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योगिनी मंदिर या वेधशाल

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले मे पडौली कस्बे में मितवाली गांव के पास एक करीब 100 फुट उंची पहाड़ी पर एक चक्राकार 64 योगिनियों का मंदिर बना हुआ है, इसे इकत्तिरसो महादेव मंदिर भी कहा जाता है। जो समुद्र तल से 300 की फुट उंचाई पर है। जिसे विक्रम संवत 1383 (सन 1323) में कच्छपघाट के प्रतिहार राजा देवपाल ने बनवाया था। विद्वानों का कहना है कि प्राचीन काल मे इस मंदिर में ज्योतिष और गणित शिक्षा दी जाती थी कहा जाता है कि सन 1920 मे बना भारत का संसद भवन इसी मंदिर की डिजाइन के आघार पर बनाया गया है। मंदिर तक जाने के लिये 200 सीढ़िया चढनी पड़ती हैं। जिसकी वाहृय घेरे की वाहृय दीवार पर हिंदू देवी देवताओं के चित्र बने है। वाहृय घेरे के बाहर पूरब दिशा ओर एक उँचे चबूतरे पर मंदिर का प्रवेश द्वार है। जिसमे प्रवेश करने के लिये पांच सीढियां चढने पर एक और बड़ा चबूतरा आता है। इस चबूतरे के अंत में चार और सीढियां चढने पर मंदिर में प्रवेश होता हैं मंदिर से निकलने पर प्रवेश द्वार की सीढियों के दांये कोने मे पत्थर का एक हवनकुंड बना है। वाहृय घेरे के दांयी ओर एक विचित्र गोलाकार आकृति है। जिसमे पत्थर का एक गोलकार चबूतरा बना है। उसके चारों ओर एक छल्ला भी बना है। मंदिर का व्यास 52 मीटर (170) फुट है। वाहृय घेरे में अंदर की ओर केन्द्रीय मंडप की ओर मुख किये 64 छोटे कक्ष है। प्रत्येक कक्ष ढाई फुट चैड़ा है। जिनमे 64 योगिनियो की प्रतिमायें है। कुछ मूर्तियां चोरी चली गयी है। कुछ म्यूजियम मे रखी हैं। पूरे मंदिर की छत सपाट है। और ग्रेनाइड के 144 खंभों पर टिकी है। बाहृय ढांचे और केद्रीय मंदिर के मध्य एक विशाल गोलाकार आंगन बना हुआ है। मंदिर के मध्य मे एक गोलाकार चारों ओर से खुला मंडप है। जिसके अंदर एक और गोलाकार गर्भगृह है। जिसमे शिव जी की प्रतिमा स्थापित है। केन्द्रीय मंदिर चार फुट उँचे चबूतरे पर बना है। जिसमे चढ़ने के लिये चार सीढियां चढ़नी पड़ती हैं। केन्द्रीय भवन की छत से कई पाइप जमीन में जाते है। जिसके द्वारा बरसात का पानी विशाल पैमाने पर जमीन मे संचित किया जाता है। मंदिर का प्रवेश द्वार पूरब की ओर है व केन्द्रीय मंदिर का भी प्रवेश द्वार पूरब की ओर है। दोनो द्वार एक ही सीध मे हैं कहा जाता है। कि कभी सभी 64 मंदिरों व केन्द्रीय मंदिर की छत पर शिखर हुआ करते थे जो बाद मे हटा दिये गये तथा मंदिर यहाँ पाये जाने वाले वाले लाल बलुआ पत्थरो से बना है। पूरा मंदिर भूकंपरोधी है। कभी कभी यहाँ पर कुछ तांत्रिक अपनी तंत्र साधना करते है। पूरा मंदिर बड़ा रहस्यमय है कुछ कुछ दक्षिण अमरीका के इंकाओं के मंदिरों की याद दिलाता है। इसका निर्माणकाल भी वही है। जब इंका सभ्यता पूरे विकास की चरम सीमा पर थी ऐसा लगता है। कि जैसे यह प्राचीनकाल का कोई हवाई अड्डा रहा हो जहाँ अंय ग्रहों के अंतरिक्ष यान यात्री उतरते हों। और रात में 64 योगिनी मंदिरों व केन्दीय मंदिरों मे एक साथ हवन करके पर ग्रहियों को कोई संकेत दिया जाता हो। कुछ विद्वानों के अनुसार यह प्राचीन वेधशाला है।
-साभार 'वारह वाणी'


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