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नेपाल राजघराने विनाश की भविष्यवाणी

1 जून 2001 की रात 11 बजे को नेपाल के युवराज दीपेन्द्र वीर विक्रमशाह ने शाही महल नारायन पैलेस मे अपने प्रेम विवाह के मामले को लेकर अपने पिता महाराज वीरेन्द्र विक्रमशाह देव, महारानी ऐश्वर्या, युवराज निरंजन, राजकुमारी श्रुति, राजकुमारी शांति, व राजकुमारी शारदा, राजकुमारी शारदा के पति कुमार विक्रमशाह और जयन्ती शाह की हत्या कर दी, और महल के शिव मंदिर मे खुद को गोलीमार कर आत्महत्या कर ली। युवराज के विवाह को लेकर कई दिनों से राजकुमार का अपने से परिवार से विवाद चल रहा था राजकुमार महाराजा के विरोधी नेपाल के राणा परिवार की राजकुमारी देवयानी राणा से विवाह करना चाहते थे जबकि महाराज उनका विवाह अन्य लड़की से करवाना चाहते थे। महाराजा को युवराज के विवाह से संबधित एक पुरानी भविष्यवाणी परेशान कर रही थी। नेपाल के राज ज्योतिषी ने बताया था कि युवराज दीपेन्द्र की कुण्डली मे वंश वध का योग है। और उनका विवाह किसी भी हालत मे 35 साल से पूर्व नही करें। यदि विवाह 35 साल से पूर्व किया गया तो महाराज की मृत्यु निश्चित है। उपरोक्त भविष्यवाणी पूर्णरूप से सत्य सिद्ध हुयी नेपाल मे प्रचलित एक 230 पुरानी भविष्यवाणी के अनुसार नेपाल का राजपरिवार एक साधु के शाप से अभिशप्त है नेपाल राजवंश का दुःखद अंत निश्चित था नेपाल में शाह वंश की स्थापना महाराजा पृथ्वी नारायण शाह ने 1768 मे की थी। और कई राज्यों मे बंटे नेपाल को एकता के सूत्र मे बांधा था। कहा जाता है कि महाराजा एक बार काठमांडू घाटी की ओर जा रहे थे तो उन्हें सिद्ध गुरू गोरखनाथ मिल गये। महाराज ने उनको दही भेंट की। साधु ने वो ही पीकर पुनः उगल कर राजा को वापस कर दी इससे पृथ्वी नारायन नाराज हो गये और उन्हांेने दही को जमीन पर फेंक दिया जिससे उनके दोनांे पैर सन गये। साधु को यह नागवार गुजरा उसने राजा के अभिमान की निंदा करते हुये कहा कि यदि तुम मेरा प्रसाद ग्रहण कर लेते तो तुम्हारी हर मनोकामना पूरी हो जाती। साधु ने शाप देते हुये कहा कि राजा के पैरो के दसों उंगलियों पर गिरी दही का अर्थ है। कि उनका वंश 10 पीढियों बाद समाप्त हो जायेगा। राजा वीरेन्द्र विक्रमशाह देव राजवंश की 11 वीं पीढी मे थे। काठमंाडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और प्रख्यात ज्योतिषी मिलनशाक्य के अनुसार इस भविष्यवाणी का नेपाल के इतिहास मे प्रमुख स्थान है। उनके अनुसार हत्याकांड की दुःखद घटनायें 230 वर्ष पुरानी भविष्यवाणी से उपजी है। भविष्यवाणी सौ फीसदी सत्य हुयी और नये राजा विक्रम ज्ञानेन्द्र सिंह के शासन काल मे प्रजा ने नेपाल में राजशाही के खिलाफ आंदोलन चलाया और नेपाल मे प्रजातांत्रिक शासन की स्थापना हुयी।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति