दार्शनिकता के साथ ही प्रासंगिकता से पूर्ण हैं कविता की कविताएं: मीरा सिन्हा

महिला काव्य मंच प्रयागराज ईकाई के तत्वावधान में एक समीक्षात्मक परिचर्चा का आयोजन किया गया, जो कि प्रसिद्ध कवयित्री कविता उपाध्याय की कविताओं पर केंद्रित था। परिचर्चा में नगर की वरिष्ठ महिला साहित्यकारों ने भाग लिया। 
वरिष्ठ रचनाकार मीरा सिन्हा ने कविता उपाध्याय की कविताओं के विषय में कहा, विस्तृत विषय वस्तु और सुस्पष्ट शब्दावली के साथ ही कविता जी उन्मुक्त विचारों के साथ अपनी कविताएं प्रस्तुत करती हैं। हमारा सौभाग्य है कि मुझे उनका सानिध्य प्राप्त है। आपकी रचनाएं समय अनुकूल, सरल और बोधगम्य हैं। कविता जी मधुर कंठ की स्वामिनी है और मंच पर एक सशक्त हस्ताक्षर के रूप में मधुर कंठ के साथ प्रस्तुत होती हैं। 
हिंदी के क्षेत्र में जाना पहचाना नाम डॉ सरोज सिंह ने कवयित्री की कविताओं के विषय में अपनी बात कहते हुए कहा, कविता जी की कविताएं अत्यंत प्रासंगिक हैं और सामाजिक विषयों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, आप कहीं भारत चीन के वर्तमान स्थितियों का रेखांकन करती हैं, तो कहीं बेटियों की मार्मिक दशा का वर्णन करती हैं। जिंदगी के दार्शनिक पक्ष की झलक भी मुमकिन नहीं जैसी कविताओं में सहज ही देखने को मिल जाती है।
प्रयागराज के वयोवृद्ध कवित्री उमा सहाय ने कविता उपाध्याय की कविताओं में विचार, भाषा और भावों की परिपक्वता नजदीक से महसूस की। उन्होंने कहा, आपकी कविता में देश, समय और समय के प्रति सजगता स्पष्ट दिखाई देती है। दार्शनिकता से परिपूर्ण कविताएं विशेष रुप से ध्यान आकर्षित करती हैं। 
प्रयागराज की वरिष्ठ कवयित्री प्रेमा राय जी ने कहा कि कविता जी मेरी सुपरिचित परम प्रिय सहेली हैं इनके काव्य सौष्ठव से मै सुपरिचित हूं। बहुत ही सरल ,सुबोध और मार्मिक शैली में अपने मंतव्य को सुमधुर संगीत की लड़ियों मे पिरोकर श्रोता के हृदय को स्पर्श करने की कला मे कविता जी निपुण हैं।
प्रयागराज की वरिष्ठ साहित्यकार देवयानी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि कविता उपाध्याय जी का रचना संसार विस्तृत है। कुछ कविताएं मुझे आनायास ही हमेशा सुनने के लिए बेबस करती हैं। बात नई अंदाज नया शीर्षक से कविता उनकी पहचान बन चुकी है। 
वरिष्ठ साहित्यकार जया मोहन ने कविता उपाध्याय की रचनाओं से अपना गहरा लगाव व्यक्त करते हुऐ कहा, विचारों के संप्रेषण में कविता जी सर्वदा सक्षम हैं। 
डॉ पूर्णिमा मालवीय ने कविता उपाध्याय के लेखन के बारे में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा, आपकी कविताओं में समयानुकूल विविधता है। तमाम सवाल और संदेश आपकी कविताओं में सहज ही उपलब्ध होते हैं, और आकर्षित करते हैं। 
डॉ अर्चना पांडे ने कविता जी की काव्य यात्रा के बारे में अपनी राय रखते हुए कहा कि कविता जी के कविताओं में जीवन, समाज और समय का सम्मिश्रण और समयानुकूल प्रासंगिकता स्पष्ट दिखाई देती है। भाषा और सुमधुर कंठ आप की विशेषताएं है। इस परिचर्चा की अध्यक्षता महक जौनपुरी और संयोजन रचना सक्सेना एवं ऋतंभरा मिश्रा ने किया।


 


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