मानव जीवन में भारतीय संगीत का महत्व

भारतीय संगीत हमारी धरोहर है। संगीत का अर्थ केवल शास्त्रीय संगीत नही है। सुगम संगीत, लोक संगीत का भी बहुत बड़ा महत्व है। शास्त्रीय संगीत में समयानुसार ऋतुओं के अनुसार तथा आजकल विद्वानों ने अनेक रागों की उत्पत्ति की है।
सुगम संगीतः- जिसका अर्थ है सरल संगीत सुगम संगीत। आदि-काल से बडे़ बडे़ संत भक्ति संगीत के रूप में भजन के पद गाकर ईश्वर के दर्शन किये है गुणीजन कहते है कि ईश्वर प्राप्ति का एक मात्र साधन भक्ति संगीत है। 'सूर-सागर' के रचयिता एवं गीत - काव्य के प्रकांड विद्वान महात्मा सूरदास, 'रामचरितमानस' के यशस्वी लेखक गोस्वामी तुलसीदास, हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक संत कबीरदास तथा सुप्रसिद्ध कवियित्री भजन गायिका मीराबाई द्वारा भक्तिपूर्ण काव्य के प्रचार से संगीत भगवत् प्राप्ति का साधन बनकर उच्चतम शिखर पर पहुचीं।
लोक संगीतः- लोक संगीत हमारे भारतीय संस्कार से जुड़ा हुआ संगीत है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के गीत गाये जाते है। हमारी भारतीय संस्कृति में 16 संस्कार माने जाते है: -
(1) गर्भाधान
(2) पुंसवन
(3) सीमान्तोनयन
(4) जातकर्म
(5) नामकरण
(6) निष्क्रमण
(7) अन्नप्राशन
(8) चूड़ाकरण
(9) कर्णछेदन
(10) विद्यारम्भ
(11) उपनयन
(12) वेदारम्भ
(13) केशान्त
(14) समावर्तन
(15) विवाह
(16) अंत्येष्टि संस्कार गीत के अलावा हमारे घर के लिए तथा खेती के लिए श्रम गीत बनाये गये है। जैसे कि पहले के समय में हर घर में प्रतिदिन जितनी मात्रा में रोटी के लिए आटे की जरूरत पड़ती है। प्रातः काल भोर मे घर की महिलायें जाता पर उतनी ही मात्रा का गेंहू लेकर पिसाई करती है जिसमें 'जतसार' गीत पाये जाते है। खेतों में कटाई के लिए, बुवाई के लिए, निराई के लिए, रोपनी के लिए, विभिन्न प्रकार के गीत गाये जाते है। पहले के समय में जाति गीत भी गाये जाते थे जैसे कि - 'धोबिया गीत,' 'कहारो का गीत,' 'कोरियों का गीत,' 'मछुवारों का गीत आदि।' परन्तु अब ऐसे गीत नही गाये जाते।
राग और ऋतुओं का सम्बन्ध प्राचीन संगीत में मिलता है भारत के सभी प्रदेषों में ऋतुओं के अनुसार लोकमय गीतो का प्रचलन रहा है अनेक लोकगीत और लोक धुनें शास्त्रीय संगीत में ग्रहण की गयी है। शौपेन हाॅवर का कहना है- 'केवल संगीत ही ऐसी कला है जो श्रोताओं से सीधा सम्बन्ध रखती है। इसे किसी माध्यम की आवश्यकता नही होती है। संगीत और जीवन में लय बहुत ही महत्वपूर्ण है जब तक संगीत में लय बरकरार रहती है संगीत बहुत आनन्दमय लगता है। लय बिगड़ने पर वह अच्छी नही लगती। उसी तरह जीवन भी जब तक एक लय में चलता है वह बहुत ही आनन्ददायक लगता है। संगीत कला में एक विषेश गुण और भी है कि वह मनुष्य के अतिरिक्त पशु-पक्षी को भी आकर्षित करती है। अन्य कला में यह सामथ्र्य नही है।