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इश्क के सांचे में ढली गजल का नाम है महक जौनपुरी: डा० नीलिमा मिश्रा

महिला काव्य मंच प्रयागराज इकाई के तत्वावधान में गजल की परिचित शख्सियत मंजू पाण्डेय ‘महक जौनपुरी’’ के कृतित्व पर एक आनलाइन समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें उनके लेखन के विभिन्न आयामों पर प्रयागराज की वरिष्ठ रचनाकारों के मध्य विस्तार से चर्चा की गयी। महक जी बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। आप इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है, महिला उत्पीड़न के मामले में सही न्याय हो इसके लिए आपका विशेष प्रयास रहता है। हाइकोर्ट बार एसोसिएशन में संयुक्त सचिव महिला’ के रुप में आप पदासीन हैं। अब तक आपके दो गजल संग्रह ’महक’ और ’तिश्नगी’ प्रकाशित हो चुके है। महक जी महिला काव्य मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश की अध्यक्षा होने के साथ ही गजल और कवि सम्मेलन के मंचों का जाना पहचाना नाम है। 
प्रयागराज की मशहूर शायरा डा. नीलिमा मिश्रा के लफ्जों में कहें तो इश्क के साँचे में ढली गजल का नाम है आ० मंजू पाण्डेय उर्फ महक जौनपुरी जी की शायरी। हर शेर में लफ्जों को इस तरह से बरता गया है कि ताजगी का अहसास होता हैं, ऐसा लगता है के ताजे गुलाब की महक आपको छू रही हो। एक बानगी देखिए -
’मोहब्बतों से महक रही हूँ, 
बहार बन के मिला करो तुम।’
वरिष्ठ कवयित्री कविता उपाधयाय के अनुसार महक जौनपुरी आज के हालात पर भी पैनी नजर रखती हैं। हर विषय पर उनकी कलम बखूबी चलती है। चीन से आया है वायरस कहीं वह कहती हैं कि जब तक तुम्हारी आंख नम नहीं हो जाती तब तक दर्द का एहसास कैसे हो। संगम का भी बखूबी जिक्र किया है कहीं वह इश्क की नदी बन जाती हैं तो महबूब को समंदर बन जाने की नसीहत भी देती हैं। कुल मिलाकर महक जी एक सरल सुलझी हुई गजल कारा हैं। एक दिन उनकी गजलें फलक पर चमकेगी, ऐसा इनका मानना है। 
प्रेमा राय का कहना है कि,, इनकी गजलों में कहीं इश्क एक गुजारिश है तो कहीं इजहारे मुहब्बत, कहीं एक हिदायत है तो कहीं दर्दे-दिल की आवाज,कहीं शिकायत।
आलोचक और समीक्षक डा सरोज सिंह ने महक जौनपुरी के बारे में बोलते हुए कहा, गजल का अभिप्राय ही महबूब से बात करना है। महक जी की गजलों में शिल्प ही नहीं, तकनीक और संवेदना भी है। उर्दू शायरी में गजल एक सशक्त, मकबूल एवं संवेदनशील विधा है। महक जौनपुरी ने अपनी गजलों में वैश्विक समस्या को प्रमुखता देते हुए वैयक्तिक अनुभूतियों के साथ संगम नगरी को नया आयाम प्रदान किया है।
सुमन ढींगरा दुग्गल जी के अनुसार गजल के नूरानी फलक पर बहुत से सितारे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, उन में मोहतरमा महक जौनपुरी साहिबा भी एक हैं। इन की गजलें संवेदनशील हृदय की पारदर्शी अभिव्यक्ति हैं। रोमान इन की गजलों का स्थायी भाव है। अपनी गजलों में महक साहिबा ने इश्क - मजाजी को जज्बात में खूब पिरोया है रू-
मैं इश्क की नदी बन गई साथिया
आप खुद को समंदर बना दीजिए।
देवयानी ने कहा कि सुख-दुख को सहते हुए मन और न जाने कितनी भावनाओं, जज्बातो के बीच से गुजरता है। महक जी की रचनाओं में हमे ऐसा ही कुछ समन्वय मिला।
महक जौनपुरी के लेखन पर विचार व्यक्त करते हुए डा अर्चना पांडेय ने कहा कि बड़ी आत्मीयता से और सहज अंदाजे बयां से महक की गजलें रूठने और मनाने की बात कहती हैं। महक छोटी बह्र में बड़ी बात कहने में सफल हैं इन्होंने कोरोना, माँ के प्यार आदि को भी अपनी गजलों के दरम्यान तवज्जो दी है।
मीरा सिन्हा ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेरे पास समीक्षा के लिए महक की कुछ गजलें है जिनमें सामयिक विषय भी है, जिसमें प्रियतम से सोशल डिस्टेंसिग का सन्देश भी दिया गया है जो कि कोरोना काल का मुख्य बिंदु है बाकी गजलों का जो विषय प्रेम और विरह होता है वह इनकी गजलों मे बखूब दिखाई देता है इस कार्यक्रम का संयोजन महिला काव्य मंच प्रयागराज इकाई की अध्यक्षा रचना सक्सेना एवं ऋतांधरा मिश्रा ने किया।  


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