मंत्र शक्ति से महामारी का नाश

यह घटना संवत् 2017 सन् 1958 की है राजस्थान के भासू ग्राम जिला टोंक मे चैत्र शुक्ल नवमी से पूर्णिमा तक विष्णु याग (यज्ञ) का आयोजन किया गया था जिसे सम्पन्न कराने वाराणसी के प्रसिद्ध वैदिक विद्वान प. वेणीराम जी गौड़ आये जो यज्ञ से तीन दिन पूर्व ही आ गये हम लोगों ने उनसे प्रार्थना की यहाँ 20-25 मील के आस पास अनेकों गाँव मे चेचक की भयंकर महामारी फैल गई है। अकेले भासू ग्राम मे ही छह माह से लेकर 14 साल के करीब 50 बच्चे रोज मर रहें है। जिससे हमारा यज्ञ के प्रति उत्साह नष्ट हो गया है पण्डित जी ने कहा कि आप लोग चिन्ता ना करें आज रात मंैं एक अनुष्ठान करूँगा जिससे आप सबको इस महामारी से छुटकारा मिल जायेगा। उन्होंने रात को 9 बजे गाँव के चैराहे पर नवग्रह आदि का पूजन करके दो ब्राह्मणों को अलग-अलग रात भर मंत्र जाप करने का निर्देश दिया और कहा कि जप पूरा होने तक आप लोग आसन नही छोड़े। रात भर दीपक ना बुझ पाय इसकी भी व्यवस्था की गई जप सम्पन्न हुआ तो प्रातः उन्होंने यज्ञ किया दूसरे दिन चमत्कार हो गया जहाँ 50 बच्चे रोज मरते थे वहाँ केवल एक बच्चे की मौत हुयी और अगले दिन से आस-पास के सभी गाँव से ना केवल महामारी खत्म हो गई बल्कि कोई भी मौत नही हुयी गांव वालों ने आनंद पूर्वक यज्ञ सम्पन्न करवाया जब वे विद्वान वापस लौट रहे थे तो मैने उनसे पूछा कि आपने महामारी रोकने के लिये कौन सा अनुष्ठान किया था तो वे बोले कि उस रात मैने एक ब्राह्मण को दुर्गा सप्तशती के इस मंत्र का सम्पुट लगा कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने को कहा था। 
 बालग्रहाभिभूतानां  बालानां शान्ति कारकम्।
 संघातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम् ।।
 और दूसरे ब्राह्मण को शीतलाष्टक के इस मंत्र का सम्पुट लगा कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने को कहा था
 शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
 शीतले त्वं जगद्धात्री, शीतलायै नमो नमः।।
यह दोनो मंत्र शीतला माता (चेचक) के भंयकर प्रकोप को तत्काल समाप्त कर देते है।