मझधार में फंसे चित्रकूटियों को खेवनहार की तलाश

बड़ा मुद्दा

दो प्रांतों की सीमाओं के कारण दर्द है गहरा

जल्द ही होगी बड़ी बैठक, संत भरेगें हुकार

योगी जी ने किया था वादा, शिवराज जी ने दिया था आश्वासन

- संदीप रिछारिया

त्रिदेवों की अरण्य स्थली, सप्तऋषियों की प्रकट भूमि, श्रीराम की तपस्थली, महासती अनुसुइया जैसी ऋषिकाओं के स्नेह से अभिसिंचित पुण्यभूूमि श्रीचित्रकूटधाम को चिंताओं को हरण का केंद्र माना जाता है। विश्व भर से लोग यहां पर आकर अपनी श्रद्धा प्रकट कर कामनाओं के निवारण में लिए माथा टेकते हैं, उनकी मनौंतियां पूूरी भी होती है। लेकिन लेकिन मनौंतियों को पूरा करने वाले श्री कामदगिरि खुद ही समस्याओं का शिकार हैं। उनकी समस्या दो प्रदेशों में विभक्त उनकी सीमाएं हैं। हैरत की बात यह है कि राजनेताओं ने उनकी समस्या को लेकर मजाक तो खूब उड़ाया लेकिन कभी समाधान का प्रयास नही किया। समाधान का पहला बड़ा प्रयास श्री कामदगिरि प्रमुख द्वार के गोलोकवासी महंत पूज्य प्रेम पुजारी दास जी महराज ने किया, उनको काफी हद तक सफलता भी मिली, पर मण्डल-कमण्डल के हितैषी पूूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने ऐसा चक्कर चलाया कि मामला वही ढाक के तीन पात हो गया।  

श्री चित्रकूटधाम की मुख्य समस्या दो प्रदेशोें में विभक्त होने के कारण है। इस समस्या के निदान के लिए किये जाने वालेे प्रयासों को लेकर अब तब तमाम प्रयास किये गये। 21 नवंबर को अन्तर्राष्ट्रीय सनातन शोध संस्थान ने अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन कर 27 देशोें के प्रतिनिधियों, जगद्गुरू शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती  व चित्रकूट के सभी अखाड़ापतियों व प्रमुख संतों के समक्ष चित्रकूटधाम को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के लिए पत्र प्रधाानमंत्री को भेजा। इसके बाद सांसद आर.के. सिंह पटेल ने भी पत्र प्रधानमंत्री जी को अपने हाथों सेे जाकर सौंपा। संदीप रिछारिया ने श्री कामदगिरि पीठम के कर्ताधर्ता महंत मदन गोपाल दास जी महराज से विशेष वार्ता की। पेश है विशेष बातचीत के कुछ अंश

महराज श्री, आपके अनुुसार श्री चित्रकूटधाम की मुख्य समस्या क्या हैं?

श्री चित्रकूटधाम की मुख्य समस्या समूचे धर्मस्थल का दो भागों में विभक्त होना है। यूपी के भाग में जिला मुख्यालय समीप होने के कारण विकास की गति तीव्र है जबकि मध्य प्रदेेश में जिला मुख्यालय के 70 किलोमीटर दूर होने के कारण विकास की गति बहुत धीमी है। बाहर से आने वाले श्रद्वालुओं को अलग-अलग राज्योें मे प्रवेश व रहने कके दौरान विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।  

आपने इस समस्या का अनुभव कब किया?

मैं श्री चित्रकूटधाम में  2007-2008 में आया। श्रीकामदगिरि प्रमुख द्वार के पूर्व महंत सिहस्थभूूषण पूज्य प्रेम पुजारी दास जी महराज ने श्रीचित्रकूटधाम को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के लिए पूूर्व प्रधाानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर यूपी व एमपी के तत्कालीन राज्यपाल व मुख्यमंत्रियोें से पत्राचार किया था। यह सब पढकर बहुत गौैरव का अनुभव हुआ। महराज जी ने प्रयास कर राजीव गांधी से चित्रकूट को फ्री जोन भी घोषित करवाया था। बाद में मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उसे खत्म कर दिया था।

आपने अपने स्तर पर क्या प्रयास किये?

संतों व महंतों के साथ स्थानीय भक्त समुदाय को एकत्र कर कई बार आवाज उठाई। 2017 में यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी के प्रथम चित्रकूट आगमन पर रामघाट पर उनसे इस संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने इस समस्या को स्वीकार कर पूर्ण निराकरण का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वे केंद्र व एमपी सरकार से बात कर इस समस्या का निदान करवायेंगे। मध्य प्रदेश के पूूर्व मुख्यमंत्री को तो हमारे अनशन के कारण चित्रकूट आना पड़ा था। उन्होने भली वादा किया था, इसके बाद उन्होंने चित्रकूट को मिनी स्मार्ट सिटी बनाया। लेकिन काम ढेले भर के नही हुये। इसके बाद अभी मुख्यमंत्री श्री यादव आये। उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय में बैठक कर विकास प्राधिकरण का गठन कर 20 करोड़ रूपया रिलीज किया सीवर लाइन बन रही है, लेकिन उसका कार्य बहुत धीमा है।

आगे की क्या प्लानिंग है?

श्री चित्रकूटधाम केंद्र शासित प्रदेश के मुद्दे को हर आम और खास के पास ले जाया जाएगा। हम हर तरह से प्रयास कर सरकार कोे संबेदित करने का प्रयास करेंगे। जल्द ही साधू-संतों की बड़ी बैठक कर एक बड़े आंदोेलन की रूपरेखा बनाई जाएगी। इस आंदोलन में श्री चित्रकूटधाम के के सम्पूर्ण 84 कोस के लोगोें को जोड़ा जाएगा।



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