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प्रिया की शायरी में सौंदर्य के सुंदर भाव: ऋतंधरा

प्रयागराज। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् की कलम से सौंदर्य का सुंदर भाव, मनुष्य की जीवन शैली, सामाजिक रीति-रिवाजों पर कटाक्ष आपातकालीन स्थिति की व्यथा मानवता से प्रेम और सिंगार का भाव पिरोते रोते हुए अपनी रचना में एक सुंदर माला बनाने का प्रयास किया है। सहज और सरल शब्दों की अभिव्यक्ति जन-जन तक पहुंचेगी, इस सकारात्मक भाव का सोच लिए अपनी रचनाओं में बड़े ही आत्मविश्वास और दृढ़ता से कहना एक सच्चे कलमकार की निशानी है, जो प्रिया की शायरी में मौजूद है। यह बात गुफ्तगू द्वारा आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा में कवयित्री ऋतंधरा मिश्रा ने प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम की शायरी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते कही। नोएडा के मशहूर गजलकार विज्ञान व्रत के मुताबिक प्रिया श्रीवास्तव में एक सर्जनात्मक तड़प दिखाई पड़ती है। अपने मन को रचनाओं में उकेरने के लिये प्रिया का शब्द-चयन उनके कहन को एक खास किस्म की धार देता हुआ नजर आता है। मुझे विश्वास है कि शीघ्र ही प्रिया का ‘अपना वैशिष्ट्य’ उनकी गजलों के द्वारा एक पहचान को प्राप्त करेगा। समुन ढींगरा दुग्गल ने कहा कि प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ उम्दा शायरा हैं। इनकी गजलों में शालीन स्पष्टवादिता, अनुभव जन्य परिपक्वता और कोमलता दिखाई देती है। इस की
अनुभूति पाठकों को गजलें पढ कर होती है। इनके अशआर आशावादी हैं। जीवन के कई पक्षों पर इन्होंने अशआर कहे हैं, जो काबिले-तारीफ हैं।
शैलेंद्र जय ने कहा कि देखने-सुनने में जितनी चमकदार हैं ये गजलें, उतनी ही पढ़ने में पाठक को प्रकाशित करने वाली हैं। दिव्यम की शायरी सीधी-सादी जुबान में प्यार मोहब्बत की बातें करती हुई सादगी से भरे सौंदर्य वाली शायरी है, जो हमें भली भी लगती है और जुबान पर चढ़ भी जाती है। वस्तुतः यह जीवन के बहुत सारे क्षणों को अपने में समेट लेने वाली रचनाएं हैं। इनके अलावा जमादार धीरज, मनमोहन सिंह तन्हा, नरेश महारानी, अनिल मानव, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, डॉ. ममता सरूनाथ, संजय सक्सेना, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’, डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’, सागर होशियारपुरी और रचना सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। बुधवार को कुशीनगर के शायर डाॅ. इम्तियाज समर की गजलों पर परिचर्चा होगी।


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पक्षी आपका भाग्य बदले

मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

भारतीय ज्योतिशशास्त्र में भविष्यकथन के सैकड़ों सूत्रो का वर्णन है। इन्ही सूत्रों मे से एक है परिवर्तन योग जिसका वर्णन पाराशरीय और नाड़ी ग्रन्थों दोंनों मे पाया जाता है। हाँलाकि दोनो प्रकार के ग्रन्थों में इन सूत्रों को विभिन्न तरीको से प्रयोग किया गया है ज्योतिष मे परिवर्तन योग के तीन रूप पाये जाते हैं। 1. भाव परिवर्तन 2. राशि परिवर्तन 3. नक्षत्र परिवर्तन  भाव परिवर्तन पाराशरीय व कुछ नाड़ी ग्रन्थों जैसे षुक्र नाड़ी मे इसके सूत्रो का वर्णन पाया जाता है। जो भावा के स्वामियो के बीच स्थान परिवर्तन से बनता है। जैसे चतुर्थेश षष्ठ भाव मे जाय और षष्ठेश चतुर्थ भाव मे जाय। इसके भी तीन भेद हैं। 1. दो शुभ भावों के स्वामियों का परस्पर परिवर्तन जैसे लग्न व पंचम भाव का परिवर्तन या दो केन्द्रेशों का परिवर्तन या केन्द्र और त्रिकोण भाव मे परस्पर परिवर्तन। 2. दो त्रिकेशांे का परिवर्तन जो विपरीत राजयोग बनाता है। 3. किसी केन्द्रेश या त्रिकोणेश का त्रिकेश से परिवर्तन। जैसे दशमेश का द्वादेश से परिवर्तन या पंचमेश या द्वादेश के बीच परिवर्तन। 2. ग्रह या राशि परिवर्तन  इसका वर्णन स्व. आर. जी. राव द्वारा अनुवादित और

जेल जाने के योग

ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली के आठवें मतांतर से बारहवें भाव से कारावास तथा सजा का विचार किया जाता है। कुंडली के इस घर में राहु अगर अष्टमेश के साथ हो तो उसके अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को किसी बड़े अपराध के कारण जेल जाना पड़ता है। शनि  मंगल और राहू मुख्य रूप से यह तीन ग्रह एवम् इनका आपसी सम्बन्ध जेल के कारक है। शनि व 12 भाव सजा का कारक है। छठा भाव व मंगल राहू अपराध के कारक है। अगर किसी व्यक्ति की कुण्डली में मंगल और राहु एक साथ किसी भाव में बैठकर युति करते हैं तो जेल योग बनता है केतु रस्सी बेड़ी हथकड़ी का कारक ग्रह हैं अशुभ मंगल व राहु के बीच दृष्टि संबंध बनता हो तो अंगारक योग की वजह से ऐसा इंसान हिंसक स्वभाव वाला हो जाता है और अपराध करता है जिससे जेल जाना पड जाता है। शनि मंगल व राहु मुख्य रूप से जेल यात्रा कराने का भी योग बनाते हैं और इनकी युति या आपस में दृष्टि इस तरह की स्थितियां बना देती है कि आखिर इंसान को जेल जाना ही पड जाता है। जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रह समान संख्या में लग्न एवं द्वादश तृतीय एवं एकादश, चतुर्थ, दशम, षष्ठ एवं अष्टम भाव में स्थित हो तो यह बंधन योग बनाता है यह स्थिति