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गुप्त प्रेम विवाह

इश्क वो आग है आतिश गालिब,
जो लगाये ना लगे ओर बुझाये ना बुझे।
फिर भी कुछ लोग काफी खूबसूरती से अपनी मोहब्बत और शादी को छिपा ले जाते हैं कई महीनों बाद समाज को उनकी षादी या मोहब्ब्त के बारे मे पता चलता है। आखिर में समाज उनकी शादी को मान्यता दे ही देता है।
ऐसा अक्सर उन प्रेमी जोड़ों के साथ होता है। जो परस्पर राजी-खुशी से आपस मे षादी तो करना चाहते है। लेकिन उनके परिजन जाति-धर्म, समाजिक अथवा आर्थिक हैसियत का हवाला देते हुये शादी मे इजाजत से ही इंकार नही करते बल्कि रोड़ा बन जाते है। वे अक्सर आत्महत्या कर लेने या वर-वधु को जायदाद से बेदखल करने या सारे संबध तोड़ने की धमकी तक देते है। ज्योतिष मे प्रेम विवाह के ग्रह योगों का विषद वर्णन है। जो जातीय, अन्र्तजातीय या अन्र्तधर्मी कई प्रकार होता है। प्रस्तुत लेख मे गुप्त प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सूत्रों को स्पष्ठ करने कर प्रयास किया गया है।
1. महिला एक कायस्थ दंत चिकित्सक है। उसने अपने मेडिकल कालेज के ब्राह्मण ब्वायफ्रेन्ड के साथ के साथ प्रेम किया और 2014 मे गुप्त विवाह किया बाद मे दोनों परिजनों की सहमति से धार्मिक रीति से विवाह किया। जमांक मे सप्तमेश गुरू रोमांस के भाव पंचम मे गया है। उस पर पंचमेश शनि की दृष्टि भी है। पंचमेश सप्तमेष पर दृष्टि डाल रहा है। सप्तमेश गुरू, राहू युत है।
कन्या लग्न-द्वितीय मे तुला मे केतु, वृश्चिक मे शनि, मेष मे सूर्य, शु़क्र गुरू, मीन मे मंगल शुक्र मेष मे राहू, कर्क मे चन्द्र।
2. यह ब्राह्मण जातिका एक इंजीनियरिंग कालेज में लैक्चरर है। उसने अपने लैक्चरर स्वजातीय लैक्चरर सहकर्मी के साथ पहले गुप्त रूप से मंदिर मे विवाह किया बाद मे 2015 मे सामान्य विवाह किया। सप्तमेश चन्द्र, मंगल, राहू के मध्य है।
मकर लग्न मे मंगल मांदि, कंुभ मे गुरू व चन्द्र, मीन मे राहू, कन्या मे सूर्य-27 अंश व केतु, तुला मे शुक्र बुध, शनि वृश्चिक में।
3. 27 जुलाई 1951। 8ः 55 रात्रि। फैजाबाद। जातक के तीन विवाह हुये द्वितीय प्रेम व गुप्त विवाह अति कम उम्र की बंगाली बाला से हुआ लेकिन लड़की के घर वालों के भारी विरोध के कारण विवाह टूट गया।
कुंभ लग्न मे राहू मीन मे द्वितीयस्थ गुरू, चतुर्थ मे चन्द्र, पंचम मे मंगल षष्ठ मे सूर्य, सप्तम मे सिंह मे केतु, शुक्र बुघ, कन्या मे षनि। सप्तमेश नवमेश युति सप्तम मे प्रेम विवाह केतु युति गुप्त विवाह।
4. जातिका 23/24 सितम्बर 1951। रात्रि-11.40। कलकत्ता। मिथुन लग्न मे चन्द्र, सिंह मे बुघ, मंगल, शुक्र व केतु, कन्या मे सूर्य, शनि कुंभ मे राहू, मीन मे वक्री गुरू। सप्तमेश गुरू वक्री होकर पंचमेश शु़क्र पर दुष्टि डाल रहा है तथा लग्नेश बुध व पंचमेश शुक्र की केतु से युति गुप्त विवाह दे रहा है। तृतीयेश सूर्य और चतुर्थेश बुध के मे राशि परिवर्तन है। तृतीयेश की युति परिचितों या रिश्तेदारों मे विवाह देता है।
(साभार-आर एम बनर्जी, जन. 1995 )
जातिका अपने चचेरे भाई से प्रेम करती थी उसने गुप्त रूप से कोर्ट मैरिज कर ली फलस्वरूप उसका विवाह कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया बाद मे उसका विवाह पुर्नविवाह परिचितों मे हुआ।
गुप्त प्रेम विवाह के ग्रह योग-
1. गुप्त विवाह केवल प्रेम विवाह मे होता है। अतः प्रेम विवाह के सभी ग्रह योगों पर राहू केतु की युति या दृष्ट गुप्त विवाह करवाता है।
2. सप्तमेश राहू या केतु से युत हो।
3. राहू केतु सप्तम मे तथा लग्न या चन्द्रमा से पंचमेश और सप्तमेश परस्पर युत या दृष्टि हो।
4. पंचमेश की सप्तम भाव या सप्तमेश पर दृष्टि हो तथा राहू या केतु पंचम या सप्तम भाव मे हो।
5. सप्तमेश की पंचम भाव या पंचमेश पर दृष्टि हो तथा राहू या केतु पंचम या सप्तम भाव मे हो।
6. केतु अशुभ राशि मे अषुभ ग्रह के साथ होकर शुक्र या सप्तमेश या दोनों के साथ बैठा हो। तो गुप्त विवाह योग देगा यदि अन्य पाप ग्रहों का प्रभाव होगा।
7. सप्तम भाव मे शनि केतु योग हो तो जातक या जातिका किसी पूर्व परिचित से गुप्त रूप से विवाह करे। या केतु सप्तम भाव मे हो उस पर शनि की दृष्टि पड़े या जमांक मे केतु सप्तमेश के साथ युत हो जातक गुप्त प्रेम विवाह करे।
8. प्रेम विवाह योग के साथ पंचमेश राहू या केतु से युत हो गुप्त विवाह हो।
9. बुध, शुक्र केतु या राहू युति गुप्त विवाह दे।
10. पंचमेश नवमेश की युति सप्तम भाव वर तथा इन पर राहू या केतु की युति या दृष्टि हो।
11. उपरोक्त योग मे राहू केतु पंचम या नवम भाव मे हो तथा नवमेश निर्बल या पापग्रस्त हो पंचम व नवम भाव समाजिक और धार्मिक बंधनों, मान्यताओं, रीतिओं व परम्पराओं के है। पंचमेश नवमेश के निर्बल होने से जातक समाजिक, धार्मिक मान्यताओं तथा परम्पराओं को तोड़ कर विवाह करता है।


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