सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

मेरा रंग दे बसन्ती चोला

यह लेख श्रद्धान्जली है, आजादी के उन परवानों को जो देश को गुलामी की जंजीरो से आजाद करवाने मे वतन पर कुरबान हो गये, जिन्होंने अपने खून से देश की तारीख में आजादी लिख दी। और अपनी शहादत से मुल्क का इतिहास लिख दिया नीचे कुछ देश के क्रान्तिकारियों तथा अमर शहीदो की कुण्डलियां दी जा रही है। 
1.रानी लक्ष्मी बाई-
रानी लक्षमी बाई का जंम मोरोपंत तांबे व माता भागीरथी बाई के घर संवत् 1891 कार्तिक कृष्ण चर्तुदशी तदनुसार 19 नवम्बर सन् 1835 को वाराणसी मंे तुला लग्न में हुआ था उनका असली नाम मणिकर्णिका था चार वर्ष की उम्र मे उनकी माता का निधन हो गया 14 वर्ष की उम्र में उनका विवाह झांसी नरेश गंगाधर राव से हुआ था उस समय राजा साहब की उम्र करीब 49 वर्ष की थी संवत् 1908 अगहन सुदी एकादशी (4 दिसम्बर सन् 1851) को उनके पुत्र का जंम हुआ जिसका नाम दामोदर रखा गया तीन माह बाद मार्च 1852 के तृतीय सप्ताह मे बालक की मृत्यु हो गई 19 नवम्बर 1853 को राजा साहब ने दामोदर नामक एक बालक को गोद लिया और 21 नवम्बर 1853 को राजा साहब का देहान्त हो गया 14 मार्च 1854 को झांसी का राज्य जब्त कर लिया गया जून 1857 को क्रान्तिकारियों से हार कर सागर के कमिश्नर मालकम ने रानी साहिबा को झांसी पर राज्य करने की अनुमति दे दी। 18 जून  1857 को ग्वालियर युद्ध मे सूर्यास्त के बाद सोनरेखा नाले के आगे रानी साहिबा की कथित मृत्यु हो गई। संवत् 1915 को ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी को सूर्यास्त के बाद महारानी का कथित देहान्त हो गया। 
 मार्च 1952 मे उस समय रानी का पंचमेश शनि गोचर मे मेष मे नीच का था राहू मिथुन से और गुरू वृश्चिक से निकल रहा था राहू संतान भाव पंचम से अष्ठम मृत्यु भाव का स्वामी बुघ से त्रिकोण से निकल रहा था 21 नवम्बर 1853 को राजा साहब का देहान्त हो गया उस समय गोचर मंे शनि राहू युति वृष मे गुरू शुक्र धनु से और केतु बुध सूर्य वृश्चिक से निकल रहे थे। जमंाक मे गुरू और शुक्र मे राशि परिवर्तन है अतः गुरू धनु और  शुक्र वृष मे माना जायेगा पति की आयु द्वितीय भाव से देखी जाती है। द्वितीय भाव सप्तम से अष्ठम है। राजा साहब की मृत्यु के समय केतु द्वितीयेश मंगल से त्रिकोण से निकल रहा था जो पति की मृत्यु देता है। राहू के उपर से राहू व केतु से केतु निकल रहा था और जो दुर्भाग्य देता है। तथा केतु द्वितीय से निकल रहा था जो पति की आयु का भाव है। महारानी का अंतिम युद्ध ग्वालियर मे 18 जून 1958 को सूर्यास्त के बाद वृश्चिक लग्न में हुआ था जो उनकी मृत्यु का समय बताया जाता है। उस दिन संवत् 1915 ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की सप्तमी थी रानी साहिबा के जमंाक का लग्न व चन्द्र से अष्ठमेश शुक्र तृतीय मे ना केवल विपरीत राजयोग बना रहा है। बल्कि वह आयु कारक शनि से दृष्ट भी है। अष्ठमेश का विपरीत राजयोग गंभीर रोग, दुर्घटना वा हमले से उबार ले जाता है। रानी जी की पत्री मे अष्ठमेश शुक्र तृतीयेश गुरू मे स्थान परिवर्तन है। यह योग दीर्घायु देता है अतः शुक्र अष्ठम मे स्वग्रही माना जायेगा स्वग्रही अष्ठमेश भी दीर्घायु देगा युद्ध के उपरान्त उनके जीवित रहने का प्रमाण राजस्थान की प्रतापगढ रियासत मे मिला है। जहां के राजा से उन्होने 1958 मे शरण मांगी थी लेकिन अंग्रेजों के डर से वहां के राजा ने महारानी को शरण देने से इन्कार कर दिया था शुक्र अष्ठम मे स्वग्रही माना जायेगा स्वग्रही अष्ठमेश भी दीर्घायु देगा युद्ध के उपरान्त उनके जीवित रहने का प्रमाण राजस्थान की प्रतापगढ रियासत मे मिला है। जहां के राजा से उन्होने 1958 मे शरण मांगी थी लेकिन अंग्रेजों के डर से वहां के राजा ने महरानी को शरण देने से इन्कार कर दिया था।
2. वीर सावरकर- 
 भारत के अद्वितीय क्रान्तिकारी वीर दामोदर विनायक सावरकर का जंम 28 मई 1883 को रात्रि-9: 25 को महाराष्ट्र के नासिक जिले मे हुआ था उन्होंने लंदन मे प्रवासियों को क्रान्ति के लिये प्रेरित किया उनकी ही प्रेरणा से मदन लाल ढींगरा ने जलियांवाला बाग के हत्यारे जनरल डायर को मारा था उन्हें अंग्रेजों ने डबल आजीवन कारावास की सजा दी थी उन्हें काला पानी की सजा देकर अंडमान की सेक्यूलर जेल मे भेजा था उनका जमांक इस तरह है। धनु लग्न कुंभ मे चन्द्रमा, मेष मे केतु शुक्र व मंगल वृष मे सूर्य, शनि व बुध मिथुन मे गुरू व तुला मे राहू।
3. चन्द्रशेखर आजाद-
 चन्द्रशेखर आजाद का जंम श्रावण सुदी द्वितीया सोमवार को दिन मे दो बजे हुआ था तदनुसार 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की अलीपुरा रियासत के भाँवरा गांव मे हुआ था उनके पिता का नाम सीताराम तिवारी और माता का नाम जगरानी देवी था उनका जमांक इस तरह है। वृश्विक लग्न मकर मे केतु, कुंभ मे वक्री शनि, मिथुन मे गुरू, कर्क में राहू, मंगल, सूर्य बुघ, चन्द्र सिंह मे शुक्र।
4. नेताजी सुभाश चन्द्र बोस:-
 आजाद हिन्द फौज के संस्थापक व स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जंम 23 जनवरी 1897 को दोपहर 12.15 मिनट पर कटक मे मेष लग्न मे हुआ था। लग्न मेष द्वितीय भाव मे वृष का मंगल वतुर्थ भाव मे कर्क का केतु पंचम मे सिंह का गुरू छठे भाव मे कन्या मे चन्द्र आठवे भाव मे वृश्चिक का शनि दशम भाव मे मकर का सूर्य, राहू व बुध, मीन मे शुक्र था। नेताजी के आठवें भाव मे शनि तथा अष्ठमेश मंगल अपनी राशि को पूर्ण दृष्टि से देख रहा था महर्षि पाराशर के अनुसार उपरोक्त दोनों योग दीर्घायु होने के है इसी बात की पुष्टि 1999 में गठित मुखर्जी आयोग के जस्टिस मनोज मुखर्जी ने भी की थी कि सुभाष बाबू विमान दुर्घटना मे नही मरे थे जनवरी 2010 को टी वी चैनल आज तक मे दियेे एक इन्टरव्यू मे जस्टिस मनोज मुखर्जी ने कहा कि यद्यपि कोई कानूनी सबूत नही फिर भी मुझे सौ फीसदी यकीन है। कि फैजाबाद के गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे।
5. शहीदे आजम भगत सिंह:-
 शहीदे आजम भगत सिंह का जंम 27 सितंम्बर 1907 को लायलपुर जिले के बांगा गांव में रात्रि 9ः32 मिनट पर हुआ उनका जंमाक इस प्रकार है। वृष लग्न, वृष मे चन्द्र, मिथुन मे राहू , कर्क मे गुरू, कन्या मे षुक्र, बुध, सूर्य, धनु मे मंगल केतु, मीन मे वक्री शनि। उनके पिता नाम किशन सिंह तथा माता का नाम विद्यावती था 23 मार्च 1931 (चैत शुक्ल चतुर्थी़) को लाहौर मे रात्रि 7 बजे कन्या लग्न मे उनको दो अन्य साथियों राजगुरू और सुखदेव के साथ फाँसी पर चढा दिया।
6. मंगल पांडे- 
 ईस्ट इंडिया कम्पनी के फौजी कागजातों के अनुसार मंगल पाण्डे का जंम फैजाबाद के अकबरपुर तहसील के एक गांव मे 19 जुलाई 1827 षाम-6 बजेे मकर लग्न मे हुआ था को हुआ उन्होने 22 वर्ष की उम्र मे ईस्ट इंडिया कम्पनी की फौज मे नौकरी शुरू की थी वे 34 वी बंगाल नेटिव इन्फैन्टरी की पांचवी कम्पनी मे सिपाही थे। 29 मार्च 1857 को उन्होने चर्बी लगे कारतूसों के इस्तेमाल को लेकर उन्होने फौज मे विद्रोह किया और अपने अधिकारी को मार की खुद आत्महत्या करने का प्रयास किया वे पकड़ गये उन पर सैनिक अदालत मे मुकदमा चला और 8 अप्रैल 1857 चैत शुक्ल चर्तुदशी को उनको फाँसी दे दी गई। उनका जमांक इस प्रकार है। मकर लग्न चतुर्थ मे मेष केतु पंचम मे वृष मे उच्च का चन्द्र, मिथुन मे शुक्र व शनि, 7 वें कर्क मे सूर्य व नीच का मंगल, 8 वें सिंह मे बुध, नवम मे कन्या मे गुरू, 10 वें तुला मे राहू।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति