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हृदय सुरक्षित तो जीवन सुरक्षित


देवती वी.के. मेमोरियल मेडिकल एवं कार्डियक सेन्टर रायबरेली के हृदय रोग विशेषज्ञ एवं फिजिशियन डा. मनीष मिश्र ने बताया कि विश्व के लोगों को हृदय रोग के प्रति जागरूक करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2000 में हर साल विश्व हृदय दिवस को मनाने का निर्णय लिया। पहले इसे सितम्बर के अंतिम रविवार को विश्व हृदय  दिवस के रूप में मनाया जाता था। लेकिन 2014 से इसे 29 सितम्बर के दिन ही मनाये जाने का निर्णय लिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय रोग हर साल 17.7 मिलियन लोगों की जान लेता है। जो विश्व में 31 प्रतिशत मृत्यु का कारण है। तथा वर्ष 2030 तक इन आंकड़ो में 23 मिलियन की वृद्धि होने की संभावना है। 
हृदय रोगियों की संख्या भारत में लगातार बढ़ रही है जोकि चिंता का विषय है। इसलिए अब 30 साल के ऊपर के सभी लोगों केा हाईपर टेंशन और डायबिटीज के स्क्रीनिंग की सलाह दी जा रही है। इसका प्रमुख कारण बदलती लाइफ स्टाइल, जंक फूड और ध्रूमपान है। युवा पीढ़ी का झुकाव इस ओर ज्यादा होने के चलते यह बीमारी कम उम्र में घेर ले रही है।
क्या आप जानते है:-
आपका दिल एक मिनट में 72 बार और 24 घण्टे में 100800 बार धड़कता है। यह एक दिन में 2000 गैलन खून की पम्पिंग करता है। इसलिए शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। 
विश्व हृदय दिवस का उद्देश्य:- इसका उद्देश्य पूरे विश्व के लोगों में हृदय से सम्बन्धित होने वाले रोगों उनके परिणाम व उनके रोकथाम के लिए जागरूक बनाना है। विश्व में हृदय रोेग से होने वाली मृत्यु की दर सबसे अधिक है। 
हृदय किसे कहते है:- हृदय  एक मांसपेशी अंग है जिसके द्वारा हमारे शरीर में वेन्स और आरट्रीज के माध्यम से खून का प्रवाह होता है। अशुद्ध खून जो कि हमारे अंगो से वेन्श के द्वारा हृदय के दाहिने भाग में पहुॅचता है तथा पल्मोनरी आल्ट्री के द्वारा दोनो फेफड़ो में पहुंचता है जहाॅ पर उस अशुद्ध खून का शुद्धीकरण होता है और पल्मोनरी वेन्स के द्वारा बाये हृदय  में पहुॅंचता है फिर अओर्टाके माध्यम से शुद्ध खून सारे अंगो तक पहुंचता है। 
हृदय  रोग के प्रकार:- हृदयघात (हार्ट अटैक), रूमेटिक हृदय  रोग, कन्जेनाइटल हृदय रोग (जन्मजात), हार्ट फ्लयोर, कार्डिमायोपैथी इत्यादि।
हृदय  रोग के प्रमुख कारण:- 
1. उच्च रक्तचाप (हाईपर टेंशन), 2. मधुमेह (डायबेटीज), 3. डिसलिपिडीमिया, 4. धू्रमपान एवं अत्यधिक शराब का सेवन करना, 5. परिवार में हृदय रोग का इतिहास, 6. अत्यधिक मोटा होना, 7. उच्च वसायुक्त आहार, 8. तनाव, 9. व्यायाम की कमी।
दिल का दौरा पड़ने के संकेत:- सीने में दर्द तथा जबड़े, गर्दन, पीठ में दर्द, हाथ या कंधे में दर्द फैलना, सांस में तकलीफ होना, पसीना आना, मचली या उल्टी होना, चक्कर आना, घुटन होना, बेचैनी होना, नाभी के ऊपर के भाग में दर्द तथा सिर के पीछे (अक्सीपिटल) तक कही पर दर्द होना।
हृदय को स्वस्थ बनाये रखने के लिए सुझाव:- 1. कम वसा एवं उच्च रेसा युक्त आहार जैसे कि साबूत अनाजो और फलो और सब्जिओं का सेवन करें।
2. तम्बाकू एवं ध्रूमपान का सेवन करने से बचे।
3. शराब का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से हृदय रोग का जोखिम को 30 प्रतिशत कम किया जा सकता है।
4. यदि आपका वजन ज्यादा है तो अपने शरीर के वसा को कम करें। 
5. प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम अवश्य करें।
6. नमक का सेवन कम करें।
7. ब्लडप्रेशर, डायबेटीज और कोलेस्ट्राल को नियंत्रित रखें।
8. तनाव मुक्त जीवन जीये। तनाव अधिक होने पर योगा करना लाभकारी होता है और हमेशा खुद को खुश करने की कोशिश करें। 
9. पर्याप्त नींद ले लगभग 8 घण्टे के प्रतिदिन नींद जरूरी है। 
10. पैक्ड या प्रसंस्कृत आहार जैसे की डिब्बाबंद, जमे हुए खाद्य पदार्थो से बचे। 


 


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