सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

समाज की एकता का जयघोष

विशाल पाल (धनगर ) समाज की सामाजिक तथा शैक्षिक संगोष्ठी का अभूतपूर्व सफलता के साथ के साथ कुण्डा के पाल नगर (टाडा) में आयोजित हुआ। इस अवसर पर विशेषरूप से प्रतिभाशाली बच्चों तथा समाज सेवियों को प्रेरणादायी यथार्थ गीता, महापुरूषों की गाथा आदि पुस्तकें तथा देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने भारी संख्या में उपस्थित होकर प्रतिभाशाली बच्चों तथा समाजसेवियों अपने सारगर्भित विचारों द्वारा सभी का उत्साह बढ़ाया। समारोह का संयोजन तथा आयोजन मुख्य रूप से वैज्ञानिक एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डा. सीएल शीलू पाल तथा उनके परिजनों-सहयोगियो रामपाल, गिरधारी पाल, पप्पू कुमार, दीपक पाल, सोनू पाल, अनिल कुमार, विपिन चन्द्र, कुशेन्द्र पाल, अजय पाल, एडवोकेट के द्वारा अतिथि देवो भवः की उच्च भावना से किया गया। संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ शैक्षिक चिन्तक पी.के. सिंह पाल तथा धामु पाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, शेफर्ड टाइगर फोर्स इण्डिया ने किया। कु. निकिता पाल तथा युवा गौरव पाल ने विद्वता तथा मौलिकता से भरे अपने भाषण द्वारा बच्चों को उच्च शिक्षा की राह पर आगे बढ़ने का उत्साह जगाया। शेफर्ड टाइगर फोर्स के युवाओं की भारी संख्या में भागीदारी थी। 
 समारोह का शुभारम्भ लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के चित्र के समक्ष दीप जलाकर तथा पुष्पाजांलि से हुआ। बच्चों ने बाल सुलभ शब्दों में तथा युवाओं ने अपने ओजस्वी विचार प्रस्तुत करके सभी को समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। समारोह में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ सदर के विधायक राजकुमार पाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह की अध्यक्षता क्रान्तिकारी व्यक्तित्व के धनी जे.पी. धनगर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय धनगर महासभा ने की। सर्वश्री राजेन्द्र प्रसाद पाल, प्रदेश अध्यक्ष, अपना दल (एस), बाबू राम पाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्र उदय पार्टी, आरडी पाल, बलराम पाल, एडवोकेट विवेक पाल, राकेश कुमार पाल, राम सागर पाल, शीतला लाल पाल, कमलेश पाल, जगजीवन पाल, राजू कुमार पाल, केके पाल, श्रीमती नीलम पाल, छोटे लाल पाल, पूर्व प्रधानाचार्य, अशोक पाल, राम अभिलाष पाल, कमलेश पाल, शीतला प्रसाद पाल आदि ने अपने संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित सम्बोधन तथा देश भर से पधारकर अपनी उपस्थिति से सभी को अत्यधिक उत्साहित किया। सभी राजनैतिक पार्टियों के राजनेताओं एक मंच पर एकत्रित होकर समाज की एकता का जयघोष किया। सभी के भाषणों का सार यह था कि शिक्षा ही व्यक्ति, परिवार, समाज तथा विश्व के विकास की जननी है। शिक्षा वह शक्तिशाली हथियार है जिसके उपयोग के द्वारा विश्व को बदला जा सकता है।   
 लखनऊ की श्रीमती उमा सिंह पाल तथा वोटरशिप समर्थक युवा विश्व पाल की ओर से ‘‘जय जगत तथा वोटरशिप बुक स्टाल’’ लगाया गया जो कि समारोह का विशेष आकर्षण के केन्द्र रहा। इस बुक स्टाल का संयोजन जय जगत तथा वोटरशिप विचार के चिन्तक पी.के. सिंह पाल द्वारा किया गया। इस जय जगत तथा वोटरशिप बुक स्टाॅल में उपलब्ध पुस्तकों पाल भारती, पाल बघेल टाइम्स, पाल टूडे, धनगर पाल कुटुम्ब स्मारिका (कानपुर), जय जगत के विचारों से ओतप्रोत प्रसिद्ध शिक्षाविद् डा. जगदीश गांधी द्वारा लिखित तथा वोटरशिप विचार के जन्मदाता विश्वात्मा द्वारा लिखित पुस्तकों के द्वारा संदेश दिया गया कि गड़रिया-शेफर्ड सार्वभौमिक अर्थात यूनिवर्सल जाति है जो कि सारी दुनिया में पायी जाती है। इसलिए हमारे मुद्दे - जय जगत तथा वोटरशिप जैसे सार्वभौमिक होने चाहिए। जय जगत तथा वोटरशिप के विचार इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जय जगत, जय जगत पुकारे जा दूसरों के हित के वास्ते अपना हित विसारे जा। 
 समारोह के प्रारम्भ में बोलते हुए जय जगत तथा वोटरशिप विचार के चिन्तक पी.के. सिंह पाल ने कहा कि जाति-धर्म तथा संकुचित राष्ट्रीयता के नाम से दुनिया में बहुत खून बहा है। और वर्तमान में भी बह रहा है। अब समय आ गया है इस सच्चाई को अब साहस के साथ दुनिया को बताना है कि ईश्वर एक है, धर्म एक है तथा मानव जाति एक है। 
 आगे उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्या बाई ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर समाज की सेवा की थी। उन्होंने अपने होलकर राज्य से बाहर जाकर अन्य राज्यों में उस समय की आवश्यकता के अनुसार मंदिर, कुऐं, धर्मशालायें बनवायी। इस प्रकार उनके प्रेम का दायरा अपने राज्य रूप देश तक ही सीमित न होकर सारी मानव जाति के लिए था। उनका नारी हृदय कभी युद्ध के पक्ष में नहीं रहा था। वह युद्धों में किसी का खून बहाना सहन नहीं कर सकती थी।
 श्री पाल ने कहा कि लेकिन अब हमें युगानुकूल विचारों को भी अपनाना होगा। मैं भी अपनी जाति तथा देश से बहुत प्यार करता हूं। मेरी राष्ट्रीयता जय जगत की शिक्षा, वोटरशिप, वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वधर्म समभाव, विश्व नागरिकता, अहिंसा, एकता तथा विश्व बन्धुत्व की प्रबल समर्थक है। इन्हीं सार्वभौमिक विचारों को पहंुचाने के लिए मैं अपने सीमित साधनों तथा अल्प सहयोग के बलबूते पहुंचाने का भरसक प्रयास करता हूं। दुनिया को पांच वीटो पाॅवर से लैश शक्तिशाली देश परमाणु बमों से चला रहे हैं। भारत को दुनिया को कानून तथा संविधान से चलाने के लिए लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई विश्व संसद के लिए पहल करनी चाहिए। इसके लिए हमारी संस्था सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ वल्र्ड लीडर्स की श्रेणी में अपना स्थान बना लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी जी तथा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को निरन्तर प्रेरित करती रहती हैं। 
 वर्तमान में विश्व की अधिकांश सरकारें घातक हथियार बनाने तथा एकत्रित करने की होड़ में शामिल हैं। यह एक सच्चाई है कि देश की जनता टैक्स वेलफेयर के लिए देती है लकिन दुनिया भर की सरकारें उसे सुरक्षा के नाम पर वारफेयर पर खर्च करती हैं। देश की जनता रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित रहती हैं। यदि हमारी जाति के 20-22 करोड़ लोग एकजुट होकर जय जगत तथा वोटरशिप की आवाज बुलन्द कर दें तो यह कार्य बहुत आसान हो जायेगा। 
 शैक्षिक विचारक प्रदीपजी ने अपने बारे में बताया कि मैं 38 वर्षों से जय जगत की शिक्षा देने वाले सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ से जुड़ा हूं। हमारा मानना है कि जय जगत की शिक्षा तथा वोटरशिप दो सबसे शक्तिशाली हथियार हैं जिनके उपयोग के द्वारा विश्व को बदला जा सकता है। मैं लगभग 12 वर्षों से वोटरशिप विचार के जनक विश्वात्मा भरत गांधी से जुड़ा हूं। जीवन के अंतिम पड़ाव में आकर मेरा पूरा ध्यान जय जगत तथा वोटरशिप पर टिका है। हमें दूसरों की खुशी के लिए नहीं वरन् अपनी आत्मा में वास करने वाले परमात्मा को प्रसन्नता के लिए अपना कार्य करते रहना चाहिए। उत्साह सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि बनो अहिल्या बाई होल्कर अपनी आत्म शक्ति दिखलाओं तथा सभी को लोकमाता के ‘सबका भला - अपना भला’ के संदेश का अपनाना चाहिए। 
 श्री पाल ने जय जगत के विचार से जुड़ने के लिए आजतक न्यूज चैनल पर रोजाना प्रातः 5.50 बजे से प्रातः 6.20 तक प्रसारित होने वाले सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के कार्यक्रम को सपरिवार देखने का निवेदन किया। इसके साथ ही वोटरशिप के विचार से जुड़ने के लिए यूट्यूब चैनल पर विश्वात्मा भरत गांधी के वीडियो सुने जा सकते हैं। श्री पाल ने कहा कि निकट भविष्य में दिल्ली जाने वाले परिजन कालका जी में स्थित बहाई मंदिर अवश्य देखने जायें। वहां से सर्वधर्म समभाव के संदेश की सीख लेकर सारे समाज में फैलाने में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाये। बहाई धर्म की सीख है कि ईश्वर एक है, धर्म एक है तथा मानव जाति एक है। 
 श्री पाल ने अपने सम्बोधन के अन्त में सभी को लखनऊ में प्रत्येक रविवार को सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर (विशाल खण्ड-2) में आयोजित विश्व एकता सत्संग तथा पारिवारिक परिचय सम्मेलन में अपनी सुविधानुसार सपरिवार पधारने का हार्दिक निमंत्रण दिया। यह सत्संग ठीक प्रातः 10 बजे शुरू होकर लगभग दोपहर 12.30 बजे समाप्त हो जायेगा। इसलिए कृपया समय पर पधारकर पूरा वैचारिक लाभ लें तथा उसे अन्य लोगों में पहुंचाने का सशक्त माध्यम बने। यह विश्व एकता सत्संग एवं परिचय सम्मेलन प्रत्येक रविवार को बिना नागा इसी स्थान तथा समय पर विगत 2001 से अर्थात 19 वर्षों से आयोजित हो रहा है। 



 


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति