होली में तंत्र का महत्व

भारतीय तंत्र शास्त्रों के तंत्र मूहर्तो में तीन रात्रियों का विषेश महत्व है। कालरात्रि (महानिषा) दीपावली की रात्रि कार्तिक अमावस्या, नवरात्रि तथा होलिका रात्रि। इन रात्रियों में की गई छोटी सी साधना भी अधिक फल प्रदान करती है। प्रत्येक मनुष्य कठिन, जटिल और लम्बी तंत्र साधना नहीं कर सकता है। इस बात को समझते हुये, हमारे पूवजों ने हजारों वर्ष पूर्व ही हजारों सरल साधनाओं और कष्ट निवारण तरीकों को विकसित किया किया था। इनमें टोना-टोटका का विषेष महत्व है, जो सारे संसार में पाये जाते हैं। टोने में स्थानीय भाषा के मंत्रों का प्रयोग किया जाता है। तथा टोटका में बुरे प्रभाव को हटाने व शुभ प्रभाव को पैदा करने के लिये कुछ खास वनस्पतियों, खनिजों तथा जीव-जन्तुओं का विषेष मूहूर्त तथा विषेष तरीके के प्रयोग किया जाता है। इनकी संख्या लाखों में है। यहाँ पर हम जीवन की समस्याओं से सम्बन्धित कुछ सरल उपायों का वर्णन है। जो कि होली की रात्रि में सरलता से फलीभूत हो जाते हैं।
शत्रु बाधाः-  यदि व्यक्ति शत्रुओं से परेषान चल रहा हो तो व्यक्ति को होली की रात्रि में लाल या सफेद गुंजा (रत्ती) के 7 दाने लेकर पीले वस्त्र में बाँधकर जलती होलिका के सात चक्कर लगाकर बाँह में बाँध ले या पास रखे तथा होली को प्रणाम करे।
- लाल गँुजा के दाने होली जलने के पूर्व सूर्यास्त में परस्पर मिलाकर शत्रु के घर या कार्यालय में रख दें। शत्रु आपसी कलह में नष्ट हो जायेगा।
- धन संचयः- होली की रात एक रुपया का सिक्का तथा काली गुँजा का एक बीज लेकर जमीन में दबा दें। यदि कोई शत्रु बार-बार आप पर या घर पर कहीं कोई तंत्रिक वस्तु रखकर टोना-टोटका करता है, तो होली को मुख्य द्वार पर लाल वस्त्र में 7 दाने लाल गुँजा के बाँधकर लटका दें। घर पर तथा आप पर होने वाले तंत्रिक प्रहार बेअसर हो जायेंगे। यदि प्रमोषन में बाधा आ रही हो तो जितने वर्ष की नौकरी हो चुकी हो उतने गोमती चक लेकर ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करते हुये जलती होली की परिक्रमा करते जायें और एक गोमती चक होली मे डालते और अपनी मनोकामना याद करते रहे। या होली के दिन सायंकाल को दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करके इसमें लाल रंग के चावल, कागज पर अपना नाम गोत्र पिता का नाम व मनोकामना लिखकर शंख को लाल वस्त्र मे लपेटकर रखें नित्य धूप-दीप दिखायें। मन चाहे तबादले हेतु घर मे सूर्य यंत्र स्थापित करके 41 दिन तक लाल पुष्प से पूजा करें।     
- वर या कन्या विवाह में अड़चन आ रही हो तो रामचरित मानस का षिव-पर्वती विवाह प्रसंग का पाठ होली से प्रारम्भ कर नित्य 41 दिन षिव परिवार के चित्र के सामने करें।
- आपके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हो तो होली की रात आटे का एक चैमुखी दीपक बनायें उसमें सरसों का तेल, सेन्दूर, एक सिक्का, एक बताषा डालें तथा होली की आग से इसे जलाकर किसी चैराहे पर रख आयें। बाधा दूर होगी।
- यदि आपका कोई काम सरकारी विभाग में लटक गया हो है। तो होली दहन के पूर्व मदार जड़ के 7 टुकड़े लेकर होली की उलटी परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा पर एक टुकड़ा होली में डालते जायें। बिना बोले घर आ जायें।
- षिक्षा में बच्चा फेल होता होता हो या पढ़ने में मन ना लगे या कम नम्बर आते हो तो होली दहन के पूर्व होली को सूती धागे से चारो ओर नाप कर उसकी बत्ती बनाकर होली मे दहन के समय डाले व बच्चे को चार मुखी रुद्राक्ष या गणेष रुद्राक्ष धारण करा दे।
- यदि आपका उधार दिया धन डूब गया हो तो जली होली का कोयला लेकर किसी वीरान जगह पर कोयले से उस व्यक्ति का नाम लिखें। उस नाम को हरे गुलाल से ढक दें। वापस आ जाये। आपका धन मिल जायेगा। 
- पत्नी या प्रेमिका रूठ गई हो तो होली की रात काली गुँजा के 3 या 5 दाने एक छोटी शीषी में डालकर शहद भरकर व कागज मे उसका नाम लिखकर रखेलें। उस स्त्री का ध्यान करते रहे। पत्नी वापस आ जायेगी। शहद की सीषी में कागज और गुंजा के दाने डालें।