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उड़ती हाँडिया में मौत

मूठ या मारण क्रिया तंत्र के छह मुख्य अंगों में से एक है। जिसे आम भाशा मे अभिचार, कृत्या, मारण, मूठ कहा जाता है। मूठ शब्द संस्कृत के मुष्ठि शब्द का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ मुठ्ठी या प्रहार करना है। पुराने जमाने में लोग अपने प्रबल शत्रु के विनाश हेतु मूठ चलवाते थे पुराणों में दक्ष यज्ञ विघ्वंस के बाद भृगु ऋषि द्वारा शिव गणों पर कृत्या चलाने का वर्णन है। अथर्व वेद मे भी कृत्या चलाने और बचने का वर्णन है। लेखक श्याम मनोहर व्यास ने मुझे बताया था कि राजस्थान के भील, मघ्य प्रदेश मे गोंड आदिवासी मूठ चलाने मे माहिर होते है। जिसमे वे भैरव जी के मंत्रों का सहारा लेते है। 19 वीं सदी में नर्मदा और सागर क्षेत्र के ब्रिटिश पाॅैलिटकल एजेंट तथा तत्कालीन ठग उन्मूलन अभियान के महानायक कर्नल विलियम एच स्लीमैन ने अपनी पुस्तक रेम्बेलंेस एंड रिकल्शन आॅफ एन  इंडियन आॅफिशियल में मारण मंत्र की कई सत्य और आँखों देखी घटनाओं का वर्णन किया है। आजादी के पूर्व हिमांचल प्रदेश की शिमला रियासत के राजवैद्य स्व.प. त्रिलोकी नाथ आजम ने भी असम में उनके सामने घटी मूठ की एक सत्य घटना का वर्णन किया है। आम तौर पर मूठ में कोई तांत्रिक किसी दुष्ट आत्मा को अपने वश मे करके उसे शराब, मुर्गा, बकरा, माँस व अंय वस्तुयें अर्पित करके किसी व्यक्ति को मारने के लिये भेजता जो शिकार को तत्काल या धीरे-धीरे रोगग्रस्त करके मार देती है। इसी बीच यदि पीड़ित व्यक्ति किसी योग्य तांत्रिक की मदद लें लेता है। तो वह तांत्रिक दुष्ट तांत्रिक की मूठ काटकर उसे निष्फल कर वापस भेज देता है। तो मूठ की आत्मा भेजने वाले तांत्रिक को मार देती है। यदि वह असावधान है। अन्यथा भेजने वाले तांत्रिक मूठ भेजने से पहले एक बकरा तैयार रखते है ताकि यदि मूठ वापस आ जाये तो वह आत्मा को बकरा भेंट करके अपनी जान बचा सके। कुछ जानकार लोगों से मैंने सुना है कि अवध क्षेत्र मे मूठ मे एक बड़ी चारों और से छेद दार हंडिया मे तांत्रिक अभिमंत्रित कंघी, जलता दिया शीशा, मिठाई, कलेजी, बिल्ली व पशु के कुछ अंग रख कर अमावस्या की रात शत्रु के घर भेजता है। मूठ में जलती हुयी हंडिया सांय-सांय की आवाज करती हुयी शत्रु के घर जाकर शिकार को तीन बार आवाज देती है। यदि शिकार घर से बाहर निकल आता है या जवाब देता है। तो हँडिया व्यक्ति के सर पर बम की तरह फट जाती है। और आदमी तत्काल मर जाता है। 19 वीं सदी के विष्णु भट्ट गोडसे वरसईकर ने अपनी मराठी पुस्तक माझा प्रवास जिसे साहित्यकार अमृतलाल नागर ने आँखों देखा गदर के नाम अनुवादित किया था विष्णु गोडसे ने धार जाकर पंवार राजा यशवंत राव के मृत दान समारोह में भाग लिया था जिसे किसी दुष्ट तांत्रिक ने 23 मई, 1857 को मूठ चलाकर मार दिया था। चिंताहरण मुक्तमंडल आश्रम नगला भादौं गांव फिरोजाबाद के राजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि 14-15 साल की उम्र में उन्होंने अपने गांव की छत पर उड़ती हुयी मूठ वाली हंडिया देखी थी जिसमे से आग की लपटें निकल रहीं थीं 17 वीं शताब्दी के ग्वालियर नरेश महाराज महादजी (माधौ या माधौजी राव)  सिंधिया का जंम 3 दिसम्बर 1730  ई0 में सुबह 4.15 बजे मालवा व उज्जैन के मराठा सूबेदार रानो जी सिंधिया व राजपूत माता चीमा बाई के घर हुआ था 18 जनवरी 1768 को उन्हें राजगददी मिली उनकी चार पत्नियां व एक संतान बाला बाई व एक दत्तक पुत्र दौलतराव सिंधिया था 12 फरवरी 1794 को उनके  मृत्यु वरनबाड़ी (पूना) में हुयी। उनका जमांक कन्या लग्न 21.7  अंश में राहू 27.42 वृश्चिक में सूर्य 20.39 बुध 5.26 मकर में षुक्र 5.42 मंगल 8.20 कुंभ मे शनि 24.39 सिंह मे चन्द्र 21. 04 व गुरू 18.57 पू. फा. चतुर्थ चरण शुक्र महा दषा 3. 12 21 दिन बाधकशे गुरू अष्ठमेश और सप्तमेश से युत 12 वें स्थान वर दृष्ट है। सन 1772 में जाविता खान रोहेले के बेटे गुलाम कादिर ने अपने बाप पर बादशाह षाह आलम द्वारा किये अत्याचारों का बदला लेने के लिये दिल्ली में अचानक हमला करके बादशह को अंधा करवा दिया बेगमों शहजादों दिल्ली को बेदर्दी से लूटा दिल्ली का खंजाची शीतलदास बादशाह शाह आलम का पत्र लेकर माधवजी सिंधिया के पास मथुरा पहुँचा और और बादशाह को बचाने की याचना की सिंधिया जी तुरन्त दिल्ली चल दिये मराठा फौजी आने की खबर सुन कर गुलाम कादिर खजाना लेकर भाग गया गुलाम कादिर को बमनौली गांव के भिक्का बामन ने पहचान कर पकड़वा दिया और खजाना खुद हड़प गया माधौजी ने गुलाम की आंखें, नाक कान कटवाकर बादशह को भिजवा दी और गुलाम कादिर का सर कटवा दिया यह खबर पाकर गुलाम की माँ जो तंत्र-मंत्र जानती थी ने माधव जी का एक पुतला बना कर उस पर पीर मुहम्मद की मूठ चलाई फलतः माधौजी को रहस्यमय ज्वर, चेहरे, गर्दन सीन पर सूजन और सारे बदन पर फोड़े हो गयेे सारे वैद्य, हकीमी ईलाज नाकाम रहे माधौजी के ज्योतिषी राम नारायण शास्त्री ने बताया कि आप पर किसी ने मूठ मारी है। योग्य तांत्रिक की खोज की गई भाऊ बख्षी और आभा चितनबीस गया बिहार के करहरी गांव के ज्योतिषी व तांत्रिक प. गंगाधर शास्त्री को आगरा लाये उन्होंने कर्णपिषाचनी विद्या द्वारा जानकर बताया कि किसी मुस्लिम महिला ने आप पर मुहम्मद पीर का मारण मंत्र चलाया है। उन्होंने शमशान में अघोर अनुष्ठान करके मूठ काट दी मूठ कटते ही गुलाम कादिर की माँ मर गई पंडित जी की प्रार्थना पर माधौजी ने आगरा के गोकलपुरा कस्बे के सामने एक भव्य संस्कृत पाठशाला खुलवा दी तथा सात गांव प्रदान किये जो आज आगरा कालेज के नाम से मशहूर है।                      


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