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लोक नृत्य प्रस्तुत कर बच्चो ने सभी का मन मोहा

मदर टेरेसा ग्रुप आफ स्कूल्स का वार्षिकोत्सव फिरोज गाधी नगर पार्क में धूम-धाम के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के.एल. शर्मा विषिष्ट अतिथि रमेष बहादुर सिंह एवं विद्यालय के संस्थापक प्रबन्धक ओ.पी. श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उप प्रबन्धक धीरज श्रीवास्तव एडवोकेट ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ इसके बाद सत्यम, षिवम, सुन्दरम्, पापा की परी हूं मै, गलती से मिस्टेक, बुमरो-बुमरो, राधे-राधे, जोगाड़ा तारा, तेरी मिट्टी में मिल जावां एवं गड़वाली गुजराती मराठी राजस्थानी पंजाबी, आदि गीतों पर बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर सभी दर्षकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर विद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया है। सर्वश्रेष्ठ षिक्षक का पुरस्कार अरविन्द सिंह सर्वश्रेष्ट सहयोगी षिक्षक का पुरस्कार बृजेष श्रीवास्तव एवं निखिल सिंह को दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने कहा कि मदर टेरेसा विद्यालय ने रायबरेली के बच्चों को बेहतर षिक्षा प्रदान कर समाज को एक बेहतर युवा दिये हंै, यहां के अनुषासन से मै प्रभावित हूं मै बच्चो के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं। इस अवसर पर विषिष्ट अतिथि रमेष बहादुर सिंह ने षिक्षा के महत्व को बताते हुए कहा कि किसी समाज एवं देष का विकास बेहतर षिक्षा के बगैर सम्भव नही है। मै आषा करता हूं कि मदर टेरेसा विद्यालय इस दिषा में बेहतर से बेहतर षिक्षा देकर देष की उन्नति में अपना योगदान देगा। विद्यालय के संस्थापक व प्रबन्धक ओ.पी. श्रीवास्तव ने कहा विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ठ प्रदर्षन कर विद्यालय का नाम रोषन करते रहे है, मै विष्वास दिलाना चाहता हूं कि संस्थान के बच्चे आगे भी सभी क्षेत्रो में उत्कृष्ठ प्रदर्षन करते रहेगें। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सरला श्रीवास्तव, श्रीमती कविता अवस्थी, श्रीमती रुचि श्रीवास्तव, डा. मधुलिका श्रीवास्तव जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंकज तिवारी, रोहित सिंह, निर्मल शुक्ल, श्रेष्ट तिवारी, अजय कुमार खरे, सईदुल हसन लालआस किरन प्रताप सिंह आनन्द गुप्ता, षिवानन्द मौर्य, रजनीष त्रिवेदी, हिमाषी सिंह, प्रिया तिवारी, जी0एल0 सिंह, नीलम पाण्डेय आकांक्षा तिवारी, निषा सिंह, निषा मौर्या सीता शुक्ला, संतोष अग्रहरि अनीता खत्री, अरूण श्रीवास्तव, ममता शुक्ला, राकेष कुमार, महेन्द्र मौर्य आदि विद्यालय के छात्र-छात्राएं, षिक्षक एवं बड़ी संख्या अभिभावकगण उपस्थित रहे।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति