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ज्योतिष और बेरोजगारी

संसार में सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ हजारों लाखों प्रकार के जाॅब विकसित हुये है। परन्तु समस्त जाॅबों को तीन प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है।
1. खेती कारक मंगल व चन्द्र
2. व्यापार कारक बुध, चन्द्र व षुक्र 
3. नौकरी सूर्य मंगल, केतु राहू, 
4. स्वतंत्र या सलाहाकारी कार्य।  
 भारतीय ज्योतिष में दशम भाव से जातक के जाॅब को देखा जाता है। काल चक्र की दशम राशि मकर का स्वामी शनि कर्म कारक माना जाता है। शनि आर्थिक कर्मो सहित अंय सभी प्रकार के कर्मों का कारक है। पाराशर पद्धति मे दशम भाव के चार ग्रह कारक बताये गये हैं। जो वैदिक समाज के चार प्रमुख वर्गों का प्रतिनधित्व करते थे।
 सूर्य क्षत्रिय व शासक वर्ग, गुरू ग्रह ब्राह्मण धार्मिक व शिक्षा व बौद्धिक वर्ग, बुध वैश्य व्यापारी वर्ग और शनि नौकरी पेशा या श्रमिक वर्ग। इसमें शनिगत राशि, उससे 1, 2, 5, 7, 9, 12 भावो के ग्रह मिल कर जातक के जाॅब का निर्धारण करते है। शुक्र धन कारक है। शु़क्र से 11 वें भाव और शनि से 10 वें भाव से जाॅब देखा जाता है। इन भावों के ग्रह योग अपने क्षेत्र मे जाॅब दिलाते है। षनि से 10 वें व 11 वें भाव भी महत्वपूर्ण है। इस विषय पर स्व. आर जी राव ने लघु ग्रन्थ ‘‘प्राॅफेशन फ्राम द पोजीशन आफ प्लेनेट’’ लिखा है। जिसमे बेरोजगारी के निम्न सूत्र बताये है। गोचर मे षनि 10 भाव मे बैठे या देखे षनि 8 वें भाव में हों दषमेष निर्बल, या त्रिक मे या त्रिकेष 10 भाव मे हांे।
1. वृश मे षनि उससे द्वितीय धन भाव खाली तृतीय कर्क मे षनि का षत्रु नीच का मंगल और चतुर्थ में केतु षनि का षत्रु जीवन और कैरियर मे बाधा आये।
2. षनि मंगल युत या षनि से 7 वें मंगल आय कम होगी मिथुन मे षनि स्वामी बुध सिंह के स्वग्रही सूर्य से युत सरकार मे जाॅब मंगल युत या षनि से 7 वें मंगल छोटी नौकरी कम आय।
3. षनि चन्द्र केतु क्रम से सरकार मे चैकीदार होगा।
4. षनि के आगे कई मानो में कोई ग्रह नही कैरियर मे बाधा या सूर्य षनि राहू कैरियर मे बाधायंे। गुरू के आगे कोई ग्रह नही जीवन मे महान व लंबा संघर्श। जातक या पिता रिटायर्ड हो षनि से 12 वें केतु 2 व 7 भाव खाली नौकरी मे भारी संघर्श आये. यदि दषमेष या षनि वक्री नीच या अस्त हो तो जाॅब मे कई बार परिवर्तन होगा तथा दो परिवर्तनों के मध्य अल्पकालीन बेराजगारी आयेगी दषमेष 8 वें भाव मे हो तो जातक खुद कामचोरी या अंय कारणों से बीच मे ही जाॅब छोड़ देगा दषमेष यदि 12 वें भाव मे जाये तो पूर्वजों के षाप के कारण जातक को अपनी योग्यता और मेहनत के मुकाबलें घटिया जाॅब या आय मिले। दषमेष का तृतीय भाव मे जाने से जाॅब मे सस्पेंन्षन या रोग के कारण अल्प अवधि के लिये काम छूटे। षनि केतु या शनि मंगल का योग बेरोजगारी दे मकर राषि सुस्त व निराषावादी राषि है। दषम मे मकर राषि में ग्रह हों हो या मकर राषि मे गये ग्रह चोट, पतन, घाटा, असफलता देगा षनि से 2/12 भाव खाली कैरियर मे स्थिरता ना हो बार बार परिवर्तन होंगे षनि से द्वितीय मे चन्द्र व तृतीय मे केतु जाँब में बाधा ले ले षनि केतु या षनि चन्द्र योग जाॅब मे बाधा व बेरोजगारी दे।
उपाय-
1. रूद्राभिशेक करे।
2. रोज पीपल को जल चढायें।
3. काला तिल या भैंस का दान करे
4. षनिवार का व्रत करें
5. दषरथ कृत षनिस्त्रोत को जप करें।
6. धतूरे की जड़ धारण करें
7. 14 मुखी रूदाक्ष धारण करें।
8. नीलम धारणकरे।
9. मां दुर्गा जी का अर्गलास्त्रोत पाठ करें
10. भगवान गणेष जीकी पूजा करें
11. काल भैरव की पूजा करें
12. हनुमान चालीसा पढें।
13. षनि देव का वैदिक या पौराणिक मंत्र का जप करें।
14. जाॅब स्थल की उत्तरी दीवार को पीले रंग मे रंगवायें पीला रंग गुरू बृहस्पति और कुबेर का रंग पीला है। 


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