उर्वरक विक्रेताओ को शासन के निर्देश

खरीफ अभियान 2020 में कृषकों को गुणवत्ताायुक्त रसायनिक उर्वरकों की समय से निर्धारित दर पर उपलब्धता सुनिश्चित कराना शासन की प्राथमिकता के आधार पर जनपद के समस्त संस्थागत, सहकारी एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया जाता है कि अपना विकी केन्द्र प्रतिदिन समय से खुला रखकर कृषकों को उनकी पहचान व जोत को ध्यान में रखकर पी0ओ0एस0 मशीन के माध्यम से ही उर्वरकों की विक्री सुनिश्चित करें तथा पी0ओ0एस0 मशीन से निर्गत होने वाली पर्ची उसी समय सम्बन्धित कृषक को प्राप्त कराव.ें। उर्वरकों का क्रय अपने प्राधिकार पत्र में अंकित स्रोत से ही करें जिसका बिल/इनवाईस अपने प्रतिष्ठान पर रखें साथ ही अधोहस्ताक्षरी कार्यालय द्वारा प्रमाणित अपने स्टॉक व विकी रजिस्टर में प्रतिदिन उर्वरकों का क्रय.विक्रय अंकित करें, अपने उर्वरक प्रतिष्ठान पर स्टॉक बोर्ड, रेट बोर्ड के साथ ही अपनी फर्म का नाम व मोबा.इल नम्बर का अंकन करते हुये बोर्ड अवश्य प्रर्दशित करें जिससे यह पता चले कि यहाँ पर उर्वरक की दूकान/गोदाम है। थोक उर्वरक विकेताओं को भी निर्देशित किया जाता है कि वह फुटकर उर्वरक विकेताओं को आपूर्ति की जाने वाली उर्वरकों की मात्रा का अंकन अपने समक्ष सम्बन्धित की पी0ओ0एस0 मशीन व स्टॉक रजिस्टर में दर्ज कराने के पश्चात ही उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करें। यदि किसी फुटकर विकेता द्वारा पी0ओ0एस0 मशीन का संचालन व स्टाक/विक्री रजिस्टर का नियमित रख-रखाव नही करता है तो उसकों उर्वरकों की आपूर्ति कदापि न करें साथ ही ऐसे विक्रेताओं के प्राधिकार पत्र निरस्त करने हेतु सूची जिला कृषि कार्यालय को उपलब्ध करावें। थोक विक्रेता फुटकर विक्रेताओं को उर्वरकों की आपूर्ति पर्याप्त रिटेलर मार्जिन के साथ सुनिश्चित करें तथा मुख्य उर्वरकों यूरिया, डी0ए0पी0एम0ओ0पी0 व एन0पी0के0 उर्वरकों के साथ कम प्रचलित अन्य कोई उत्पाद जिंकसल्फेट, माइक्रोमिक्चर, फेरस सल्फेट, सल्फर अथवा अन्य कोई भी उत्पाद की टैगिंग कदापि न किया जाये। यदि कोई कम्पनी अथवा डीलर द्वारा ऐसे कम प्रचलित उत्पादों की जबरन टैगिंग का कोई मामला संज्ञान में आता है तो सम्बन्धित के विरूद्ध कठोर विधिक कार्यवाही सम्पादित की जायेगी। 
 समस्त संस्थागत, सहकारी एवं निजी खुदरा विक्रेता, समस्त थोक उर्वरक विक्रेता उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई के साथ अनुपालन सुनिश्चित करें अन्यथा उर्वरक दूकानो/गोदामों के निरीक्षण के दौरान निर्देशों का अनुपालन न पाये जाने पर सम्बन्धित विकेता/संस्था के विरूद्ध उर्वरक नियन्त्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत कठोर विधिक कार्यवाही सम्पादित की जायेगी जिसके लिये वह स्वतः उत्तरदायी होगे।