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बुखार को नजरदाज नही करना चाहिए

एक्यूटइन्सेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुखार एक गम्भीर बीमारी है जिसके कारण मृत्यु या अपगता भी हो सकती है। कोई भी बुखार दिमागी बुखार हो सकता है इसलिए बुखार को नजरदाज नही करना चाहिए। एक जुलाई से प्रदेश के सभी जनपदों जिसमे रायबरेली जनपद भी शामिल है। विशेष संचारी रोग नियंत्रण अन्य जनपदों के भांति जनपद में दिमागी बुखार से लड़ने के लिए दस्तक अभियान शुरू किया जा रहा है। जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना ने मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संजय कुमार शर्मा सहित समस्त एमओआईसी अन्य समन्वयक विभागों निर्देश दिये है कि द्वितीय संचारी रोग नियंत्रण अभियान को प्रभारी तरीके से चलाये तथा सफल बनाये। कोविड-19 कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत रखते हुए विशेष संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान के प्रति भी जागरूकता को बढ़ाना चाहिए तथा अभियान को जन-जन से जोड़ने का आहवान किया गया तथा बचाव बीमारियों में महत्वपूर्ण तरीका है जिसे जानना चाहिए। 
 जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल ने बचत भवन के सभागार में द्वितीस संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान की अन्र्तविभागीय समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि कोविड-19 के संक्रमण सहित व स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकाल सरकार द्वारा किये जा रहे उपचार प्रयास सोशल डिस्टेसिंग व मास्क आदि के साथ घर-घर दस्तक के माध्यम से किया जा जाये। जनपद रायबरेली में भी अभियान को बेहतर तरीके से संचालन के निर्देश दिये गये है। दिमागी बुखार को नियंत्रित करने से सबसे बड़ी समस्या इलाज में देरी है। दस्तक अभियान दिमागी बुखार से बचाव एवं नियंत्रण के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार अभियान है इस में स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर 1-15 वर्ष के आयु के बच्चों के माता-पिता को बीमारी से बचाव एवं उपचार की जानकारी देगे। कोई भी बीमारी दिमागी बुखार हो सकता है। ऐसी स्थिति में इलाज में देरी न की जाये। मुख्य विकास अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य विभाग की अगुवाई में चलाए जा रहे संचारी रोग नियंत्रण तथा दस्तक अभियान ग्राम समाज, पंचायती राज, नगरीय विकास शिक्षा, बाल विकास परियोजना, कृषि, पशुपालन, स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभाग का सयुक्त प्रयास है वे भागीदारी कर रहे है। 
 मुख्य विकास अधिकारी ने सीएमओं को निर्देश दिये कि अभियान के अन्तर्गत प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर दस्तक सामाजिक दूरी बनाते हुए व मास्क का प्रयोग करते हुए दें और दिमागी बुखार से बचाव और उपचार के तरीके बताएगे। वह लोगों को बताएंगे कि बुखार आते ही मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाए, अपने घरों में और आस-पास सफाई रखें, जल भराव न होने दें, मच्छरों तथा चुहे-छछून्दरों से बचाव करें, स्वच्छ पेय जल का उपयोग करें और पशु-बाड़ों में सफाई रखें। या छोटे-छोटे उपाय बीमारियों के प्रकोप तथा इन से होने वाली क्षति को काफी हद तक कम कर सकते है।
 मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संजय कुमार शर्मा द्वारा बताया गया कि इस अभियान के अन्तर्गत 1 जुलाई से 31 जुलाई के बीच जन जागरूक भी किया जायेगा। अभियान के दौरान जानकारी के साथ दिमागी बुखार पर चैतरफावार भी होगा, जिसमें नियमित टीकाकरण के अन्तर्गत जेई टीकाकारण, मच्छरों से बचाव के लिए फाॅगिंग, बुखार ग्रस्त कटाई, नालियों की सफाई, हैण्डपम्पों की मरम्मत और शौचालय निर्माण आदि शामिल है। प्रत्येक बच्चा अनमोल है और सही जानकारी एवं सही समय पर दिया गया इलाज उनकी जान बचा सकता है। बैठक में प्रोजेक्टर के माध्यम से अभियान के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया।
 इस मौके पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन राम अभिलाष, सीएमएस एन0के0 श्रीवास्तव, एसीएमओं डा0 नागेन्द्र प्रसाद, जिला मलेरिया अधिकारी रितु श्रीवास्तव सहित एडी सूचना प्रमोद कुमार समस्त एमओआईसी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


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