराती पहलवान पर दिन में ही सपनों का जादू सा असर दिलो-दिमाग पर छाया था शब्दो का। गरीबदास ने सवाल कर दिया, रहस्य बरकरार ही रहता शब्द का तो कितना अच्छा रहता पर सर्वोत्तम साजिन्दों की सुरीली धुनें सुनने में खलल पैदा होते देख दाडी खुजलाते अमित शाह ने उसे रुखसत करने के लिए दिल की बात जुवां पर ला कर 15 लाख खाते में आने को चुनावी जुमला कह कर बेडा़ गर्क कर दिया। इतंजार! इतंजार! इतंजार! करते कितनी पीढी खर्च हो चुकी इस देश की स्वराज अब आयेगा, तब आयेगा, कब आयेगा? भरोसा रूसी नेता खुश्चेव का कथन सभी जगह राजनीतिज्ञ एक ही तरह के होते हैं वे वहां भी पुल बनाने का वादा कर देते हैं जहां नदी भी नहीं होती है। एकदम सटीक लगती। यह अलग किस्म का जादू चल रहा था नरेन्द्र मोदी का देश और विदेश में पहले से भीड़ की जुगाड़ कर हो रही थी नैया पार। रोजमर्रा की दुस्वारियों में जी रही जनता के सामने खुलासा किया जाना चाहिये था। भाजपा इस हकीकत को कितना समझती है, यह कहना फिलहाल मुश्किल है. तब के वे दृश्य भीड़ के थे, अब पीछे खामोश, कभी नारे लगाते बैठे महौल बनाते नजर आने वाले आम जन का कितना हुआ वेलकम? आज भी है उन्हें है कोई गम, डायलाॅग है या प्रतिक्रिया ख्वाहिशे सुनी जायेगी, पर सुनी गयी, आँसू झलके पर कह न सके वह गाथा है जो सत्ता की आँखों के सामने अपने ख्यालात रखे या न रखे, दिल्ली में बिहार में वेलेट बाक्स के जिन्न के रूप में निकलेंगे। शब्दो की इमला रटा-रटा कर जो कमाल किया था जुमला कह कर उसे क्षण भर में धोती से रूमाल कर दिया गरीबदास ने जिस भाजप ने अपना राग मालकौश शब्दो के दम पर रचा था उसे उन्ही के शब्दो से ध्वस्त कर दिया। - संकलित


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति