समीक्षात्मक परिचर्चा में छाईं सरिता श्रीवास्तव की रचनाएं

महिला काव्य मंच प्रयागराज इकाई के तत्वावधान में आनलाइन समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रयागराज के मंचों की सुपरिचित कवियत्री सरिता श्रीवास्तव के दोहा संकलन सरिता सतसई और कविताओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रयागराज की वरिष्ठ कवयित्रियों के मध्य चर्चा की गई।
वीर रस, व्यंग्यात्मक काव्य लेखन में रुचि लेने वाली सरिता श्रीवास्तव कविताओं में भाषा प्रवाह और शब्दों में ओज के मुखर भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं। उच्च शिक्षा से जुड़ी सरिता श्रीवास्तव काव्य के हर क्षेत्र में मजबूत दखल रखती हैं। उक्त विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ कवियत्री उमा सहाय ने सरिता श्रीवास्तव की कविता मे मानवीय पक्ष का खूबसूरत चित्रण महसूस किया। उनका कहना है कि क्रोध जैसे मानवीय संवेगों को कवियत्री को एकांगी न रख कर समाधान तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ कवियत्री कविता उपाध्याय के अनुसार सरिता एक समर्थ कवियत्री के रुप में अपना स्थान बना रही है। सरल भाषा और सुगम विषय वस्तु के कारण उनकी कविताएं ग्राह्य हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रेमा राय को कवियत्री की कविताओं में प्रकृति, देश प्रेम मानवीय मूल्यों सहित भौतिकता वादी संसार का हर रुप नजर आता है। कहीं कवियत्री उससे आहत है तो कहीं समाज को उनके प्रति सचेत करती दिखाई देती है। सैनिकों की पुकार जैसी कविता में देश प्रेम और प्रकृति जैसी कविता में प्राकृतिक दोहन का दर्द सहित दोहों में मौजूद मानसिक संवेदनहीनता की कमी के साथ जीवन उपयोगी बातों का समावेश है।
प्रेरणा नामक कविता में हताशा से दूर रहने के और मानवीय संवेदनाओं को सहेजने की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। यह विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ’जया मोहन’ ने कहा वर्तमान व्यवस्था में सुधार के लिए कवियत्री सचेत भी करती है और दूसरी ओर लोभ मोह माया से विरत रहने की बातें करती हैं। इसके अलावा उनके काव्य शैली की सुन्दरता भी काबिले तारीफ है।
वरिष्ठ रचनाकार देवयानी मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत कविता और वर्तमान परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में कुछ कुंठा और कुछ छोभ के स्वर सरिता की कविता में देखती है।
सरिता सतसई के आधार पर समाज के हर रंग कवियत्री ने प्रस्तुत किए हैं। प्राकृतिक दोहन का दर्द, देश प्रेम और मानवीय भावनाओं का बाहुल्य कवियत्री की काव्य भूमि के मुख्य बिंदु हैं। यह विचार व्यक्त किए वरिष्ठ रचनाकार मीरा सिन्हा ने। उन्होंने कहा कि भाषा सरल और लेखन शैली सुगम होने के कारण