सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

क्रिमिनल्स हाॅरोस्कोप

मर्डर समाज की एक नकारात्मक महत्वपूर्ण घटना होते हुये भी दुर्भाग्यवश इस विषय पर ज्योतिष में साहित्य ना के बराबर है। अंग्रेजी में तो फिर कुछ सामग्री मिल जाती है। पर हिन्दी में इस विषय पर ढूढने पर भी कुछ नही मिलता है या मिलता भी है। तो अनुवादित जबकि आदिकाल से आज तक हर देश, हर समाज में हत्यायें होती है। जिनमे कुछ व्यत्तिगत (आपसी रंजिश में) होती है। कुछ समाजिक (जैसे लूटपाट, डकैती में) कुछ राजनैतिक (जैसे राष्ट्राध्यक्ष द्वारा विरोधियों की हत्या या विरोधियों द्वारा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या) यह हिन्दी में इस विषय पर लिखा विश्व का सर्वप्रथम लेख है। हत्या या हत्यारा में सबसे महत्वपूर्ण ग्रह मंगल है। जो हिंसा, चाकू, तलवार, बम गोली, पिस्तौल चोट, घाव, आपरेशन सभी हथियारों का प्रतीक और दैवी जल्लाद है। पापग्रस्त मंगल विशेषतः 3 या 6 भाव में हत्यारा बनाता है। 
1. के.एम. नानावटी- जंम तिथी 2 मई 1922। समय-11. 52 दोपहर। बम्बई। कर्क लग्न में मांदि-19 अंश, कन्या में शनि-9 अंश, राहू-16 अंश, गुरू-18 अंश धनु मे ंमंगल-2 अंश, मीन मे केतु-16 अंश, मेष में सूर्य-18 अंश, बुध-27 अंश, वृष में शुक्र-9 अंश, मिथुन मे चन्द्र-19 अंश। आद्र्रा-चतुर्थ चरण। कार्मिक कन्ट्रोल प्रभाव। केतु का राशि स्वामी गुरू राहू से युत।
2. वीरप्पन-18 जनवरी 1952। 1. 05 दोपहर। गोपीनाथन, कर्नाटक। तुला लग्न में मंगल, वृश्चिक में शुक्र, धनु मे बुध, मकर मे सूर्य, कुंभ में राहू, मीन में गुरू, कन्या में चन्द्र, सिंह में केतु, कन्या में चन्द्र, शनि। कालसर्प योग, ग्रह मालिका योग।
6. हत्यारा इंजीनियर- 5 अप्रैल 1959। 10.12 प्रातः, कानपुर। मिथुन लग्न में मंगल, कन्या में राहू, वृश्चिक मे गुरू, धनु में शनि, कुंभ में चन्द्र, मीन में बुध केतु सूर्य, मेष में शुक्र। 7. हत्यारा मुस्लिम युवक:- 5 जुलाई 1962। 4.52 सायं। कानपुर। वृश्चिक-26 अंश, लग्न मकर में शनि वक्री व केतु, कुंभ में गुरू, वृष में बुध, व मंगल, मिथुन में सूर्य, कर्क में शुक्र व राहू, सिंह मे चन्द्र।
8. हत्यारी पत्नी:- 1 जुलाई 1961। 9.53 रात्रि, 25 उ0 41, 95 पू 13। कुंभ लग्न-11 अंष मे चन्द्र व केतु, मीन में गुलिक, वृष में शुक्र, मिथुन में सूर्य,  बुध, सिंह में मंगल राहू, मकर में गुरू, शनि।
केस 1. काॅवस मानिक शा नानावटी (पारसी) नेवी के वारशिप आई एन एस मैसूर में सेंकेड कैप्टन था उन्होने 1949 में इंग्लैण्ड में सिल्विया सें सिविल मैरिज की थी जिससे उन्हें तीन बच्चे दो बेटे और एक बेटी हुयी थे जनवरी 58 में सिल्विया की मुलाकात नानावटी के एक पुराने मित्र व बम्बई की एक मोटर कम्पनी के 34 वर्षीय मालिक पूर्व विवाहित प्रेम भगवान आहूजा  सिंधी से हुयी जो एक प्लेब्वाय था उसके कई युवतियों से नाजायज संबध थंे सिल्विया के उसके साथ अवैध संबध बन गये लेकिन 5-6 महीने बाद प्रेम सिल्विया से कटने लगा जब कि सिल्विया उसे सच्चा प्यार करती थी 27 अप्रैल 1959 को नानावटी को सिल्विया के द्वारा इस संबध का पता चला उसी दिन उन्होने दोपहर बाद अपने आॅफिस से पाईन्ट 38 की पिस्तौल जारी करवाई और शाम सात बजे आहूजा के घर जाकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी राम जेठमलानी सरकारी वकील तथा कार्ल खण्डेलवाल नानावटी के वकील थे सेशन कोर्ट ने उसे बेगुनाह माना लेकिन हाई कोट्र्र ने उसे दोषी मानकर 8 फरवरी 1060 को आजीवन कारावास की सजा दी ब्लिटज के संपादक आर.के. करंजिया जो खुद पारसी थे के नेतृत्व में पारसी समाज नानावटी के समर्थन में आ गया भारतीय समाज व इंडियन नेवी ने भी नानावटी का समर्थन किया सजा के  विरोध में सैकडों रैलियां हुयी  महाराष्ट्र की गवर्नर प. विजयलक्ष्मी जो पंडित थी ने भारतीय समाज की भावनाओं को देखते हुये नानावटी की सजा माफ कर दी इस माफीनामे पर सिंधी नेता व स्वतंत्रता सेनानी भाई प्रताप तथा प्रेम आहूजा की बहन मेमी आहूजा ने भी लिखित सहमति दी सप्तमेश शनि की राहू युति व पत्नी शुक्र पर राहू की दृष्टि ने उन्हें विदेशी पत्नी दी व पत्नी को भ्रष्ट बनाया शुक्र दो शत्रु ग्रहो सूर्य व चन्द्र से घिरा है। शुक्र मंगल के षष्ठाष्ठक योग व शुक्र से द्वितीय भाव में चन्द्र ने जातक व पत्नी को विवाह में धोखा दिया चन्द्र से 7 वें मंगली दोंष भी है। लग्न पद से तृतीय भाव में सूर्यव छठे भाव में मंादि ने उन्हें शत्रु का हत्यारा बनाया 17 मार्च 64 को जेल से बाहर आये 24 जुलाई 2003 को नानावटी की मृत्यु हो गई। 
2. वीरप्पन-मैसूर और तमिलनाडू का कुख्यात चंदन तस्कर व कई मुखबिरों व पुलिसकर्मियों के हत्यारे का नाम कुसे स्वामी वीरप्पन था मंगल शुक्र के राशि परिवर्तन ने उसे अपार संपति का स्वामी बनाया लग्न व चन्द से त्रिकोण में पाप ग्रह हत्यारा व अपराधी बनाते है। लग्न से त्रिकोण मे दो पाप ग्रह मंगल व राहू व चन्द से त्रिकोण में दो पाप ग्रह शनि व सूर्य ने लग्न व चन्द से त्रिकोण में पाप ग्रह ने उसे हत्यारा बनाया लग्नेश पर गुरू दृष्टि व स्पष्ट बंधन योग के अभाव ने उसे वर्षों मे पुलिस के हत्थे चढने से बचाया। 
3. हत्यारे इंजीनियर के जंमाक में राहू ग्रत राशि। कन्या का स्वामी ग्रह बुघ कार्मिक ग्रह केतु से युत है। तथा षष्ठेश मंगल लग्न में अति क्रोधी व अहंकारी बना रहा है। लग्नेश बुध नीच का दो क्रोधी व घृणा कारक ग्रह सूर्य केतु से युत है। चन्द्र लग्न से षष्ठेश खुद चन्द्रमा चन्द्र लग्न में अति क्रोधी व अहंकारी बना रहा है। 
4. हत्यारी पत्नी के जमांक में शुक्र व मंगल के बीच मे बुध पति के अलावा प्रेमी। शुक्र पहले गोचर में पहले बुध फिर मंगल से निकले जिंदगी में पहले प्रेमी फिर पति आये। सप्तमेश पंचमेश युति प्रेम विवाह दे लग्नेश सप्तमेश सूर्य व शनि परस्पर षष्ठाष्टक पति-पत्नी में शत्रुता दे। चन्द्रमा वायु तत्व की राशि में केतु युत व मंगल राहू दृष्ट हत्यारे के स्पष्ट योग है। मंगल राहू हत्यारा योग तथा जातिका अति अहंकारी हो। षष्ठेश चन्द्र लग्न में हत्यारा योग। लग्न पापकर्तरी में बंधन योग दे।
5. हत्यारा मुस्लिम युवक- केतु ग्रत राशि मकर का स्वामी ग्रह शनि कार्मिक ग्रह केतु से युत है। जो हत्यारा बनाता है। चन्द्रमा अग्नि तत्व की राशि में मंगल दृष्ट हत्यारे होने के स्पष्ठ योग। पंचम भाव प्रेमिका का उससे उसमें मीन राशि स्वामी बाह्मण ग्रह गुरू अतः प्रेमिका ब्राह्मण हो। 11 वां बड़े भाई का भावेश जो वक्री है। जो अल्पायु वक्री होकर धनु मे जाये जहां मंगल से दृष्ट हो हत्या का शिकार हो जाये।
6. हत्यारा पति- 10 सितम्बर 1950। 8.41 सायं। सागर (म.प्र0.) मेष लग्न पचंम मे सिंह में सूर्य-24 अंश, शुक्र-7 अंश, शनि-29 अंश, चन्द्र-5 अंश, कन्या में केतु-5 अंश, व बुध वक्री-29 अंश, तुला मे मंगल-26 अंश, कुंभ में गुरू वक्री-7 अंश, मीन में राहू-5 अंश। जातक के पिता भाई व वह खुद नेता था उसने अपनी कालेज लाइफ मे प्रेम विवाह किया था जो भारी कलह के कारण टूट गया जातक ने एक विधवा से पुर्नविवाह किया नई और पुरानी पत्नी में संपत्ति का विवाद हुआ एक दिन पहली पत्नी रहस्यमय तरीके से मृत पाई गई पुलिस ने इसे हत्यारा मानकर गिरफ्तार किया आरोप सच पाया गया कन्या गत केतु का राशि स्वामी ग्रह बुध केतु युत है। चन्द्र से त्रिकोण मे पापग्रह है। लग्न से पंचमेश व सप्तमेश व परस्पर युत है चन्द्र से पंचमेश व सप्तमेश व परस्पर दृष्ट है। प्रेम विवाह दिया शनि दो स्त्री ग्रह युत व गुरू को दो स्त्री ग्रह युति ने दो पत्नी दी। शुक्र बुध 2-12 में दोनो मे कलह। चन्द्र शनि योग कलह व निराशा दे शुक्र दो शत्रु ग्रह सूर्य व चन्द युत।
7. सौतेली माँ का हत्यारा-25 फरवरी 1985। प्रातः-10.11। कानपुर। मेष लग्न मे चन्द्र व राहू , तुला मे केतु, वृश्चिक शनि, मकर मे गुरू, कुंभ में सूर्य बुध, मीन में मंगल शुक्र। शुक्ल ब्राह्मण युवक ने अपने पिता के साथ मिलकर हत्या की सन् 2001 में जेल गये पिता सस्पैंड हुये बाद में नौकरी मिल गई। लग्न व चन्द्र से त्रिकोण मे पापग्रह है। केतु का राशीश शुक्र कार्मिक ग्रह अष्ठमेश से युत है। जो हत्यारा बनाता है।
8. सगी माँ और 12 साल की बहन का हत्यारा-31 दिसम्बर 1984। मेष लग्न, स्थान, जौनपुर। मेष लग्न वृष में राहू-3 अंश, कर्क में चन्द्र-25 अंश, तुला मे शनि-28 अंश, वृश्चिक मे सूर्य-19 अंश व केतु-3 अंश धनु मे बुध-8 अंश व गुरू-21 अंश, मकर मे मंगल-29 अंश, व शुक्र-29 अंश मीन मे चन्द्र-22 अंश। कायस्थ युवक उसके पिता जौनपुर के डी एम के स्टैनो थे जातक ने अपने पिता के साथ 17 जुलाई 2003 को अपनी माँ बीना और 12 साल की बहन चाँदनी की हत्या कर दी चन्द्र से त्रिकोण मे पापग्रह है। राहू का राशीश शुक्र कार्मिक ग्रह अष्ठमेश मंगल से युत है। जो हत्यारा बनाता है। 
हत्यारा जातक- जंम 26 नवम्बर 1947। साँय-5.29। अक्षांश 18.37 उ0। देशा0 88.55 पूर्व। वृष लग्न में राहू, सिंह मे मंगल शनि, तुला मे बुध, वृश्चिक में सूर्य, केतु, वृहस्पति, धनु मे शुक्र। कार्मिक ग्रह अष्ठमेश गुरू दूसरे कार्मिक ग्रह केतु के साथ युत है। लग्न से त्रिकोण में पापी राहू व चन्द्र से त्रिकोण में मंगल व शनि है। सूर्य मंगल में राशि परिवर्तन है। अतः गुरू, केतु मंगल योग बना जो अहंकारी व हत्यारा बना रहा है। 
हत्यारा पति- 14. 7 जुलाई 1971। समय- 4.29। लखनऊ। धनु लग्न द्वितीय में मकर का राहू, वृष मे शनि मिथुन में शुक्र, कर्क में सूर्य, चन्द्र, केतु, सिंह में बुघ, वृश्चिक में मंगल व गुरू, कार्मिक ग्रह कर्क के केतु का राशि स्वामी ग्रह चन्द्र केतु से युत है। चन्द्रमा अष्ठमेश होने के कारण डबल कार्मिक है। हत्यारा योग दे रहा है। 
हत्यारा पति-2 जुलाई 1963। रात्रि-11. 05। रूड़की कुंभ  लग्न 24 अंश, मीन में गुरू 24 अंश, मिथुन में सूर्य 17 अंश, बुध 4 अंश शुक्र 1 अंश, राहू 27 अंश सिंह में मंगल 23 अंश, तुला में चन्द्र 29 अंश, धनु में केतु 27 अंश, मकर में शनि वक्री 29 अंश। जातिका की पत्नी के अपने पूर्व प्रेमी से संबध थे जातक के एक पुत्री पैदा हुयी थी पुत्री जंम के 24 वें दिन जातक ने पत्नी की हत्या कर लाश नहर मे फेंक दी और पकड़ा गया।
हत्यारा लुटेरा- 4 जून 1975। 3.35 दोपहर, लखनऊ  मेष लग्न-21 अंश वृष मे सूर्य-19 अंश, बुध वक्री-29 अंश, केतु-7 अंश, मिथुन में शनि-24 अंश,  कर्क में शुक्र-4 अंश, वृश्चिे में राहू-7 अंश, मीन में चन्द्र-16, गुरू-24 अंश, मंगल-16 अंश। जातक ने अपने तीन साथियों के साथ बैंक लूटा ओर गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी। 
हत्यारे के ग्रह योग-
1. पापग्रस्त मंगल छठे या तीसरे भाव में या षष्ठेश अति बली हो।
2. त्रिकेशों का अंय शुभ भावों से परिवर्तन हो तथा जातक अति हिसंक व निंदनीय कार्य करे।
3. 12 भाव में दो पापी ग्रह्र या द्वादेश सूर्य व शनि से पापग्रस्त क्रूर व हत्यारा बनाता है।
4. योग कारक ग्रह यदि 8 वें या 12 वें भाव में जाकर पापग्रस्त हो तो क्रूर व हत्यारा बनाता है। 
5. त्रिक भाव में सूर्य, मंगल शनि, मांदि की राहू केतु से युति हो।
6. तृतीय भाव, षष्ठ भाव, तृतीयेश, षष्ठेश व कारक मंगल यदि तीनों पापग्रस्त हों जो जातक तो क्रूर व हत्यारा हो।
7. बुद्धि कारक ग्रह चन्द्र व बुध यदि मंगल राहू या शनि से पापग्रस्त हों तों जातक तो क्रूर व हत्यारा हो।
8. चन्द्र, लग्नेश या बुघ यदि अग्नि या वायु राशियों में जाकर पापग्रस्त हों तो जातक क्रूर व हत्यारा हो।
9. लग्नेश या चन्द्र लग्नेश या योगकारक ग्रह त्रिक भाव में हो तथा उन पर कोई शुभ ग्रह का प्रभाव ना हो व पापग्रस्त हो। 
10. कुछ ग्रह योग भी विशेष परिस्थितियों में हत्यारा बनाते है। जैसे मंगल राहू योग, गुरू शनि राहू योग, मंगल केतु योग, गुरू मंगल राहू या गुरू मंगल केतु योग। सूर्य मंगल राहू योग या सूर्य मंगल केतु योग।
11. फेट एंड फोरचून मैगजीन के संपादक स्व माणिक चन्द्र जैन ने अपने शोघ ग्रन्थ कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट मे इस विषय पर महत्वपूर्ण सूत्र पेश किये हैं। कार्मिक कन्ट्रोल प्लेनेट जातक द्वारा हत्या, या उसकी हत्या या आत्महत्या हेतु जिम्म्ेदार होते है। राहू केतु गत राशियों के स्वामी यदि दोनों या उनमे से कोई एक ग्रह राहू या केतु से युति करे तो जातक हत्या करे या उसकी हत्या हो या आत्महत्या करें। अंय ग्रह योग इसका फैसला करेंगें। राहू केतु, वक्री ग्रह, अष्ठमेश, नेप्चून, यूरेनस व प्लूटो कार्मिक  कन्ट्रोल प्लेनेट है? यदि ये परस्पर युति या दृष्ट या उनके राशि स्वामी यदि अंय कन्ट्रोल प्लेनेट से युति करें तो जातक हत्यारा होगा
12. षष्ठेश लग्न में हत्यारा या अति हिंसक बनाये। अष्ठमेश का लग्न में जाना जातक की खुद की हत्या होना बताता है। 
13. स्वर्गीय बी.वी. रमन की एस्ट्रोजिकल मैगजीन के 1975 के अंक में बुलिंग्स एच हगिंग्स ने तीन किश्तों में एक शोध लेख हाॅरोस्कोप आॅफस क्रिमिनल्स लिखा था उनके अनुसार लग्न या चन्द्र से त्रिकोण में पापग्रह जातक को  हत्यारा व अपराधी बनाते है। यह सिद्धान्त अनुभव सिद्ध हुआ। 
14. 12 भाव में दो पापी ग्रह्र हो तथा द्वादश भाव या द्वादेश पाप ग्रहों से युत या दृष्ट हो या द्वादश भाव या द्वादेश पापकर्तरी में हो तो जातक हत्यारा हों।
15. लग्न या चन्द्र लग्न पर मंगल, केतु, षष्ठेश की युति या दृष्टि हो तथा चतुर्थ भाव या चतुर्थेश पर हिसंक ग्रह मंगल, राहू, शनि केतु की युति या दृष्टि हो। 
16. यदि मंगल लग्नेश होकर षष्ठेश, लाभेश या केतु से संबध बनाये।
17. 12 वें भाव मे चन्द्र राहू योग हो। या जंमाक मे मंगल, शनि राहू की युति हो।
18. 12 वें भाव मे वृश्चिक राशि में केतु मंगल, शनि की युति हो।
19. षष्ठेश व द्वादेश परस्पर युत या दृष्ट हो।
20. जंमाक मे सूर्य, शनि मंगल या सूर्य, गुरू मंगल की युति हो। 
21. सूर्य नीच का हो व तथा गुरू नीच का होकर पाप युत हो। 
22. चन्द्रमा पाप या शत्रु राशि (1, 3. 6. 7. 8, 10, 11)  में जाकर सूर्य व मंगल ग्रहों से युत या दृष्ट हो या पापकर्तरी में हो। 
23. स्व. जगन्नाथ भसीन के अनुसार यदि लग्नेश, लाभ्ेाश तृतीयेश संयुक्त रूप से छठे भाव या षष्ठेश से युति या दृष्टि का संबध बनाये।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति