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गुप्तदेश से आयेगा संसार को बचाने वाला मसीहा

भारत, तिब्बत, मंगोलिया तथा कुछ योरोपियन यात्रियों मे विश्वास पाया जाता है कि मध्य एशिया के हिमालय क्षेत्र के उंचे मैदानी इलाकों मे है। कही एक गुप्त रहस्यमय और भूमिगत अति उन्नत सभ्यता बसी हुयी है, जो उनके शब्दों मे अरागट है। भारत मे उसे कैलास पर्वत व मानसरोवर के कुछ दूर स्थित ज्ञानगंज कहा गया है। कुछ पाश्चात्य लेखकों ने इस देश का नाम शांग्रीला बताया कुछ तिब्बती और मंगोलियन भिक्षुओं, भारतीय साधुओं, तपस्वियों तथा योरोपियन लेखकों ने इस सभ्यता मे यात्रा करने व कुछ दिन बिताने का भी दावा किया है। बौैैैैैद्ध भिक्षुओ ने अरागट तक पहुँचने के लिये एक लंबी सुरंग से गुजरने का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार अरागट मे दुःख बीमारी नाम की कोई चीज नही है। वहाँ के निवासियों की आयु पाँच सौ साल तक है। बौद्ध भिक्षुओं के अनुसार एक दिन अरागट की रहस्यमय दुनिया मे एक आदमी प्रकृट होगा वह सारे संसार पर शासन करेगा और बौद्ध दुनिया का बादशाह कहलायेगा लेकिन उसके प्रकृट होने से पूर्व संसार मे भयानक अशुभ घटनायें घटेगीं। बौद्ध भिक्षु उन घटनाओ की भविष्यवाणी कुछ इस प्रकार करते है। भाई-भाई के खून का प्यासा होगा इंसान अपनी आत्मा की आवाज नही सुनेगा हर तरफ भष्टाचार और बेईमानी का बोलबाला होगा सम्पूर्ण विश्व की शासन व्यवस्था बिगड़ जायेगी विश्व मे भारी नफरत फैलेगी देश आपस मे लड़ जायेगें तब एक बड़ा विनाशकारी विश्वयुद्ध होगा इस युद्ध मे सारी दुनिया के सारे लोग शामिल होंगे युद्ध मे संसार के अधिकांश देश नष्ट हो जायेगें चारों तरफ भुखमरी और अव्यवस्था का आलम होगा दुनिया के तमाम खुबसूरत शहर आग की लपटों के भेंट चढ जायेगें इसके पचास वर्ष बाद दुनिया मे केवल तीन शक्तिशाली देश बचेगें इसके भी अगले 18 वर्षों मे एक युद्ध भीषण होगा जिनमे वे भी नष्ट हो जायेंग इसके बाद संसार मे प्रलय आयेगी और सारी सृष्टि कई वर्षोे तक पानी मे डूबी रहेगी जब इस सृष्टि मे कोई नही बचेगा तब अरागट के निवासी अपने गुप्त ठिकाने से बाहर निकलेगें और इस सृष्टि को पुनः बचायेंगें तब अरागट का ही एक निवासी सारी दुनिया का बादशाह बनेगा बौद्ध भिक्षु यह नही बताते है। कि आखिर अरागट नाम का भूमिगत देश है। कहाँ इस रहस्य को वो अपने तक ही सीमित रखना चाहते है। तिब्बतियों के अनुसार वो प्रदेश किसी को नजर नही आता है। ज्यादातर लोगों के लिये वो इलाका अदृश्य रहता है। कुछ इस शंभाला कहते है कुछ शांग्रीला यहाँ के निवासी तकनीक मे सारी दुनिया से ही मामले मे आगे है। यह उँचे पर्वतों ये घिरी गुप्त घाटी में बसा है बाहरी दुनिया के लोगों को वहाँ कुछ नजर नही आता है। परन्तु उस इलाके मे कई बार अजीब और रहस्यमयी यानों को उड़ते देखा गया है कई बार ऐसे मनुष्यांे को देखा गया है। जो सामान्य मानव से भी ज्यादा तेज चलते है। कई बार ऐसे मनुष्य देखे गये है जो देखते-देखते गायब हो गये कुछ विद्वानों के अनुसार यह रहस्यमय प्रदेश चारों ओर से अलौकिक शक्तियों से घिरा होने के कारण ही नजर नही आता है। साभार-जिडम आॅफ दि एनसिएंट, लोबसांग राम्ॅपा। 1933 मे आई जेम्स हिल्टन के उपन्यास लाॅस्ट हाॅराईजन के उपन्यास मे भी तिब्बत मे स्थित गुप्त सभ्यता को शांग्रीला कहा गया हैं। कहा जाता है कि भारतीय क्रान्तिकारी और आई.एन.ए. के सुप्रीम कमांडर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जो विश्वयुद्ध के बाद रहस्यमय तरीके से गायब होकर रूस चले गये थे 1950 मे वो चीन के रास्ते तिब्बत गये वहाँ उन्होने कुछ माह इस गुप्त सभ्यता मे बितायें और वहाँ के साधुओं से दिशा निर्देश लेकर संयासी के रूप मे भारत मे आये थे गत सदी के चैथे व पांचवें दशक की मशहूर डांसर और अभिनेत्री देविका रानी के ससुर निकोलोई रोरिख द्वितीय विश्वयुद्ध के समय पैदल ही रूस से चीन होते हुये भारत आये थे रोरिख ने भी अपनी पुस्तकों मे इस सभ्यता के अस्तित्व का वर्णन किया वे वहाँ लंबे समय तक रहे थे और वहाँ से प्राचीन पुस्तकों का अपार भंडार अपने साथ लाये थे वहाँ उन्होने आकाश मे उड़ने वाले विचित्र यानों का तथा उड़ने वाले लौह डैªगनों का वर्णन किया है इस सिद्ध साधुओं की अघ्यात्मिक सभ्यता और विचित्र विमानों का वर्णन मलदहिया और बनारस के स्वामी विशुद्धानंद जी तथा पायलट बाबा ने भी किया है जिन्हे इस सभ्यता के कुछ सिद्ध साधुओं ने वर्षों तक इस गुप्त आश्रम रख कर योग आयुर्वेद, ज्योतिष सूर्य विज्ञान, चन्द्र विज्ञान, शब्द विज्ञान, गंध विज्ञान आदि अनेकों गुप्त प्राचीन रहस्यमय विद्याओ ंकी शिक्षा दी थी इनका कहना था कि इस आाश्रम मे साधारण मनुष्यों का प्रवेश वर्जित है। इसमे केवल योगी आदि सिद्ध पुरूष ही जा सकते है। केवल सिद्ध पुरूष ही इस आश्रम को देख सकते है बाकी लोगों को वहाँ सिवाय पर्वतों व घाटियांे के कुछ नजर नही आता है। 


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मनुष्य का जीवन अपने आसपास के वातावरण से ही प्रभावित होता है। व्यक्ति के आस-पास के पशु पक्षी उसके जीवन का अभिन्न अंग है। भारतीय ऋर्षियों तथा संसार के अध्यात्मवादियो ने संसार के पक्षियों को ना केवल ज्योतिष तथा मनुष्य के भाग्य से जोड़ा है। बल्कि पक्षियों को उपयोग शकुन ज्योतिष, फलित तथा प्रष्न ज्योतिष तथा अनेकों ज्योतिष, तांत्रिक उपचारों और शारीरिक मानसिक रोगों के निवारण में किया है। भारत मे पंच प़क्षी शास्त्र, कल्ली पुराण पर आधारित तोते द्वारा भविष्यवाणी, पक्षी तंत्र तथा शकुन ज्योतिष का प्रयोग आदिकाल से ही किया जाता है भारत मे गरूड़ जी, नीलकंठ, काकभुषुंडी,, हंस, जटायु व संपाती, शुकदेव जी आदि दिव्य पक्षियों तथा अनेक देवी देवताआंे वाहन के रूप मे पक्षियों को प्रयोग किये जाने का  वर्णन है। जैसे भगवान विष्णु का गरूड़, कार्तकेय जी का मयूर, माता लक्षमी का उल्लू, विश्वकर्मा, वरूण जी तथा स्वरसती जी का हंस आदि शनिदेव का कौआ आदि का प्राचीन काल मे पक्षियों द्वारा डाक सेवा युद्ध संबधी शकुन का भी काम लिया जाता था पक्षियों को स्वतंत्रता, नवीन विचारों, आनंद, तनाव, मुक्ति, प्रषंसा, यष, धन्यवाद देने, प्रजनन श

परिवर्तन योग से करें भविष्यवाणी

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