सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर’ का भव्य उदघाटन

सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ की मेजबानी में आयोजित एक माह के '27वें अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर' का भव्य उद्घाटन सी.एम.एस. कानपुर रोड आॅडिटोरियम में हुआ। मुख्य अतिथि श्री इन्द्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त, लखनऊ ने दीप प्रज्वलित कर अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर का विधिवत् उद्घाटन किया। इस अवसर पर ब्राजील, कनाडा, कोस्टारिका, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, मैक्सिको, नार्वे, स्वीडन, थाईलैंड, अमेरिका और भारत के बाल प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों के लोकगीतों एवं शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना को साकार किया एवं विश्व एकता व विश्व शान्ति का संदेश सारे विश्व में प्रवाहित किया। विदित हो कि सी.एम.एस. की मेजबानी में आयोजित एक माह का अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर 28 दिसम्बर 2019 से 24 जनवरी 2020 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विश्व के 13 देशों से पधारे 11 से 12 वर्ष आयु के चार-चार बच्चों के दल अपने ग्रुप लीडर के नेतृत्व में प्रतिभाग कर रहे हैं तथापि एक माह तक साथ-साथ रहकर भारत की सँस्कृति, सभ्यता, खान-पान व रीति-रिवाजों से अवगत हो रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर की सुव्यवस्था एवं प्रतिभागी छात्रों के बीच आपसी संवाद हेतु 16 से 17 वर्ष आयु के जूनियर काउन्सलर भी बाल शिविर में प्रतिभाग कर रहे हैं।
 अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए मुख्य अतिथि श्री इन्द्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त, लखनऊ ने कहा कि विभिन्नता में एकता दर्शाता यह अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर वास्तव में सराहनीय है, जिसमें विभिन्न देशों के बच्चे साथ-साथ रह रहे हैं। यह शिविर वास्तव में मल्टी-लिंगुवल, मल्टी-कल्चरल एवं मल्टी-नेशनल आयोजन है, जिसके माध्यम से विभिन्न देशों के बच्चों के बीच गहरा आत्मीय रिश्ता कायम होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये नन्हें मेहमान पूरे विश्व को अपनी विश्वव्यापी सोच से आलोकित करेंगे।
 इससे पहले, अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर के उद्घाटन समारोह में 13 देशों से पधारे बाल प्रतिनिधियों ने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विश्व परिवार की झलक प्रस्तुत करते हुए अहसास दिलाया कि वह दिन अब दूर नहीं जब सम्पूर्ण पृथ्वी एक देश होगा और उस पर निवास करने वाली सम्पूर्ण मानवता उसके नागरिक। समारोह में विभिन्न देशों से पधारे बाल प्रतिभागियों ने साथ मिलकर नववर्ष का स्वागत किया एवं अत्यन्त ही मधुर स्वरों में सी.आई.एस.वी. गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
 'अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर' के उद्घाटन समारोह के उपरान्त आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेन्स में बाल शिविर के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी पत्रकारों को देते हुए सी.आई.एस.वी. इण्डिया के प्रेसीडेन्ट, सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर अपने आप में एक लघु विश्व की झलक है, जहां देश-विदेश के बच्चों को एक माह तक प्रेम, शान्ति, एकता, सहयोग और भाईचारे का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहाँ विभिन्न देशों के बच्चे एक माह तक साथ-साथ रहकर दोस्ती व सद्भाव की जो शिक्षा प्राप्त करेंगे, वह पूरी जिन्दगी उनके साथ रहेगी। 
 सी.एम.एस. प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने कहा कि इस अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर का नाम ''पीस हैज ए 100 नेम्स विलेज'' रखा गया है जो विभिन्न देशों के बच्चों के बीच आपसी समझ, सहयोग और विश्व बन्धुत्व के विचारों को बढ़ायेगा और उन्हें विश्व शांति, विश्व एकता और भाईचारे के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करेगा। अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर की ज्वाइंट सेक्रेटरी एवं सी.एम.एस. राजाजीपुरम (प्रथम कैम्पस) की प्रधानाचार्या श्रीमती निशा पाण्डेय ने कहा कि विभिन्न संस्कृति, भाषा, सभ्यता, रीति-रिवाज में पले-बढ़े नन्हें-मुन्हें बच्चों को एक साथ एक ही छत के नीचे इकट्ठे रखे जाने का उद्देश्य उनके कोमल हृदयों में आपसी भाईचारा, विश्व शांति तथा विश्व बन्धुत्व की भावना का समावेश करना है, ताकि विश्वव्यापी दृष्टिकोण से परिपूर्ण होकर ये बच्चे एक विश्व समाज की परिकल्पना को साकार करने में सार्थक भूमिका निभाये।
 अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर की निदेशिका एवं सी.एम.एस. इनोवेशन विभाग की शिक्षिका श्रीमती सुदीप्ता सिंह ने बताया कि इंग्लैण्ड की चिन्ड्रेन्स इन्टरनेशनल समर विलेज संस्था (सी.आई.एस.वी.) के तत्वावधान में विश्व के अलग-अलग देशों में इस प्रकार के अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविरों का आयोजन किया जाता है एवं इसी कड़ी में सी.एम.एस. की मेजबानी में 27वाँ अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर आयोजित किया जा रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय शिविर में विभिन्न देशों से 
पधारे बच्चों को अलग-अलग देशों के लोक नृत्यों, लोक पर्वो, रहन-सहन, खान-पान आदि से परिचित कराने के साथ ही विभिन्न प्रकार की सामाजिक-साँस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस अन्तर्राष्ट्रीय बाल शिविर के प्रतिभागी बच्चों के ठहरने, खाने-पीने, खेल-कूद, ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण, चिकित्सा आदि की सारी सुविधाऐं सी.एम.एस. द्वारा उपलब्ध करायी जा रही हैं।



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति