भारतवंशी सूरीनाम के राष्ट्रपति चुने गए

चन्द्रिका प्रसाद संतोखी जो चान संतोखी के नाम से लोकप्रिय है, राष्ट्रपति पद का आम चुनाव 25 मई को सूरीनाम में हुआ जिस समय पूरी दुनिया कोरोना संक्रमण के दौर से गुजर रही थी उस समय सूरीनाम में चुनाव हुआ। सूरीनाम में भारतीय लोग गन्ने की खेती के लिए अंग्रेजो द्वारा ले जाए गए थे। चुनाव में मुख्य मुकाबला सत्ता में बैठे पार्टी और विपक्ष की पार्टी वीएचपी के मध्य था जिसके उम्मीदवार भारतीय मूल के संतोखी जी थे। संतोखी जी पुलिस कमिश्नर पद से सेवा मुक्त होने के बाद राजनीत में आये। वो एक लोकप्रिय पुलिस आफिसर रहे थे और एक राजनेता के रूप में वो और भी लोकप्रिय हो गए। कुशल प्रशासक, मृदुभाषी, हँसमुख स्वभाव के संतोखी जी जनता के बीच बहुत ही प्रिय नेता है न केवल भारतीयों के ही बीच बल्कि अफ्रीकन मूल के लोगो के बीच क्योकि संतोखी जी एक न्याय प्रिय व्यक्ति है जिसकी झलक उनके कार्यो में दिखती है । 
संतोखी जी से मेरी पहली भेंट मार्च 2017 में हुई और भारत के प्रति उनका अपार लगाव उनकी बातो में साफ साफ झलकता है। उनके पूर्वज भारत से गन्ने की खेती के लिए मजदूर के रूप में 100 साल पहले गए थे। संतोखी जी भारत से और मजबूत रिश्ता बनाना चाहते है। मेरी दूसरी भेंट जनवरी 2018 में दिल्ली में हुई। बहुत सी राजनीतिक चर्चाओं के अलावा भारत से कैसे और रिश्ते प्रगाढ़ हो उस पर भी चर्चा हुई।
संतोखी जी के राष्ट्रपति बनने से भारत और सूरीनाम के रिश्ते तो प्रगाढ़ होंगे ही सांस्कृतिक रिश्ते भी मजबूत होंगे। सूरीनाम प्राकृतिक संसाधन में बहुत धनी है वहाँ खनिज, सोना और तेल का अच्छा भंडार है। वहाँ की जंगली लकड़ी बहुत ही अच्छी किस्म की है जिसकी बड़ी मांग है दूसरे देशो में। भोजपुरी सूरीनाम में लोकप्रिय भाषा है, भारतीयों द्वारा आपस में भोजपुरी में ही बात चीत होती है। भारतीयों ने अपनी संस्कृति को बचा कर रक्खा हुआ है, शुभ अवसर पर भारतीय व्यंजन ही बनता है भारतीय परिधान ही पहने जाते है। पौने छे लाख की जनसंख्या वाले देश में पहले भारतीय 37 प्रतिशत थे लेकिन वहाँ से दूसरे देशो में चले गए जिससे आज लगभग 27 प्रतिशत भारतीय सूरीनाम में है। सूरीनाम नीदरलैंड (हॉलैंड) का उपनिवेश था इसलिए बहुत से सूरीनामी नीदरलैंड में बस गए इसी कारण डच भाषा वहाँ पर लोगो द्वारा बोली जाती है। 3-4 पीढ़ी बीतने के बाद भी भारत वंशियो में भारत के प्रति खूब लगाव है। भारतीय गीत खूब सुने व् गाये जाते है, पूजा-पाठ, शादी की रश्म बिलकुल भारत की तरह ही होता है आप सूरीनाम के मंदिर में जाएंगे तो आपको ये लगेगा ही नहीं की भारत से हजारो किलोमीटर दूर है।