दो दिवसीय किसान गोष्ठी

रायबरेली। दो दिवसीय किसान सम्मान दिवस/किसान मेले में आये प्रगतिशील किसान विश्वनाथ सिंह व जग्गी प्रसाद सिंह ने कृषि विविधिकरण खेती को बढ़ावा देने के साथ ही जैविक खेती करने पर भी बल देते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि किसानों कृषि उत्पादकता बढे और उनकी आय को दुगना हो यह तभी सम्भव होगा जब किसान कृषि विविधिकरण तथा जैविक खेती के माध्यम से खेती करना होगा। रसायनिक खादो के प्रयोग से मुक्त होकर पुरानी परम्परा वाली जैविक खाद का प्रयोग करके खेती को आगे ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि शिमला मिर्च, आलू, टमाटर, प्याज, मटर आदि की खेती उनके द्वारा जैविक खेती का प्रयोग किया गया है। फसल अच्छी है जनपद में छोटी जोत के किसान ज्यादा है। जिन्हें कृषि विविधिकरण के माध्यम से फूलों, फल, सब्जियां आदि भी उपज करनी होगी। मंगलम लान, फिरोजगांधी में सबमिशन आॅन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एवं टेक्नालाॅजी के योजनान्तर्गत किसान सम्मान दिवस/किसान मेला व किसान गोष्ठी के दुसरे दिन का शुभारम्भ जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। उन्होंने कहा कि उप कृषि निर्देशक एच0एन0 सिंह व जिला कृषि अधिकारी के साथ कृषि विभाग आदि सहित विभिन्न विभागों के स्टाल का अवलोकन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि कृषकों को जैविक खेती से संबंधित अत्याधुनिक कृषि तकनीकी ज्ञान की जानकारी देने के साथ ही किसानों को कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर देते हुए कहा कि 2022 में किसानों की आय को दुगना करने का लक्ष्य को पूरा करना है इसके लिए नवीन तकनीकी व आधुनिक कृषि को बढ़ाकर कृषि उपज बढाये। रबी योजना सम्बन्धी तैयारियों के बारे में बताया गया कि रबी का आच्छादन उत्पादन का लक्ष्य के सम्बन्ध में वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक विधि से खेती करने से उत्पाद बढ़ाया जा सकता है विषय पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि जीरो बजट से जैविक विधि द्वारा खेती करने से सम्भव होगा। जनपद में उत्तम किस्म के बीज व खादों की कोई कमी नही है। कृषि विकास सम्बन्धी जानकारियों को भली-भांति जानकर कृषि विकास में योगदान दें। कृषकों को फसलों से सम्बन्धित कृषि वैज्ञानिक/अधिकारियों द्वारा नवीन तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराये तथा उनकी कृषि सम्बन्धी समस्याओं का निराकरण भी किया जाये। केन्द्र सरकार किसानों की 2022 मंे दोगुनी आय करने का लक्ष्य है यह तभी संभव होगा जब किसान भी अपने मनमस्ष्तिक में कृषि के प्रति पूरी लगन से कृषि करें। 
 इस अवसर पर विशेषज्ञ, उप कृषि निदेशक एच0एन0 सिंह, जिला कृषि अधिकारी रवि चन्द्र प्रकाश ने किसानों से कहा कि किसान अपनी उपज बढाये साथ ही पराली न जलाये जाने के सम्बन्ध में घटनाओं को रोकने हेतु बताया कि किसान पराली/गन्ने की पतई अपशिष्ट को न जलाये एवं कृषि अपशिष्टों को समुचित प्रबन्धन कर कम्पोस्ट खाद तैयार करें साथ ही पराली को अपने नजदीकी निराश्रित गौशालाओं में उपलब्ध कराये। उप कृषि निदेशक एच0एन0 सिंह ने कहा कि पराली जलाये जाने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार व एनजीटी पूरी तरह से गम्भीर है। पराली व कृषि अपशिष्ट जैसे गन्ने की सूखी पत्ती या फसलों के डंठल इत्यादि भी न जलायें। माननीय राष्ट्रीय हरति न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश में कृषि अपशिष्ट को जलाये जाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध नियमानुसार अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने के निर्देश है। 2 एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों के लिए रू0 2500 प्रति घटना, 2 एकड़ से 5 एकड़ भूमि रखने वाले लघु कृषकों के लिए रू0 5000 प्रति घटना, 5 एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले बडे कृषको के लिए रू0 15000 प्रति घटना है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम की धारा-15 के अन्तर्गत पारित उक्त आदेशों का अनुपालन अत्यन्त आवश्यक है अन्यथा इसी अधिनियम की धारा 24 के अन्तर्गत आरोपित क्षतिपूर्ति की वसूली और धारा-26 के अन्तर्गत उल्लघंन की पुनरावित्त होने पर करावास एवं अर्थदण्ड आरोपित किया जाना प्रा.विधनित है एवं एक्ट संख्या 14/1981 की धारा 19 के अन्तर्गत अभियोजन की कार्यवाही कर नियमानुसार कारावास या अर्थदण्ड या दोनों से दण्डित कराया जायेगा। उक्त आदेश के अनुपालन में लेखपाल द्वारा क्षतिपूर्ति की वसूली की धनराशि सम्बन्धित से भू-राजस्व के बकाया की भांति की जायेगी। 
 इस मौके पर कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों जिला उद्यान, सिचाई, पशु चिकित्साधिकारी, प्रगतिशील किसानो ने कहा कि किसान प्रतिदिन अपनी खेत की निगरानी अवश्य करें फसल चक्र अपनाये तथा दलहनी एवं तिलहनी फसलों के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम व मछली पालन आदि के साथ ही कृषि विविधिकरण पर जोर दें।
 इस मौके पर भूमि संरक्षण अधिकारी विनय सिंह, अभयाज गुप्ता, अजेन्द्र सिंह, डा0 आर0के0 कनौजिया, डा. गोविन्द सिंह, एडी सूचना प्रमोद कुमार आदि अधिकारीगण उपस्थित थे।