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जिन्दगी कैसी है पहेली

1 मई, 1919 को कोलकोता में जन्मे भारतीय सिनेमा के महान पाश्र्व गायक मन्ना डे अततः 24 अक्टूबर, 2013 को 94 वर्ष की आयु में बंगलूर में इस दुनियाँ को अलविदा कहा। वे ऐसे गायक रहे उनकी आवाज हर किसी को सूट करती थी। उन्होंने हिन्दी फिल्मों में गाने की शुरूवात सन् 1942 में फिल्म तमन्ना की थी। पाँच दशक मुम्बई में रहने के बाद वेेबंगलूर में रहने लगे थे। मन्ना डे की अन्तिम फिल्म 2006 में उमर थी। अपने प्रराम्भिक में दौर मन्ना डे ने बतौर सहायक के.सी. डे के साथ काम किया। बाद में संगीतकार सचिन देव बर्मन की शार्गिदी में शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ सीखीं और फिर कुछ अन्य संगीतकारों के साथ रहकर उनसे गुर सीखें। मन्ना डे लगभग 50 गाने मोहम्मद रफी के साथ भी गीत गाये। पिछले कुछ वर्षो से मन्ना डे फिल्मों में नहीं गाये। मंचों पर भी जल्दी उपलब्ध नहीं हो पाते थे। सन् 1947-48 से 1970 तक का समय भारतीय फिल्म संगीत की दृष्टि से स्वर्णिम युग रहा है। इसी स्वर्णिम युग में मन्ना डे ने अपनी मेहनत और अथक परिश्रम से अपना स्थान बनाया और निरन्तर अनेकों यादगार गाने गाये। उपकार फिल्म का कसमे वादे प्यार वफा सब बातों का क्या गाना आज भी मानस पटल पर आते ही मन्ना डे का यह यादगार गाना जिन्दगी के आस-पास ही घूमता नजर आता है। मन्ना डे को कई राष्ट्रीय पुरस्कार दादा साहेब फालके अवार्ड, पद्म भूषण, अनेकों फिल्मी पुरस्कारों से उन्हे समय-समय पर उन्हें सम्मानित किया गया। मन्ना डे के स्वर में गाये गये हजारों गाने हमेशा हमारे बीच रहकर उन्हें याद करते रहेंगे। सच ही कहा गया है कि कलाकार कभी मरता नहीं उनकी कृतियाँ हमेशा जीवित रखती हैं।
मन्ना डे के यादगार गाने
यशोमति मैय्या से बोले नन्दलाला - सत्यम शिवम सुन्दरम्
जिन्दगी कैसी है पहेली हाय  - आन्नद
प्यार हुआ इकरार हुआ है  - श्री 420
अपने लिये जिये तो क्या जिये - बादल
दुख भरे दिन बीते रे भैय्या  - मदर इण्डिया
एक चतुर नार करके सिंगार  - पड़ोसन
तुझे सूरज कहूं या चन्दा  - एक फूल दो माली
कसमे वादे प्यार वफा सब बाता - उपकार
तू प्यार का सागर   - सीमा
मधुशाला    - एलबम


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