हिन्दी के विकास और सम्मान के लिए निरन्तर प्रयासरत रहना होगा

हिन्दी है हम वतन है, हिन्दुस्तान हमारा,
हम बुलबुले हैं इसकी हिन्दुस्तान हमारा...
सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा...
 भारत में सितम्बर के महीने का विशेष महत्व है 5 सितम्बर शिक्षक दिवस और 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में हम मनाते है, परन्तु हम क्या आज शिक्षक और हिन्दी को वह सम्मान दे रहें हैं, जो दो-तीन दशक पहले दिया जाता था। देश स्वाधीन हुआ और हिन्दी को राजभाषा की मान्यता मिली उसके बाद से ही हिन्दी को हम राजभाषा के रूप में मानते चले आ रहे हैं। हिन्दी ही हिन्दुस्तान की पहचान है। हिन्दी के अलावा अन्य भाषाओं की बात करते हैं, इसका यह मायने नहीं रखना चाहिए कि हम हिन्दी को ही त्याग दें। हमें अन्य भाषाओं का तभी प्रयोग करना चाहिए, जब हिन्दी भाषा में उसका विकल्प न हो। हिन्दी को प्रोत्साहन देने के लिए हम अपने परिवार और इष्ट मित्रों से वार्तालाप में अधिक से अधिक हिन्दी भाषा का प्रयोग करें, इससे से भी हिन्दी को बढ़ावा मिलेगा। हिन्दी शब्दों के होने पर भी आज अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया जाना अनुचित ही का जायेगा। हम यह भी कह सकते हैं कि भारत से अंग्रेज चले गये लेकिन अंग्रेजी छोड़ गये, अनुचित नहीं होगा। परन्तु भारत के आम नागरिकों की कौन कहे, राजनीतिक, सत्ता-विपक्ष बैठे लोग भी अपने हिन्दी भाषण में धड़ल्ले से अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं। जबकि उन अंग्रेजी शब्दों के हिन्दी पर्याय शब्द सरलता से उपलब्ध हैं। लेकिन हमारे सांसद और विधायक लोकसभा-विधान सभाओं और अपने भाषणों में बोलते मिल जाते हैं, 'सेक्युलर, कम्युनल या करप्शन' जैसे अंग्रेजी शब्दों की बैशाखी के सहारे अपने भावों की अभिव्यक्ति करते हैं। जबकि इनके पर्याय 'धर्मपिरपेक्ष, साम्प्रदायिक और भ्रष्टाचार, शब्द बोलचाल तक व्यवहार में आ रहे हैं। स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई कि रद्दी खरीदने वाला भी हिन्दी अखबार के अपेक्षा अंग्रेजी अखबार का अधिक पैसा देने के लिए तत्पर रहता है। बहुत पहले की बात है जब अटल विहारी वाजपेयी भारत के विदेश मंत्री थे, वे अपना भाषण विदेश में हिन्दी में देकर आये थे। उससे हिन्दी प्रेमियों को प्रसन्न होना स्वाभाविक है। लेकिन सभी राजनीतिक ऐसा नहीं कर सके। हिन्दी हित के लिए सभी को मिलजुल कर काम करना चाहिए। केवल हिन्दी पखवारा और दिवस मना कर इतश्री कर लेने से हिन्दी का विकास सम्भव नहीं है। भारत की एकता-अखड़ता लिए और विकसित राष्ट्र बनाने में हिन्दी का अहम् भूमिका रहेगी। ऐसा संभव इसलिए कि जब हम एकता के सूत्र में बंधे होंगे तो अधिक विकास करेंगे, इस कारण भी सभी देशवासियों को सभी स्तरों से हिन्दी के विकास के लिए काम करना चाहिए। आखिर हिन्दी की उपेक्षा करके और अंग्रेजी का महिमा मंडित करने के पीछे कौन है और उसका उद्देश्य क्या है। राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक होगा कि अंग्रेजी के समर्थकों के मंशा को नष्ट करना और हिन्दी को देश-विदेश में सम्मान दिलाने के लिए सार्थक प्रयास करना होगा। हिन्दी गंगा जैसी पवित्र और सागर जैसी विशाल हो इसके लिए हिन्दी के विकास के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ हिन्दी प्रेमियों का अथक परिश्रम करना होगा, इसके लिए हम सब का नैतिक दायित्व है। इस वर्ष 14 सितम्बर को सभी को हिन्दी दिवस के अवसर पर एक नई पहल करना चाहिए कि सभी क्षेत्रिय भाषाओं का सम्मान होना चाहिए इसके साथ ही अंग्रेजी का भी अपमान नहीं होना चाहिए। सम्मान देने से ही सम्मान पाया जा सकता है। परन्तु हिन्दी के विकास और सम्मान के लिए निरन्तर प्रयासरत रहना होगा। हिन्दी ही एक ऐसी भाषा है जो सभी हिन्दुस्तानियों को एक सूत्र में बांधने में सक्षम हो सकती है।


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