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तस्करी करने वाले अंतर्जनपदीय गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार

जनपद आजमगढ़ की पुलिस ने दो वाहन स्कार्पियो व बोलेरो से अवैध शराब और गांजा की तस्करी करने वाले अंतर्जनपदीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में गाजा और अवैध शराब बरामद किया। जिसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई। वहीं पांच फरार तस्करी करने वाले की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम लगाई गई।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि होली के त्यौहार के मद्देनजर जिले के पवई थाने की पुलिस टीम अवैध शराब कारोबारियों के लिए क्षेत्र में भ्रमण कर रही थी। इसी दौरान अहरौला थाने की पुलिस आबकारी टीम के साथ पहुंची। पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त टीम ने नाटी स्थिति सफिक भट्टे के पास सघन चेकिंग अभियान चला रही थी तभी एक स्कार्पियो वाहन आता देख जब टीम ने रोकने का प्रयास किया तो वाहन को मोड़ कर भागने की कोशिश करने लगे लेकिन पुलिस टीम ने चार व्यक्तियों को मौके से पकड़ लिया। पुलिस ने वाहन से कुल 23 पेटी अवैध शराब 1104 शीशी व 10 किलो अवैध गांजा बरामद किया। जिसकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए एक आरोपी के घर से पुलिस ने 5 किलोग्राम गांजा बरामद किया। गिरफ्तार आरोपियों में इंद्रजीत यादव निवासी खानपुर थाना अहरौला सचिन यादव निवासी बुढ़ापुर कुतुबअली थाना दीदारगंज, संतोष कुमार निवासी बसही असरफपुर थाना पवई पंकज यादव निवासी मसैसा थाना शाहगंज जौनपुर शामिल है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी काफी समय से अवैध शराब और गाजा की तस्करी करते थे। पुलिस की टीम फरार तस्करों की गिरफ्तारी में जुटी है।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

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