सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जिला पोषण समिति की बैठक

राज्य पोषण मिशन के अन्तर्गत कुपोषण मुक्ति अभियान हेतु जिला पोषण समिति की बैठक मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार की अध्यक्षता में बचत भवन सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक मे मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि योजना को धरातल पर लाने का कार्य हम सबका है, इसलिए सभी सम्बन्धित विभाग समन्वय बनाकर कार्य करें।  उन्होंने कहा कि सभी नोडल अधिकारी व अभियान से जुड़े कर्मचारी मेहनत, लगन व इमानदारी से कार्य करें। इसके लिए आम जनमानस को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं को बचाने के लिए बच्चा पैदा होने लगभग कुछ घण्टे के बाद उसको मा का दूध पिलाना अत्यधिक जरूरी है इस पर सभी सीडीपीओ अधिकारी/कर्मचारी मुख्य सेविकाए, आगनबाड़ी कार्यकत्री इस पर ध्यान दें। इसके अलावा लाल श्रेणी कुपोषित बच्चों को पोषित की श्रेणी में लाये। जनपद के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिये कि गांव को कुपोषण से मुक्त करते हुए सुपोषित गांव बनाये जाने पर जोर दिया जाये। बैठक में सीएए अधिनियम 2019 के पम्पलेट जागरूकता हेतु दिये गये।
 प्रदेश से कुपोषण दूर करने के लिए सरकार, शासन प्रशासन पूरी तरह से दृढसंकल्पित है। पोषण मिशन अभियान का मुख्य उद्देश्य कुपोषण में कमी लाना है। उन्होंने बताया कि भारत का हर पांचवा कुपोषित बच्चा उत्तर प्रदेश का है। कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि खुले में शौच, दस्त, साफ पानी की कमी, अपर्याप्त भोजन, स्तनपान एवं उपरी आहार से बच्चे को वंचित रखना आदि कुपोषण के कारण रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एवं बच्चे के जन्म के बाद से 730 दिन (कुल 1000 दिन) तक बच्चे की सही देखभाल, मां को पोषक आहार देकर, आइरन का सेवन  प्रसव पूर्ण जांचे कराकर, नियमित टीकाकरण से बच्चों को कुपोषित होने से बचाया जा सकता है।
 बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद कुमार त्रिपाठी, एसीएमओं डाॅ0 खालिद रिजवान, समाज कल्याण अधिकारी, सी0डी0पी0ओ0, डीपीआरओ, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी गजेन्दर सिंह, खाद्य विपरण अधिकारी तथा नोडल अधिकारी उपस्थित रहें।


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति