प्रेम में असफलता के योग

वैदिक ज्योतिष एवं प्राच्य विद्या शोध संस्थान अलीगंज, लखनऊ के तत्वाधान मे 132 वीं मासिक सेमिनार का आयोजन वाराह वाणी ज्योतिष पत्रिका के कार्यालय में किया गया। सेमिनार का विषय ज्योतिष में प्रेम में असफलता के योग था, जिसमे डा. डी.एस. परिहार के अलावा आचार्य राजेश, पं. शिव शंकर त्रिवेदी, पं. के.के. तिवारी, इंजीनियर एस. पी. शर्मा, उदयराज कनौजिया, डां. पी.के. निगम. अनिल कुमार बाजपेई एडवोकेट तथा पं. आनंद त्रिवेदी आदि ज्योतिषियोें एवं श्रोताओं ने भाग लिया गोष्ठी में डी.एस. परिहार, पं. के.के. तिवारी, श्री उदयराज कनौजिया, इंजीनियर एस.पी. शर्मा तथा पं. आनंद त्रिवेदी ने अपने अनुभव और व्यक्तव्य प्रस्तुत किये। पं. आनंद त्रिवेदी ने बताया कि यदि जमांक मे यदि पंचमेश चतुर्थ भाव में जाये तो जातक एक तरफा प्रेम करता है, यदि पंचमेश 8, 8, या 12 वें भाव मे जाये तो भी एक तरफा प्रेम होगा यदि उपरोक्त योगों के साथ पंचमेश नवांश मे नीच का हो तो उपरोक्त फल सौ फीसदी फलित होगा के.के. तिवारी ने 1986 मे जंमे एक जातक के जमांक के आधार पर बताया कि इस कुण्डली मे पाराशर पद्धति के सू़त्र घटित नही हो रहे हैं। नाड़ी ज्योतिष के सूत्र के आधार पर इस जातक का प्रेम विवाह हुआ है। एस.पी. शर्मा जी ने बताया कि लव एफेयर मे शुक्र और चन्द्रमा का महत्वपूर्ण रोल होता है अतः इन ग्रहों का जंमाक मे बली होना अनवार्य है। यदि ये ग्रह निर्बल है, तो प्रेम असफल होगा सफल लव एफेयर हेतु लग्न, तृतीय भाव तथा पंचम भाव का परस्पर शुभ संबध होना अनिवार्य है। अन्यथा प्रेम असफल होगा सफल प्रेम हेतु 7, 9, 11 भाव का परस्पर संबध बनना जरूरी है। तभी लड़का-लड़की दोनों परस्पर प्रेम करेंगें यदि इनमे 2, 7, 8, भाव भी शामिल हो जाये तो एफेयर मैरिज मे बदलेगा श्री उदयराज कनौजिया ने बताया कि के.पी. सिस्टम के अनुसार 2, 5, 7, व 12 भाव लव एफेयर को बताते है। इन भावों से 12 भाव एफेयर मे बाधक होते है। जैसे लग्न, चतुर्थ, षष्ठ और दशम भाव यदि एफेयर के ग्रह योगों मे इनके बाधक भाव या इनके स्वामी ग्रह भी शामिल हो जाये तो एफेयर असफल होगा डा. परिहार मे बताया कि नाड़ी एस्ट्रोलाजी मे शु़क्र मंगल लव एफेयर के कारक ग्रह हैं। नाड़ी ज्योतिष मे बुध केतु का योग या परस्पर त्रिकोण संबध लव एफेयर देता है। यदि इस योग पर गुरू या शुक्र का भी संबध हों तो एफेयर मैरिज मे बदलेगा पाराशर ज्योतिष के अनुसार यदि लग्न या चन्द्र कुण्डली के पंचमेश और सप्तमेश यदि परस्पर 6, 8, या 12 वें भाव मे हो तो प्रेम असफल होगा हस्तरेखा मे चन्द्र व शु़क्र पर्वत से निकल कर भाग्य रेखा को जाने वाली रेखायें एफेयर को बताती है। यदि ये रेखा भाग्य रेखा से मिलेगी तो लव एफेयर मैरिज मे बदलेगा यदि ये रेखायें भाग्य रेखा से ना मिलें तो लव एफेयर असफल होगा। संपन्न इस गोष्ठी की अध्यक्षता डा. डी.एस.परिहार ने की।